{"_id":"656716428c66ec97870f8b5e","slug":"karnataka-hc-dk-shivakumar-disproportionate-asset-case-appeal-withdrawal-allowed-2023-11-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"DK Shivakumar: कर्नाटक के डिप्टी CM को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में वापस लेंगे मुकदमा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
DK Shivakumar: कर्नाटक के डिप्टी CM को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, आय से अधिक संपत्ति मामले में वापस लेंगे मुकदमा
Wed, 29 Nov 2023 04:15 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 29 Nov 2023 04:15 PM IST
सार
कर्नाटक हाईकोर्ट से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बड़ी राहत मिली है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत ने शिवकुमार को अपील वापस लेने की अनुमति दे दी है। इस मामले में सीबीआई जांच भी कराई जानी है।
विज्ञापन
कर्नाटक हाईकोर्ट से उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बड़ी राहत
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को आय से अधिक संपत्ति मामले में हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने शिवकुमार को हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली अपील वापस लेने की अनुमति दे दी। शिवकुमार ने सीबीआई को दी गई सरकारी मंजूरी को रद्द करने से इनकार करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने बुधवार को शिवकुमार को राहत देने वाला आदेश पारित किया। बता दें कि भाजपा की सरकार के दौरान सीएम येदियुरप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार के खिलाफ सीबीआई केस दर्ज करने को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद डीके शिवकुमार के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी। आय से अधिक संपत्ति के कथित आरोप में सीबीआई जांच से राहत पाने के लिए शिवकुमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कर्नाटक हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष शिवकुमार की पैरवी की। वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा, जिस सीबीआई जांच की मंजूरी को चुनौती दी गई है, उसे सरकार ने वापस ले लिया है, ऐसे में यह केस बेमानी हो चुका है। उन्होंने अदालत से मुकदमे को वापस लेने की अनुमति मांगी। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें अपील वापस लेने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि बीते 23 नवंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली वर्तमान कर्नाटक कैबिनेट ने सीबीआई जांच की सहमति को कानूनी रूप से गलत माना था। इस संबंध में एक सरकारी आदेश जारी किया गया। हाईकोर्ट में शिवकुमार ने इसी आदेश का हवाला दिया। मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने दलीलों को सुनने के बाद शिवकुमार के वकीलों को अपील वापस लेने के लिए ज्ञापन दायर करने की अनुमति देते हुए मुकदमे को निस्तारित कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा, सरकारी ज्ञापन के अनुसार 28 नवंबर, 2023 के सरकारी आदेश के बाद रिट याचिका निरर्थक हो चुकी है। अब क्योंकि अपीलकर्ता ने याचिका के साथ-साथ अपील भी वापस लेने की मांग कर रहे हैं, अदालत अपील वापस लेने की अनुमति दे रही है। हालांकि, शिवकुमार के खिलाफ आंशिक रूप से पूरी सीबीआई जांच और इस मामले में दर्ज एफआईआर का क्या हुआ? इस पर हाईकोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की। सीबीआई के वकील ने कहा कि इस सवाल को विचार के लिए लंबित रखा जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा, अपील वापस लेने के आदेश में अदालत सीबीआई जांच और एफआईआर के मुद्दे पर कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले में भाजपा नेता और कर्नाटक के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने सिद्धारमैया सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में उन्होंने एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया था। इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
बता दें कि 2017 में शिवकुमार के घर और कार्यालयों में आयकर विभाग ने तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ अपनी जांच शुरू की थी। ईडी की जांच के आधार पर, सीबीआई ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी। येदियुरप्पा की तत्कालीन सरकार ने 25 सितंबर, 2019 को मंजूरी दी थी। सीबीआई ने 3 अक्टूबर, 2020 को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
राहत मिलने के बाद डीके का बयान
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया, उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने केवल कांग्रेस पार्टी के लिए काम किया, इस कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं कुछ नहीं जानता...मुझे नहीं पता कि अदालत में क्या हुआ है, बिना जाने-समझे टिप्पणी करना मेरे लिए सही नहीं होगा...यह एक गंभीर और लंबित अदालती मामला है। मेरे हिसाब से अदालती मामले से दूर रहना ही अच्छा है।
विज्ञापन
उच्च न्यायालय ने बुधवार को शिवकुमार को राहत देने वाला आदेश पारित किया। बता दें कि भाजपा की सरकार के दौरान सीएम येदियुरप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार के खिलाफ सीबीआई केस दर्ज करने को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद डीके शिवकुमार के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की थी। आय से अधिक संपत्ति के कथित आरोप में सीबीआई जांच से राहत पाने के लिए शिवकुमार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कर्नाटक हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष शिवकुमार की पैरवी की। वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा, जिस सीबीआई जांच की मंजूरी को चुनौती दी गई है, उसे सरकार ने वापस ले लिया है, ऐसे में यह केस बेमानी हो चुका है। उन्होंने अदालत से मुकदमे को वापस लेने की अनुमति मांगी। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें अपील वापस लेने की अनुमति दे दी।
विज्ञापन
गौरतलब है कि बीते 23 नवंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली वर्तमान कर्नाटक कैबिनेट ने सीबीआई जांच की सहमति को कानूनी रूप से गलत माना था। इस संबंध में एक सरकारी आदेश जारी किया गया। हाईकोर्ट में शिवकुमार ने इसी आदेश का हवाला दिया। मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने दलीलों को सुनने के बाद शिवकुमार के वकीलों को अपील वापस लेने के लिए ज्ञापन दायर करने की अनुमति देते हुए मुकदमे को निस्तारित कर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा, सरकारी ज्ञापन के अनुसार 28 नवंबर, 2023 के सरकारी आदेश के बाद रिट याचिका निरर्थक हो चुकी है। अब क्योंकि अपीलकर्ता ने याचिका के साथ-साथ अपील भी वापस लेने की मांग कर रहे हैं, अदालत अपील वापस लेने की अनुमति दे रही है। हालांकि, शिवकुमार के खिलाफ आंशिक रूप से पूरी सीबीआई जांच और इस मामले में दर्ज एफआईआर का क्या हुआ? इस पर हाईकोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की। सीबीआई के वकील ने कहा कि इस सवाल को विचार के लिए लंबित रखा जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा, अपील वापस लेने के आदेश में अदालत सीबीआई जांच और एफआईआर के मुद्दे पर कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले में भाजपा नेता और कर्नाटक के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने सिद्धारमैया सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में उन्होंने एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया था। इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
बता दें कि 2017 में शिवकुमार के घर और कार्यालयों में आयकर विभाग ने तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ अपनी जांच शुरू की थी। ईडी की जांच के आधार पर, सीबीआई ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी। येदियुरप्पा की तत्कालीन सरकार ने 25 सितंबर, 2019 को मंजूरी दी थी। सीबीआई ने 3 अक्टूबर, 2020 को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
राहत मिलने के बाद डीके का बयान
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दावा किया, उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है। उन्होंने केवल कांग्रेस पार्टी के लिए काम किया, इस कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं कुछ नहीं जानता...मुझे नहीं पता कि अदालत में क्या हुआ है, बिना जाने-समझे टिप्पणी करना मेरे लिए सही नहीं होगा...यह एक गंभीर और लंबित अदालती मामला है। मेरे हिसाब से अदालती मामले से दूर रहना ही अच्छा है।