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नई शिक्षा नीति को लेकर बंगलौर में मंथन करेगी कस्तूरीरंगन समिति 

Thu, 10 Aug 2017 08:09 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Aug 2017 08:09 PM IST
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Kasturirangan Committee will churn in Bangalore on new education policy
मानव सांसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : PTI
नई शिक्षा नीति  को लेकर देश के प्रमुख वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन के नेतृृत्व में बनी समिति 16 से 18 अगस्त तक बंगलौर में मैराथन बैठक कर नई नीति का खाका खिंचेगी। इससे पहले समिति के तमाम सदस्य अपने- अपने स्तर पर हर वर्ग एवं समाज से चर्चा कर शिक्षा नीति का खाका खिंचने में मशगूल हैं।
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इस कवायद में समिति के सदश्यों ने बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के जन्म स्थल मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित महू में पहुंचकर भी यहां के बौद्धिक वर्ग से नई शिक्षा नीति के लिए राय एकत्रित की है। मंगलवार को यहां पर एक सेमिनार का आयोजन कर देश के तमाम शिक्षाविदों ने नई शिक्षा नीति को समावेशी बनाने पर मंथन किया।
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चर्चा में शामिल शिक्षाविदों का मानना है किे जिस तरह भारत के संविधान में सभी को बराबर के अधिकार प्राप्त हैं ठीक उसी तरह शिक्षा में भी सभी के लिए समान अवसर होने चाहिए। नई शिक्षा नीति के जरिए सबको समान अवसर देने का प्रयास रहेगा। अमीर हो यां गरीब शिक्षा व्यवस्था में उनके बीच भेद नहीं किया जा सकता है। सभी के बच्चे एक व्यवस्था वाले स्कूल में पढे इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को समावेशी बनाने पर जोर रहेगा। 
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नई शिक्षा नीति में एक परीक्षा और एक समान शिक्षा पर रहेगा जोर 

Kasturirangan Committee will churn in Bangalore on new education policy
मानव सांसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर

नई शिक्षा नीति के प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए मानव सांसाधन विकास मंत्रालय के जरिए के कस्तूरीरंगन के नेतृृत्व में बनी समिति के सदस्य आरएस कूरील ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि देश में एक समान शिक्षा, एक परीक्षा और सबके लिए समान अवसर प्रदान करने की नीति पर जोर रहेगा। डा बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविधालय के कुलपति आरएस कूरील के अनुसार गांव स्तर पर उच्च शिक्षा का प्रसार जरूरी है। यहां पर उच्च शिक्षा का नेटवर्क स्थापित करने के साथ शिक्षा को समावेशी बनाने की जरूरत है।

इसके लिए पूरे देश में एक शिक्षा व्यवस्था, एक पाठयक्रम और एक परीक्षा लागू करने की जरूरत है। ताकि सबको बराबर का अवसर मिल सके। कूरील ने कहा कि शिक्षा के बाजारीकरण के बाद भेदभाव बढ़ा है। आम और गरीब आदमी उंची शिक्षा लेने में महरूम रह जाते हैं। इसलिए देश में ऐसी शिक्षा नीति की जरूरत है जिससे की सबको एक जैसी शिक्षा मिल सके। हमारा जोर शिक्षा को समावेशी बनाने पर रहेगा।

बाबा साहब के जन्म स्थल महू में पहुंचकर नई शिक्षा नीति पर चर्चा किए जाने के सवाल पर कूरील ने कहा कि शिक्षा नीति का सदश्य होने के नाते यह जरूरी है कि सबकी राय इसमें शामिल की जाए। इसलिए आम और वंचित वर्ग की राय जानने के लिए चर्चा का आयोजन था। कूरील के अनुसार नई शिक्षा नीति के प्रारूप के लिए 16 से 18 अगस्त तक बंगलौर में बैठक होगी। इसमें सभी सदश्य अपने- अपने अनुभव साझा करेंगे। और प्रारूप को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू होगी। 

पारंपरिक कौशल को बढावा देने की जरूरत
कस्तूरीरंगन समिति के एक अन्य सदश्य मिलिंद कामले के अनुसार हमारे यहां कौशल पहले से ही विधमान हैं बस जरूरत है उन्हें सही ढंग से उभारने की। उन्होंने कहा कि चर्चा में यह बात निकलकर आई है कि शिक्षा को समावेशी बनाने के लिए कौशल विकास पर जोर देना होगा। हमारे यहां कौशल के पारंपरिक तरीके विधमान हैं। उन्हें भूलने के बजाय उनकी पहचान कर उनकी मैपिंग करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब अभी नौकरी से रह गया है। ऐसे में हमें पुराने पारंपरिक कौशल को नहीं भूलाना चाहिए। नई शिक्षा नीति में पारंपरिक कौशल को बढावा देने पर जोर रहेगा। 

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