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आठ साल से रोज पहाड़ चढ़कर बच्चों को पढ़ाने जाता है ये शिक्षक
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Jun 2016 03:53 PM IST
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- फोटो : times of india
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कुछ लोग स्कूल पैदल जाते है तो कुछ लोग साइकिल और गाड़ियों से, लेकिन सुरेश बी चालागोरी को स्कूल जाने के लिए प्रतिदिन पहाड़ पर चढ़ना होता है। बच्चों को पढ़ाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुके चालागोरी पिछले 8 सालों से प्रतिदिन स्कूल जाने के लिए पहाड़ की चढ़ाई करते हैं। बैरापुरा के प्राथमिक विद्यालय को अभी तक चलाने का सारा श्रेय चालागोरी को ही जाता है।
टाइम्स आॅफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आठ साल पहले, 50 वर्षीय चालागोरी की पोस्टिंग कर्नाटक के गडग जिले में स्थित बैरापुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। उस वक्त यह स्कूल बंद होने की कगार पर था। इस स्कूल में अधिकतर लंबानी जनजाति के बच्चे पढ़ते हैं। अपने तबादले के दिनों को याद करते हुए चालागोरी कहते हैं, 'स्कूल कहां था, इस बारे में कुछ नहीं पता था। मुझे बस लैंडमार्क कालकेश्वर मंदिर के बारे में बताया गया था। जब मैंने स्कूल के बारे में पूछा तो मुझे कहा गया कि पहाड़ पर चढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'
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टाइम्स आॅफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आठ साल पहले, 50 वर्षीय चालागोरी की पोस्टिंग कर्नाटक के गडग जिले में स्थित बैरापुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। उस वक्त यह स्कूल बंद होने की कगार पर था। इस स्कूल में अधिकतर लंबानी जनजाति के बच्चे पढ़ते हैं। अपने तबादले के दिनों को याद करते हुए चालागोरी कहते हैं, 'स्कूल कहां था, इस बारे में कुछ नहीं पता था। मुझे बस लैंडमार्क कालकेश्वर मंदिर के बारे में बताया गया था। जब मैंने स्कूल के बारे में पूछा तो मुझे कहा गया कि पहाड़ पर चढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'
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स्कूल के लिए मैं टीचर के साथ-साथ प्लंबर और सफाई वाला भी
प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : getty images
चालागोरी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतें हुई, लेकिन अब यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। चालागोरी रोज पहाड़ पर चढ़ते हैं, कभी-कभी तो उन्हें अपने साथ मिड-डे-मील का राशन, किताबें और स्टेशनरी को भी ढोना पड़ता है। इस स्कूल में सालाना लगभग 60 बच्चों का नामांकन होता है।
चालागोरी ने बताया कि स्कूल में छात्रों की संख्या में कमी न आए, इसकी जिम्मेदारी मुझ पर है। स्कूल में इस वक्त तीन शिक्षक हैं, लेकिन मैं हेडमास्टर, टीचर, प्लंबर और सफाई वाले की भूमिका निभाता हूं।
Published by- Vikrant Singh
चालागोरी ने बताया कि स्कूल में छात्रों की संख्या में कमी न आए, इसकी जिम्मेदारी मुझ पर है। स्कूल में इस वक्त तीन शिक्षक हैं, लेकिन मैं हेडमास्टर, टीचर, प्लंबर और सफाई वाले की भूमिका निभाता हूं।
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