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कठुआ गैंगरेप-हत्या: समुदाय विशेष को तहसील से भगाने के लिए रची गई थी साजिश

Thu, 12 Apr 2018 01:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Apr 2018 01:11 PM IST
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Kathua Gangrape and murder was meant to drive out Bakkarwala Tribe from the Tehsil

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में नाबालिग के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी है। इस घटना को मास्टरमाइंड सांझीराम, उसका नाबालिग भतीजा और 6 लोगों ने इसलिए अंजाम दिया था ताकि हीरानगर तहसील से बक्करवाला समुदाय को भगाया जा सके। सांझीराम हिंदू समुदाय के सदस्यों से कहता था कि वे बक्करवाला समुदाय के पशुओं को अपनी जमीन पर चारा न चरने दें। तहसील के लोगों की बक्करवाला समुदाय को लेकर सामान्य धारणा यह थी कि वह लोग गौ-हत्या और नशे का व्यापार करते हैं। जिसकी वजह से उनके बच्चे नशे की चपेट में आते जा रहे हैं। 

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चार्जशीट के अनुसार इसी वजह से बक्करवाला समुदाय को डराने के लिए किसी ना किसी मामले के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया करते थे। सांझी की सोच से इत्तेफाक रखने वाले लोगों ने उसे बक्करवाला समुदाय को उखाड़ फेंकने के लिए एक रणनीति बनाने के लिए कहा। क्षेत्र में दोनों समुदायों के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दोनों एक-दूसरे पर एफआईआर करवाते रहते थे।
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क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार नाबालिग को नशे की गोलियां देकर मंदिर में बंदी बनाकर रखा गया था। उसके साथ एक हफ्ते में कई बार गैंगरेप किया गया। हत्या से पहले भी उसका बलात्कार किया गया था। सबसे ज्यादा शर्मनाक वाकया यह था कि मंदिर में बच्ची के साथ ज्यादती करने के बाद सांझीराम वहीं पूजा-पाठ भी करता था। इस घटना में सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा सहित हेड कांस्टेबल तिलक राज भी शामिल थे।
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गैंगरेप में एक नाबालिग भी शामिल था। उसने 11 जनवरी को मेरठ में रहने वाले अपने चचेरे भाई विशाल जंगोत्रा को फोन करके अपनी करतूत के बारे में बताया और उसे भी इस घिनौने कृत्य में शामिल होने के लिए बुलाया था। इसके बाद 12 जनवरी को विशाल रसाना पहुंच गया था। मासूम की हत्या करने से पहले इस पूरे कांड में शामिल चार पुलिसकर्मियों ने भी बच्ची का बलात्कार किया था। इसके बाद बच्ची के सिर पर पत्थर मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी।

घटना के बारे में किसी को पता न चले इसलिए सभी आरोपियों ने उसके शव को नहर में फेंकने की योजना बनाई थी, लेकिन वाहन की व्यवस्था न होने पर उन्होंने शव को जंगल में फेंक दिया था।सांझीराम ने इस मामले को दबाने के लिए कुछ पुलिसवालों से सांठगांठ भी कर ली थी। रिपोर्ट के अनुसार मामले को रफादफा करने और सबूतों को मिटाने के एवज में पुलिसवालों ने चार लाख रुपये लिये थे।

क्या कहती है क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट?

Kathua Gangrape and murder was meant to drive out Bakkarwala Tribe from the Tehsil
23 जनवरी को, यानी बच्ची की लाश पाए जाने के छह दिन बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मामले की जांच पुलिस की मशहूर क्राइम ब्रांच को सौंपने का एलान किया था। जांचकर्ताओं की विशेष टीम ने हीरानगर थाने के पुलिसवालों से पूछताछ के बाद पाया कि दीपक खजूरिया और दूसरे पुलिस अफसर, जो गुज्जर परिवार के साथ बच्ची को तलाश रहे थे, उन्होंने बच्ची के खून और मिट्टी से सने कपड़े, जांच के लिए भेजने से पहले धोए थे। 

जांच से पता चला कि बच्ची को नशे की गोलियां देकर उससे बार-बार बलात्कार किया गया था। उसे रसाना गांव के मंदिर में कैद करके रखा गया था। जांच के मुताबिक, देवस्थान के संरक्षक सांझी राम ने अपने भतीजे और बेटे के साथ मिलकर ये साजिश रची थी। उसके बेटे और भतीजे ने दो बार बच्ची से बलात्कार किया था। इसका मकसद गुज्जरों को डराना था, ताकि वो अपनी जमीनें बेचकर वहां से चले जाएं। क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची को देने के लिए नशे की गोलियां खजूरिया खरीदते थे। 

60 साल के सांझी राम, उनके बेटे विशाल और नाबालिग भतीजा, पुलिस कर्मी दीपक खजूरिया और सुरेंदर वर्मा, सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और एक नागरिक परवेश कुमार को केस की चार्जशीट में अभियुक्त बनाया गया है।

क्या है मामला?

नाबालिग बच्ची 10 जनवरी से ही गुम थीं। वो अपने आदिवासी गांव रसना के पास ही जंगल में अपने परिवार के घोरे को चराने गई थीं और फिर कभी घर नहीं लौटी। 17 जनवरी को उनका शव मिला, जिसपर चोट के निशान थे। इसके बाद से ही इलाके में राजनीतिक उथल पुथल मची हुई है। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में मास्टरमाइंड सांझी राम और उनके बेटे विशाल कुमार समेत नौ अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल, दो एसपीओ और एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। 

रिटायर्ड राजस्व अधिकारी सांझी राम ने 20 मार्च को क्राइम ब्रांच के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इससे ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ से उनके बेटे विशाल कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इस घटना के बाद पूरे राज्य में मचे हंगामे के बीच दोनों बाप-बेटे लगातार गिरफ्तारी से बचने की कोशिश में लगे थे।
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