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Kerala Assembly: विभाजनकारी ताकतों का मुकाबले करने और हराने का संकल्प, विधानसभा में प्रस्ताव पास

Mon, 22 Aug 2022 03:52 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: Amit Mandal Updated Mon, 22 Aug 2022 03:52 PM IST
सार

मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन दोनों ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन से कई स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। 

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Kerala Assembly passes resolution to work towards countering, defeating divisive forces
Kerala Assembly (file photo( - फोटो : ANI

विस्तार

केरल विधानसभा ने सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें देश में विभाजनकारी ताकतों के प्रयासों का मुकाबला करने और उन्हें हराने और भारत को एक लोकतांत्रिक सामाजिक गणराज्य के रूप में बनाए रखने की दिशा में काम करने की बात की गई है। देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सदन में आयोजित विशेष एक दिवसीय सम्मेलन के दौरान प्रस्ताव पेश किया गया और पारित किया गया। इसके साथ ही 10 दिवसीय विधानसभा सत्र की शुरुआत भी की गई जिसे केरल के राज्यपाल की मंजूरी के अभाव में 8 अगस्त को समाप्त हुए राज्य सरकार के 11 अध्यादेशों के मद्देनजर बुलाया गया है।

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'स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को हटाने का प्रयास'
इस दौरान मुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन दोनों ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन से कई स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को हटाने का प्रयास किया जा रहा है और यह सामूहिक रूप से हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसे प्रयासों का विरोध करें। सम्मेलन की शुरुआत अध्यक्ष एम बी राजेश के भाषण से हुई, जिन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ केवल उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि यह विश्लेषण और मूल्यांकन करने का अवसर भी है कि क्या पिछले 75 वर्षों में आम आदमी स्वतंत्रता, न्याय, समानता और भाईचारे के संवैधानिक वादे का अधिकार हासिल कर पाया है।
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उन्होंने कहा कि अभी संवैधानिक वादों को देश में भारी वित्तीय असमानताओं, भाईचारे के विचार के खात्मे और कई अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राजेश ने विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों और प्रतिरोध आंदोलनों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. बी आर अंबेडकर ने कहा था कि स्वतंत्रता, न्याय, समानता और भाईचारा, ये सभी आवश्यक हैं और इनमें से कोई भी एक-दूसरे के बिना मौजूद नहीं रह सकता।
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वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में मौजूदा स्थिति की मांग है कि हम सभी धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, समानता और स्वतंत्रता के संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने के लिए कड़ा संघर्ष करें, जो स्वतंत्रता सेनानियों के सपने थे। सतीसन ने कहा कि हालांकि थोड़ी देर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं को किनारे करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उन्हें दूसरों के साथ बदलने का प्रयास हो रहा है।
 

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