फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Karnataka Election Result, Angry voters and united support of Muslims to Congress defeated BJP

Karnataka Election Result: बोम्मई सरकार से नाराजगी भाजपा पर पड़ी भारी, बंगलूरू छोड़ सभी जगह पिछड़ी

Sun, 14 May 2023 05:07 AM IST
Jeet Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 14 May 2023 05:07 AM IST
सार

इस चुनाव में भाजपा ने दक्षिण भारत का इकलौता किला ही नहीं खोया, बल्कि इस हार ने दक्षिण के राज्यों में पार्टी के विस्तार की योजना को बड़ा झटका दिया है।

विज्ञापन
Karnataka Election Result, Angry voters and united support of Muslims to Congress defeated BJP
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राज्य सरकार के प्रति मतदाताओं की नाराजगी और मुस्लिमों का कांग्रेस को एकजुट समर्थन कर्नाटक में मोदी मैजिक पर भारी पड़ा। लिंगायत प्रभाव वाले इलाके बॉम्बे कर्नाटक में औसत प्रदर्शन और मध्य कर्नाटक में बेहद बुरे प्रदर्शन ने भाजपा के दक्षिण भारत का इकलौता किला बचाने के सपने पर ग्रहण लगा दिया। बंगलूरू इलाके को छोड़कर शेष सभी पांच इलाकों में भाजपा को तगड़ा झटका लगा है।

विज्ञापन


पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि राज्य सरकार और स्थानीय नेताओं से मतदाताओं की नाराजगी की काट नहीं खोजी जा सकी। आरक्षण खत्म करने से नाराज मुसलमान कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो गए, मगर भाजपा बहुसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण नहीं करा पाई। लिंगायत प्रभाव वाले इलाकों में खराब प्रदर्शन बताता है कि येदियुरप्पा सहित कद्दावर लिंगायत नेता अपने स्वजातीय वोट साधने में नाकाम रहे।
विज्ञापन


प्रभाव वाले इलाकों में भी बुरी तरह पिछड़ी
भाजपा अपने प्रभाव वाले इलाकों में भी बुरी तरह पिछड़ी। पुराना मैसूर यानी दक्षिण कर्नाटक में प्रदर्शन नहीं दोहरा पाई। पार्टी को केवल बंगलूरू शहर में तीन सीट का लाभ मिला। वहीं, मध्य कर्नाटक में 14, ओल्ड मैसूर में 11, हैदराबाद कर्नाटक में 5, बॉम्बे कर्नाटक में 10 और तटीय कर्नाटक में चार सीटें गंवानी पड़ीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


दक्षिण में विस्तार के सपने को झटका
इस चुनाव में भाजपा ने दक्षिण भारत का इकलौता किला ही नहीं खोया, बल्कि इस हार ने दक्षिण के राज्यों में पार्टी के विस्तार की योजना को बड़ा झटका दिया है।

  • पार्टी अगर यहां जीतती तो केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में विस्तार की उसकी उम्मीदें परवान चढ़तीं।
  • दूसरी चिंता अब लोकसभा का प्रदर्शन बरकरार रखना है। पार्टी ने बीते लोकसभा चुनाव में यहां 28 में से 25 सीटें जीती थी।


मुस्लिम मतों में बिखराव की उम्मीद ले डूबी
भाजपा को पिछली बार की तरह करीब 36% वोट मिले हैं। वहीं, कांग्रेस का वोट 5% बढ़ा, तो जेडीएस का 5% गिर गया। यानी जेडीएस के घटे वोट कांग्रेस का सहारा बने। पहले भाजपा को मुस्लिम मतों में बिखराव की उम्मीद थी, मगर नतीजे बताते हैं कि आरक्षण खत्म किए जाने से नाराज इस वर्ग ने कांग्रेस के पक्ष में एकतरफा मतदान कर बाजी पलट दी।

स्थानीय नेतृत्व बने बड़ी समस्या
बीते नौ सालों से सभी विधानसभा चुनाव में राज्यों का नेतृत्व भाजपा के लिए बड़ी समस्या रही है। असम और त्रिपुरा को छोड़कर किसी भी राज्य का प्रदर्शन लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आसपास नहीं पहुंच पाया है। कर्नाटक में भी टिकट वितरण से लेकर रणनीति बनाने तक केंद्रीय नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं को फ्री हैंड दिया। बावजूद, इसके पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।

अंदरूनी लड़ाई व वोटर की नाराजगी नहीं भांप पाए
भाजपा नेतृत्व अंदरूनी लड़ाई की न तो काट खोज पाया और न भ्रष्टाचार के मामले में जमीनी स्तर पर फैली नाराजगी को ही भांप पाई। चुनाव से ठीक पहले विधायक के भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने और मंत्री ईश्वरप्पा के इस्तीफे के बीच कांग्रेस के पेसीएम अभियान और 40 फीसदी कमीशन की सरकार का नारा चल निकला।

सारे दांव फेल
चुनाव में भाजपा ने बजरंगबली के अपमान और मुस्लिम आरक्षण खत्म करने का मुद्दा जोरशोर से उठाया था। लेकिन दांव फेल हो गया। अल्पसंख्यक मतों के ध्रुवीकरण का खामियाजा जेडीएस को 18 सीटों और पांच फीसदी वोट के नुकसान के रूप में चुकाना पड़ा। लिंगायत मतदाताओं को साधने में भी भाजपा नाकामयाब रही।

जनता में अपनी छाप छोड़ने में रहे नाकाम
जनादेश को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं। मुख्यमंत्री होने के नाते हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। प्रधानमंत्री मोदी सहित तमाम नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत लगाई, इसके बावजूद पार्टी छाप नहीं छोड़ पाई। हम अपनी कमियों को ठीक करेंगे और लोकसभा चुनाव में वापसी करेंगे। - बसवराज बोम्मई, कर्नाटक के मुख्यमंत्री

2024 के चुनावों पर कोई असर नहीं
जीत-हार नई बात नहीं है। हम आत्मनिरीक्षण करेंगे। दो सीटों से शुरुआत कर भाजपा आज सबसे बड़ी पार्टी है। कार्यकर्ताओं को नतीजों से दुखी होने की जरूरत नहीं है। इसका 2024 के लोकसभा चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 28 सीटों में से 25 पर जीतेंगे। - बीएस येदियुरप्पा, भाजपा नेता व पूर्व सीएम

ऐसा रहा चार दशक का भाजपा का सफर
1983 : पहली बार चुनाव लड़कर भाजपा ने 18 सीटें जीतीं। जनता दल 95 अाैर कांग्रेस को 82 सीटें।
1985 : भाजपा 2 पर सिमटी। जनता दल को 139 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 65 सीट मिलीं।
1989 : 178 सीटों के साथ कांग्रेस को प्रचंड बहुमत। जनता दल 24 व भाजपा काे 4 सीटें।
1994 : ईदगाह मैदान मामला उठा, भाजपा को 40 सीटें। जनता दल 115 व कांग्रेस 34 सीटें।
1999 : भाजपा को 44 सीटें। कांग्रेस 132 सीट के साथ सबसे बड़ी पार्टी। जनता दल बंट गया। जेडीयू को 18, जेडीएस को 10 सीटें।
2004 : 79 सीटों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस को 65 और जेडीएस को 58 सीटें। भाजपा ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई।
2008 : भाजपा 110 सीट। कांग्रेस 80, जेडीएस 28 सीट।
 2013 : येदियुरप्पा के पार्टी छोड़ने से भाजपा को बड़ा झटका लगा, 40 सीटाें पर लुढ़की। कांग्रेस को 122, जेडीएस को 40 सीटें।
 2018 : येदियुरप्पा की वापसी...भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। सरकार कांग्रेस-जेडीएस ने बनाई। 2019 में येदियुरप्पा ने भाजपा सरकार बनाई। 2021 में बोम्मई को सौंपी कमान।

इस जनादेश के मायने
कांग्रेस को भारत जोड़ो यात्रा से फायदा दिख रहा। वहीं, सरकार में हुए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के मुद्दे को पार्टी ने प्रचार के दौरान खूब भुनाया। दूसरी ओर, भाजपा को अंदरूनी लड़ाई का खामियाजा भुगतना पड़ा।

स्थानीय नेताओं के संघर्ष किनारे कर मुद्दों पर केंद्रित रही कांग्रेस
शिवकुमार और सिद्धरमैया के आपसी संघर्ष को कांग्रेस ने न केवल किनारे रखा, बल्कि दोनों को एक साथ दिखाने में भी कामयाब रही। उसने अपना चुनाव प्रचार स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रखा।

ध्रुवीकरण का भाजपा से कहीं ज्यादा फायदा कांग्रेस को हुआ
कांग्रेस ने बजरंग दल को प्रतिबंधित पीएफआई से जोड़ा। इससे ध्रुवीकरण बढ़ा। भाजपा की ओर से भी कड़े विरोधी बयान आए। साफ है कि इससे भाजपा को बहुत फायदा नहीं मिला, लेकिन कांग्रेस कई गुना फायदे ले गई।

सत्ता विरोधी वोट पर पीएम की रैली का भी नहीं हुआ असर
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का काफी हिस्सा कर्नाटक से गुजरा, इसका असर उन वोटराेें पर पड़ा, जो प्रदेश की भाजपा सरकार से नाराज थे। पीएम मोदी की रैलियों व प्रचार का भी खास असर नहीं हुआ।

बड़ी संख्या में मंत्रियों की हार, मुख्यमंत्री बोम्मई की जीत
भाजपा की बसवराज सरकार में मंत्री बी श्रीरामुलु, जेसी मधु स्वामी, मुरुगेश निरानी, बीसी नागेश समेत कई नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, सीएम बसवराज बोम्मई ने शिवमोगा में जीत दर्ज की।

भाजपा का प्रदर्शन नहीं जगाता भविष्य के लिए कोई उम्मीद
भाजपा के लिए चिंता। तमिलनाडु और केरल में पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन भविष्य के लिए भी कोई आशा नहीं जगाता।

बेल्लारी-रेड्डी व कांग्रेस के सहयोगी पुत्तननैया जीते
कल्याण राज्य प्रगति पक्ष के जी जनार्दन रेड्डी ने कांग्रेस के इकबाल अंसारी को 8 हजार वोटों से हराकर यहां अपनी पकड़ बरकरार रहने का संदेश दिया। वहीं, कांग्रेस सहयोगी सर्वोदय कर्नाटक पक्ष के प्रत्याशी दर्शन पुत्तननैया ने जेडीएस के पुट्टाराजू को हराया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed