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Karnataka High Court: अपने विदाई समारोह में बोले जस्टिस भट्ट- जजों के ऊपर आरोप लगने पर उनका भी हो नार्को टेस्ट

Sat, 06 Aug 2022 08:56 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 Aug 2022 08:56 PM IST
सार

जस्टिस भट्ट ने कहा कि नार्को टेस्ट को उस समय कराया जाना चाहिए, जब न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप लगाए गए हों। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा लगे की शिकायतकर्ता इन अधिकारियों पर किसी से प्रेरित होकर या झूठा आरोप लगा रहा है तो उसका भी नार्को टेस्ट कराया जाए। 

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Karnataka High Court Justice Bhatt said if the judges are accused they should also undergo narco test
जस्टिस पी.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

न्यायाधीशों, लोकायुक्तों और अन्य बड़े अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह के आरोप होने पर उनका नार्को टेस्ट कराया जाए। यह सुझाव इसी सप्ताह सेवानिवृत्त हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस पी.कृष्णा भट्ट ने दिया है। अपने विदाई समारोह में उन्होंने कहा, मेरा बयान खराब और कठोर लग सकता है। न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों, लोकायुक्त और उप लोकायुक्त जैसे अन्य उच्च पदाधिकारियों को नार्को टेस्ट के लिए खुद को पेश करना चाहिए। 
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आरोप लगने पर न्यायाधीशों का भी हो नार्को टेस्ट
जस्टिस भट्ट ने कहा कि नार्को टेस्ट को उस समय कराया जाना चाहिए, जब न्यायाधीशों के खिलाफ आरोप लगाए गए हों। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा लगे की शिकायतकर्ता इन अधिकारियों पर किसी से प्रेरित होकर या झूठा आरोप लगा रहा है तो उसका भी नार्को टेस्ट कराया जाए। 
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उनका यह बयान उन शिकायतों को लेकर आया है जिनमें आरोप लगते हैं कि न्यायाधीश अपने प्रमोशन के लिए ऐसे निर्णय देते हैं, जिसको करने के लिए पहले ही उनको कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की स्थिति के कारण संस्था और पदाधिकारियों की विश्वसनीयता को नुकसान होता है। 
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ऐसे लोग न्यायिक स्वतंत्रता के लिए सही नहीं
स्वतंत्र न्यायपालिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल का ज्यादा पालन करना भी सही नहीं है, इससे जजों को बचना चाहिए। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें हाईकोर्ट के जज ने तब के न्यायाधीश के खिलाफ इसलिए कार्रवाई करने को कहा था, क्योंकि जिला जज हवाई अड्डे पर उनको लेने नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के न्यायाधीश किसी भी सार्वजनिक पद को धारण करने के लायक नहीं हैं। इस प्रकार के लोग न्यायिक स्वतंत्रता के लिए सही नहीं है। 


कौन हैं जस्टिस पी. कृष्णा भट्ट?
जस्टिस पी. कृष्णा भट्ट ने अपने कार्यकाल के दौरान कई न्यायालयों में सेवा दी। साल 1989 में मंगलुरु में उन्होंने कई न्यायालयों में सेवा दी। फिर 1998 में कर्नाटाक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करना शुरू किया। जस्टिस भट्ट ने जिला और सत्र न्यायाधीश के रूप में भी काम किया। उन्होंने जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में बीदर, तुमकुर, रायचूर, बेंगलुरु ग्रामीण, बेलागावी जिलों में अपनी सेवाएं दीं। 21 मई 2020 को उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में पदभार मिला। इसके बाद 25 सितंबर 2021 को इसी कोर्ट में स्थायी न्यायाधीश रहे।  
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