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कर्नाटक: सहमति का रिश्ता हिंसा की अनुमति नहीं, इंस्पेक्टर पर दुष्कर्म के आरोप गलत, अब इन धाराओं में चलेगा केस
Sun, 26 Jan 2025 04:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 26 Jan 2025 04:38 AM IST
सार
न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने रिश्ते की सहमति की बात को स्वीकार किया और धारा 376(2)(एन) के तहत बार-बार दुष्कर्म के आरोप को खारिज कर दिया। हालांकि, न्यायमूर्ति ने मारपीट, धमकी और हत्या के प्रयास से संबंधित अन्य आरोपों को बरकरार रखा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सेवारत पुलिस निरीक्षक से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सहमति से बने रिश्ते मारपीट की अनुमति नहीं देते। हालांकि, अदालत ने निरीक्षक पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोपों को खारिज कर दिया। इसके अलावा, मारपीट, धमकी और हत्या के प्रयास से संबंधित अन्य आरोपों को बरकरार रखा।
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बता दें कि एक पुलिस कॉन्सटेबल की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता ने पुलिस निरीक्षक पर मारपीट और धमकी सहित विभिन्न अपराधों का आरोप लगाया था। वह 2017 में भद्रावती ग्रामीण पुलिस स्टेशन में गई थी। इस दौरान उसके और आरोपी निरीक्षक के बीच संबंध शुरू हुए। मई 2021 तक, शिकायतकर्ता ने महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि निरीक्षक ने उसका शारीरिक और यौन उत्पीड़न किया।
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शिकायत वापस न लेने पर निरीक्षक ने दी धमकी
इस बीच, निरीक्षक ने उसे धमकी दी कि यदि उसने अपनी शिकायत वापस नहीं ली तो वह उसके बच्चों को नुकसान पहुंचाएगा। इससे स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद, निरीक्षक पर शांति भंग करने के इरादे से अपमान करने और आपराधिक धमकी देने के लिए क्रमशः आईपीसी की धारा 504 और 506 के तहत अतिरिक्त आरोप लगाए गए।
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निरीक्षक ने 2021 में महिला का अपहरण कर मारपीट की
नवंबर 2021 में, निरीक्षक ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता का अपहरण कर लिया, उसे एक होटल में ले गया। इस दौरान निरीक्षक ने महिला के साथ मारपीट की और उसे अगली सुबह सागर बस स्टॉप पर छोड़ दिया। महिला ने मेडिकल कराने के बाद, एक और शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने निरीक्षक पर दुष्कर्म, अपहरण, गलत तरीके से बंधक बनाना, हत्या का प्रयास और हमले सहित विभिन्न आईपीसी धाराओं के तहत अपराध का आरोप लगाया।
निरीक्षक ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत बरी करने का हवाला दिया
इसके बाद, आरोपी निरीक्षक ने इन आरोपों का विरोध किया। इस दौरान उसने दावा किया कि दोनों के बीच संबंध शुरू से ही सहमति से था। निरीक्षक ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत संबंधित मामले में खुद को बरी करने का हवाला दिया।
न्यायमूर्ति ने दुष्कर्म के आरोप को खारिज किया
न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने रिश्ते की सहमति की बात को स्वीकार किया और धारा 376(2)(एन) के तहत बार-बार दुष्कर्म के आरोप को खारिज कर दिया। हालांकि, न्यायमूर्ति ने मारपीट, धमकी और हत्या के प्रयास से संबंधित अन्य आरोपों को बरकरार रखा। अदालत ने शिकायतकर्ता पर की गई 'घोर स्त्री-द्वेषी क्रूरता' पर टिप्पणी की, और इन मामलों पर मुकदमा आगे बढ़ने की अनुमति दी।