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केरल विधानसभा चुनाव: सियासी पैमानों का नया इम्तिहान, मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ में; जानें भाजपा क्यों उत्साहित

Mon, 16 Mar 2026 05:12 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 16 Mar 2026 05:12 AM IST
सार

केरल में तीसरी बड़ी ताकत बनने में जुटी भाजपा खुद को राज्य की भाषाई पहचान की रक्षा करने वाले के तौर पर पेश कर रही है। केंद्र सरकार के राज्य का नाम बदलकर केरलम करने की मंजूरी दिए जाने के बाद पार्टी इसे चुनाव का एक मुख्य मुद्दा बना रही है।

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विस्तार

केरल में वैसे तो सत्ता बदलने की परंपरा रही है, मगर एलडीएफ ने पिछले चुनाव में पारंपरिक प्रवृत्ति को तोड़ दिया और पी. विजयन के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी। वर्तमान परिदृश्य में एलडीएफ अपनी विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे व कल्याणकारी कार्यक्रमों के आधार पर फिर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में है।
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दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी व प्रशासनिक मुद्दों पर हमलावर है। विपक्ष के नेता वीडी सतीशन आक्रामक हैं। वहीं, सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी भाजपा मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटा है। पिछले चुनाव में उसे एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी, लेकिन कई क्षेत्रों में उसका वोट प्रतिशत बढ़ा था।
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भाजपा क्यों उत्साहित?
बीते लोकसभा चुनाव में उसने त्रिशूर सीट जीतकर खाता खोला, तो दिसंबर में पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव भी जीत लिया। इससे उत्साहित पार्टी कुछ सीटें जीतकर राज्य में निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। भाजपा के आक्रामक प्रचार के चलते केरल की पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति के बीच कई जगहों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बन रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर उन सीटों पर रहेगी, जिन्हें अक्सर राज्य की चुनावी दिशा तय करने वाला माना जाता है। कुल मिलाकर, यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या पुनरावृत्ति का सवाल नहीं होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या एलडीएफ अपनी पकड़ बरकरार रख पाता है, क्या यूडीएफ वापसी कर पाता है, या भाजपा राज्य की राजनीति में नई जगह बना पाती है। 
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केरलम से मलयालम बिल, भाजपा ने तेज की अपनी सांस्कृतिक मुहिम
केरल में तीसरी बड़ी ताकत बनने में जुटी भाजपा खुद को राज्य की भाषाई पहचान की रक्षा करने वाले के तौर पर पेश कर रही है। केंद्र सरकार के राज्य का नाम बदलकर केरलम करने की मंजूरी दिए जाने के बाद पार्टी इसे चुनाव का एक मुख्य मुद्दा बना रही है। उसका दावा है कि इससे राज्य ज्यादा विकसित पहचान वाले नए प्रदेश में बदल जाएगा। साथ ही, मलयालम भाषा विधेयक का समर्थन कर पार्टी को उम्मीद है कि वह मतदाताओं के बड़े वर्ग का समर्थन हासिल कर लेगी। भाजपा नेतृत्व अब केरल, अगला विकसित केरल जैसे नारों के जरिये विकास की बात कह रहा है और इसे चुनावी नारों जैसे विकसित केरल और जो अब तक नहीं बदला, वह अब बदलेगा से जोड़ रहा है।


अहम सीटें प्रतिष्ठा पर उतरेंगी खरी  
राज्य की कुछ सीटें ऐसी हैं, जो एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बदलती रही हैं और यहां से जो चुना जाता है, वह निश्चित रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बनता है। त्रिशूर की ओल्लूर विधानसभा सीट सबसे महत्वपूर्ण है। 1982 से अब तक ओल्लूर में जिस भी गठबंधन की जीत हुई है, उसने हमेशा राज्य में सरकार बनाई है। पिछले दो चुनावों में भी यह ट्रेंड बरकरार है। तिरुवनंतपुरम जिले का सबसे दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र परास्सला भी लंबे समय से अपनी इस प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता रहा है कि वह राजनीतिक पैटर्न के पूर्वानुमानों को चुनौती देता आया है।

पिछला चुनाव-2021 : कुल सीट 140
पार्टी             सीट   वोट%
एलडीएफ      99    45.4
यूडीएफ         41    39.1
अन्य                 00    15

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