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Lok Sabha Election: एक बार फिर परिवार पर निर्भर हुई जेडीएस, वंशवादी राजनीति ही बनी पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी
Fri, 05 Apr 2024 12:00 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 05 Apr 2024 12:00 PM IST
सार
देवेगौड़ा के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना होलेनरसीपुरा सीट से विधायक हैं। उनकी पत्नी भवानी हासन जिला पंचायत की सदस्य हैं और बेटे प्रज्जवल पिछला लोकसभा चुनाव लड़कर हार चुके हैं। अब एक बार फिर से आम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
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जेडीएस में देवेगौड़ा परिवार का दबदबा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश की राजनीति में वंशवाद के मुद्दे पर खूब बात होती है। कर्नाटक की जनता दल (सेक्युलर) पार्टी भी इसका उदाहरण है, जहां पूरी पार्टी अब एक ही परिवार पर निर्भर होती दिख रही है। कर्नाटक में भाजपा के साथ गठबंधन के तहत जेडीएस तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और तीन में से दो सीटों पर जेडीएस ने परिवार के सदस्यों को ही मौका दिया है। वहीं देवेगौड़ा के दामाद सीएन मंजूनाथ भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
जेडीएस पर वंशवाद हावी
जेडीएस पार्टी में वंशवाद कितना हावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार के नौ सदस्य राजनीति में हैं। पूर्व पीएम देवेगौड़ा जहां खुद राज्यसभा से सांसद हैं। वहीं बेटे कुमारस्वामी चन्नापटना से विधायक हैं। कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कर्नाटक की रामनगर सीट से विधायक हैं और बेटे निखिल, जो कि जेडीएस की यूथ विंग के नेता हैं, वह भी साल 2019 में मंड्या सीट से लोकसभा चुनाव और साल 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
ओल्ड मैसूर इलाका है जेडीएस का गढ़
देवेगौड़ा के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना होलेनरसीपुरा सीट से विधायक हैं। उनकी पत्नी भवानी हासन जिला पंचायत की सदस्य हैं और बेटे प्रज्जवल पिछला लोकसभा चुनाव लड़कर हार चुके हैं। अब एक बार फिर से आम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। रेवन्ना के दूसरे बेटे सूरज भी एमएलसी हैं। इस तरह देवेगौड़ा परिवार का राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद समेत चारों सदनों का सदस्य है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी देवेगौड़ा परिवार के तीन सदस्यों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था और इस बार फिर से परिवार के तीन सदस्य लोकसभा चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक के ओल्ड मैसूर इलाके को जेडीएस का गढ़ माना जाता है क्योंकि यहां पर वोक्कालिगा समुदाय का बहुमत है और देवेगौड़ा परिवार भी इस समुदाय से संबंधित है।
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जेडीएस की कमजोरी बना वंशवाद
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर जेम्स मेनर कर्नाटक की राजनीति पर करीब से नजर रखते हैं। बीते साल विधानसभा चुनाव के दौरान एक वेबिनार में उन्होंने कहा कि परिवार आधारित राजनीति ही जेडीएस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। इसकी वजह से पार्टी केंद्रीकृत और तानाशाही नेतृत्व की तरफ जा रही है। जेडीएस का प्रभाव पुराने मैसूर के वोक्कालिगा समुदाय और उत्तरी कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों तक सीमित है। विरोधी भी पार्टी पर वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हैं। हालांकि जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी वंशवाद के आरोपों से इनकार करते हैं और उनका कहन है कि जब हमारे पास सक्षम उम्मीदवार नहीं होते हैं, तभी हमारे परिवार के सदस्य चुनाव लड़ते हैं ताकि हमारी पार्टी के हित सुरक्षित रहें।
डीके शिवकुमार ने कसा तंज
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी परिवार के सदस्यों को ही चुनाव लड़ाने के लिए जेडीएस पर निशाना साधा और कहा कि 'क्या उनके पास दूसरे उम्मीदवार नहीं हैं...इनमें से कोई भी नहीं जीत सकेगा। पार्टी अपनी ताकत खो चुकी है और अगर सच में उनका प्रभाव है तो उन्होंने दामाद को भाजपा के टिकट पर क्यों चुनाव लड़ाया है?' कर्नाटक में भाजपा और जेडीएस का लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन है। गठबंधन के तहत जेडीएस को तीन लोकसभा सीटें मिली हैं। वहीं भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जेडीएस को मंड्या, हासन और कोलार सीटें मिली हैं। मंड्या से एचडी कुमारस्वामी, हासन से प्रज्जवल रेवन्ना और कोलार से एम महेश बाबू चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं देवेगौड़ा के दामाद और मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ सीएन मंजूनाथ भाजपा के टिकट पर बंगलूरू ग्रामीण सीट से चुनाव मैदान में हैं। सीएन मंजूनाथ का डीके शिवुकमार के भाई डीके सुरेश से सामना होगा।
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जेडीएस पर वंशवाद हावी
जेडीएस पार्टी में वंशवाद कितना हावी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार के नौ सदस्य राजनीति में हैं। पूर्व पीएम देवेगौड़ा जहां खुद राज्यसभा से सांसद हैं। वहीं बेटे कुमारस्वामी चन्नापटना से विधायक हैं। कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कर्नाटक की रामनगर सीट से विधायक हैं और बेटे निखिल, जो कि जेडीएस की यूथ विंग के नेता हैं, वह भी साल 2019 में मंड्या सीट से लोकसभा चुनाव और साल 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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ओल्ड मैसूर इलाका है जेडीएस का गढ़
देवेगौड़ा के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना होलेनरसीपुरा सीट से विधायक हैं। उनकी पत्नी भवानी हासन जिला पंचायत की सदस्य हैं और बेटे प्रज्जवल पिछला लोकसभा चुनाव लड़कर हार चुके हैं। अब एक बार फिर से आम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। रेवन्ना के दूसरे बेटे सूरज भी एमएलसी हैं। इस तरह देवेगौड़ा परिवार का राज्यसभा, लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद समेत चारों सदनों का सदस्य है। पिछले लोकसभा चुनाव में भी देवेगौड़ा परिवार के तीन सदस्यों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था और इस बार फिर से परिवार के तीन सदस्य लोकसभा चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक के ओल्ड मैसूर इलाके को जेडीएस का गढ़ माना जाता है क्योंकि यहां पर वोक्कालिगा समुदाय का बहुमत है और देवेगौड़ा परिवार भी इस समुदाय से संबंधित है।
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जेडीएस की कमजोरी बना वंशवाद
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर जेम्स मेनर कर्नाटक की राजनीति पर करीब से नजर रखते हैं। बीते साल विधानसभा चुनाव के दौरान एक वेबिनार में उन्होंने कहा कि परिवार आधारित राजनीति ही जेडीएस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। इसकी वजह से पार्टी केंद्रीकृत और तानाशाही नेतृत्व की तरफ जा रही है। जेडीएस का प्रभाव पुराने मैसूर के वोक्कालिगा समुदाय और उत्तरी कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों तक सीमित है। विरोधी भी पार्टी पर वंशवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हैं। हालांकि जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी वंशवाद के आरोपों से इनकार करते हैं और उनका कहन है कि जब हमारे पास सक्षम उम्मीदवार नहीं होते हैं, तभी हमारे परिवार के सदस्य चुनाव लड़ते हैं ताकि हमारी पार्टी के हित सुरक्षित रहें।
डीके शिवकुमार ने कसा तंज
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी परिवार के सदस्यों को ही चुनाव लड़ाने के लिए जेडीएस पर निशाना साधा और कहा कि 'क्या उनके पास दूसरे उम्मीदवार नहीं हैं...इनमें से कोई भी नहीं जीत सकेगा। पार्टी अपनी ताकत खो चुकी है और अगर सच में उनका प्रभाव है तो उन्होंने दामाद को भाजपा के टिकट पर क्यों चुनाव लड़ाया है?' कर्नाटक में भाजपा और जेडीएस का लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन है। गठबंधन के तहत जेडीएस को तीन लोकसभा सीटें मिली हैं। वहीं भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जेडीएस को मंड्या, हासन और कोलार सीटें मिली हैं। मंड्या से एचडी कुमारस्वामी, हासन से प्रज्जवल रेवन्ना और कोलार से एम महेश बाबू चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं देवेगौड़ा के दामाद और मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ सीएन मंजूनाथ भाजपा के टिकट पर बंगलूरू ग्रामीण सीट से चुनाव मैदान में हैं। सीएन मंजूनाथ का डीके शिवुकमार के भाई डीके सुरेश से सामना होगा।