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Politics: कर्नाटक के नतीजे से मिल जाएगा 2024 का संकेत, राहुल गांधी की एकजुटता की अपील का कितना होगा असर

Sat, 15 Apr 2023 08:52 PM IST
निर्मल कांत शशिधर पाठक, नई दिल्ली।
शशिधर पाठक, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 15 Apr 2023 08:52 PM IST
सार

ललन सिंह के मुताबिक, भाजपा को 2024 में बड़ा झटका देने की तैयारी बिहार के साथ-साथ देश के सभी राज्यों से होगी। जद (यू) के ही एक और नेता कहते हैं कि अध्यक्ष जी ने कह दिया तो उनका बोलना ठीक नहीं है।

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Karnataka result will give an indication 2024 how much effect of Rahul Gandhis appeal solidarity
राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी

विस्तार

कांग्रेस के पूर्व महासचिव और कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य बीके हरिप्रसाद दो दावे कर रहे हैं। पहला, 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा बुरी तरह हार रही है। कांग्रेस बहुमत की तरफ है। दूसरा, कर्नाटक का नतीजा 2023 में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करेगा। अगर बिहार की बात करें तो वहां भी बड़ी हलचल है। जद (यू) के अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का कहना है कि दिल्ली में बढ़ी हलचल से केन्द्र की सरकार की बौखलाहट बढ़ रही है। वह मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रही है। ललन सिंह दावा कर रहे हैं कि 2024 में भारत भाजपा मुक्त हो जाएगा।

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ललन सिंह के मुताबिक, भाजपा को 2024 में बड़ा झटका देने की तैयारी बिहार के साथ-साथ देश के सभी राज्यों से होगी। जद (यू) के ही एक और नेता कहते हैं कि अध्यक्ष जी ने कह दिया तो उनका बोलना ठीक नहीं है। सूत्र का कहना है कि भाजपा को किसी मुगालते में नहीं रहना चाहिए। हमारे नेता और बिहार के मुख्यमंत्री अपना काम कर रहे हैं। इसका नतीजा भी दिखेगा। विपक्ष के इस अभियान में तेजस्वी यादव से तमाम प्रयास के बाद भी बात नहीं हो पाई। राहुल गांधी के राजनीतिक मामलों में उनके एक सहयोगी का कहना है कि हमारा पहला फोकस अभी कर्नाटक है। इसके बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान और म.प्र. के विधान सभा चुनाव हैं। सूत्र का कहना है कि अभी हम भाजपा के बारे में कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन विपक्ष और खासकर कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा फायदा होता दिखाई देगा। बस थोड़ा इंतजार कीजिए।
 

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विपक्षी एकता बन पाएगी?
शिवसेना के नेता संजय राऊत को विपक्ष की एकता बनने में कोई संदेह नहीं है। आम आदमी पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने अभी इस बारे में कुछ ज्यादा नहीं कहा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर कोई न कोई निर्णय लेना होगा। सूत्र के मुताबिक 2024 से पहले ही कुछ न कुछ हो जाएगा। एनसीपी के लोकसभा के सांसद के मुताबिक मीडिया में क्या चल रहा है, उस पर मत जाइए। जब बिहार के मुख्यमंत्री दिल्ली में थे तो हमारे नेता शरद पवार भी थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नीतीश कुमार, शरद पवार सब मिले हैं। अनुभवी नेता हैं। कोई न कोई निर्णय जरूर लेंगे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उनके साथ कन्याकुमारी से श्रीनगर तक रहने वाले सूत्र का कहना है कि विपक्ष की एकता बनेगी और उसमें मुख्य भूमिका में कांग्रेस रहेगी। सूत्र का कहना है कि 13-14 राजनीतिक दल एक साथ आकर भाजपा को कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
 

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कर्नाटक में क्यों मचा है भाजपा में कोहराम 
बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि आरएसएस का मूल कॉडर कर्नाटक में भाजपा को छोड़ रहा है। उसके ऐसे दो विधान परिषद सदस्य कांग्रेस में आना चाह रहे थे और पार्टी ने दोनों की पुरानी आरएसएस पृष्ठभूमि देखकर मना कर दिया। दो-तीन और एमएलसी आने के लिए संपर्क कर रहे हैं। सात एमएलसी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में आ गए हैं। अब आप समझ लीजिए कि भाजपा की स्थिति क्या है? वहां तो भगदड़ और हताशा जैसी हालत है। जदगीश शेट्टार जैसा नेता नाराज है। यह सब भाजपा के टिकट की घोषणा के बाद हुआ। बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि भाजपा की सरकार आकंठ भ्रष्टाचार और तानाशाही में डूबी थी। भाजपा के लोग हमसे अपने भ्रष्टाचार का सबूत मांगते थे। उनके दो एमएलए भ्रष्टाचार में रंगे हाथ पकड़े गए। एक के बेटे के पास से 8 करोड़ रुपये की बरामदगी हुई। बीके हरिप्रसाद का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई संदेह नहीं है। भाजपा जिस लिंगायत समुदाय में अपना दबदबा बताती थी, अब वह बड़े पैमाने पर उसका साथ छोड़ रहा है।
 

राहुल गांधी ने की है एकजुट होकर लड़ने की अपील
कांग्रेस नेता मनोज त्यागी बताते हैं कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक पर विशेष फोकस कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह राज्य कर्नाटक है। कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला हैं। कुल मिलाकर पार्टी कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को मुख्य भूमिका में रखकर चुनावी गणित साध रही है। डीके शिव कुमार का कर्नाटक में अच्छा क्रेज है। कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ने वाली। साथ ही भाजपा को यह संदेश देने में कि 2024 में उसकी राह आसान नहीं होने जा रही है।

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