एएमयू में विरोध के चलते इस बार अलग-थलग पड़े कश्मीरी छात्र
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सीनियर छात्रों के मुखर विरोध और प्रॉक्टोरियल टीम की सूझबूझ से एएमयू भारी बदनामी से बच गया। मामले को लेकर सीनियर छात्रों के विरोध के चलते इस बार कश्मीरी छात्र अलग-थलग पड गए। मन्नान को शहीद दर्जा देने पर अड़े चार कश्मीरी छात्रों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
दरअसल संसद पर हमले के मास्टर माइंड अफजल गुरु की फांसी के बाद भी एएमयू में कश्मीरी छात्रों ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी के बाहर नमाज-ए-गायबाना अदा की थी। कश्मीरी छात्रों ने अफजल गुरु को शहीद बताते हुए कैंपस में विरोध मार्च भी निकाला था। उस समय कश्मीरी छात्रों का दबाव इतना अधिक था कि किसी ने इसका विरोध नहीं किया था।
मन्नान को शहीद घोषित करने की मांग करने वाले थे कश्मीरी छात्र
गुरुवार को भी मन्नान वानी के मारे जाने की सूचना मिलने के बाद से ही कश्मीर के छात्र उसे शहीद घोषित करने को लेकर गोलबंद होने लगे थे। सीनियर छात्रों को अंदेशा हो गया था कि नमाज-ए-जनाजा के बाद एएमयू भी जेएनयू की तरह पूरे देश में बदनाम हो जाएगा। उन लोगों ने कश्मीर के छात्रों को समझाने का प्रयास किया कि यहां नमाज-ए-जनाजा नहीं पढ़ें।
कुछ छात्र तो शांत हो गए लेकिन कुछ नमाज-ए-जनाजा की जिद पर अड़ गए। इसकी वजह से फैजुल हसन की कुछ कश्मीरी छात्रों से कहासुनी भी हो गई। कश्मीरी छात्रों को गोलबंद होते देख एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन सहित अन्य कई सीनियर छात्र भी वहां समझाने के लिए पहुंच गए, लेकिन वे नहीं माने।
इसकी वजह से फैजुल हसन की कुछ कश्मीरी छात्रों से कहासुनी भी हो गई। उन्होंने कहा कि खुदा के लिए यहां पर सियासत कर एएमयू का नाम बदनाम न करें। प्रॉक्टर प्रो. मोहसिन खान वहां मौजूद थे। छात्रों की प्रॉक्टोरियल टीम से नोकझोंक हो गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को दौड़ा कर भगा दिया।