सुखपाल सिंह खैरा को हटाकर केजरीवाल ने चला दोहरा दांव, पड़ सकता है भारी
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कथित रुप से खालिस्तान समर्थक बयान देने के कारण अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल के नेता सुखपाल सिंह खैरा को उनके पद से हटा दिया। केंद्रीय नेतृत्व के कड़े रुख के बावजूद खैरा नरम नहीं पड़े और दो अगस्त को बठिंडा में आठ आप विधायकों की बैठक कर पार्टी को स्वतंत्र इकाई घोषित कर दिया। पार्टी के दोनों धड़ों के अड़ियल रुख से लगता है कि आप के एक और विभाजन की नींव पड़ चुकी है। खबर है कि सुखपाल सिंह खैरा जल्दी ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। हलांकि पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उन्हें मनाने की कोशिशें जारी हैं।
माना जा रहा है कि खैरा को उनके पद से हटाना आम आदमी पार्टी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा था जो अब उलटा पड़ता दिखाई दे रहा है। सुखपाल सिंह खैरा ने कथित रुप से जब खालिस्तान के समर्थन में बयान दिया तो उससे पार्टी की खूब किरकिरी हुई। उनके बयान के बाद कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा ने आप पार्टी को खालिस्तान समर्थक बताकर निशाने पर लिया। जाहिर है कि इससे पार्टी को पंजाब में नुकसान हो सकता था।
एक तरफ जहां पार्टी लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी को मजबूत बनाने की लगातार कोशिश कर रही है, वहीं खैरा के बयान के बाद उसे पंजाब में नुकसान होने का डर सता रहा था। पार्टी का यह भी मानना है कि 1984 के सिखविरोधी दंगों को मुद्दा बनाकर आप को जो लाभ दिल्ली में हुआ था, खैरा का यह बयान उसे भी नुकसान पहुंचा सकता था। इसलिए खैरा को हटाकर केजरीवाल पंजाबी समुदाय में एक सकारात्मक संदेश देना चाहते थे।
मनाने की कोशिश जारी
बयान के बाद पार्टी को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केजरीवाल ने दलित मुद्दे का दांव चला। पंजाब में लगभग एक तिहाई आबादी दलित है। ऐसे में पार्टी को अब भी उम्मीद है कि दलित चेहरे हरपाल सिंह चीमा को पंजाब विधानसभा में विपक्षी दल का नेता बनाए जाने से उसे इसका लाभ मिलेगा। उसके इस फैसले का सकारात्मक असर दिल्ली की राजनीति में भी पड़ेगा क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने वाला एक बड़ा वर्ग दलित समुदाय से ही आता है।
मनाने की कोशिश जारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक खैरा के विवादित बयान के बाद केजरीवाल उनसे बेहद खफा थे। उनकी नाराजगी दूर करने के लिए सुखपाल सिंह खैरा दिल्ली पहुंचे लेकिन केजरीवाल ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। इसके बाद पार्टी में नंबर दो मनीष सिसोदिया ने उनसे मुलाकात की और उन्हें डांट-फटकार लगाई।
लेकिन खैरा पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और दो अगस्त को उन्होंने पार्टी के आठ विधायकों की अलग बैठक की जिसे पार्टी ने आप विरोधी कार्य करार दिया। अगर सुखपाल सिंह खैरा के साथ आठ विधायकों के साथ बाहर जाते हैं तो इससे पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी कारण आप अभी भी उन्हें मनाने की कोशिश में जुटी हुई है।