{"_id":"5afa66704f1c1bea408b563d","slug":"karnataka-election-result-2018-siddaramaiah-wants-second-tenure-and-yeddyurappa-seeks-comeback","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnataka verdict: कौन बनेगा मुख्यमंत्री, येदियुरप्पा करेंगे कमबैक या सिद्धारमैया की होगी वापसी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
Karnataka verdict: कौन बनेगा मुख्यमंत्री, येदियुरप्पा करेंगे कमबैक या सिद्धारमैया की होगी वापसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Tue, 15 May 2018 11:14 AM IST
विज्ञापन
siddaramaiah yeddyurappa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मार्च 2018 में कर्नाटक की कैबिनेट ने कुछ चौंकाने वाले फैसले लिए थे। जिसमें लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देना शामिल था। कुछ लोगों का मानना था कि सिद्धारमैया की नैया इस फैसले से पार लग जाएगी। 2018 चुनाव से पहले वीरशैव लिंगायत समुदाय ने अपनी मांगो को पूरा ना होने की स्थिति में कांग्रेस का बायकॉट करने की धमकी दी थी। मगर उस दिन कैबिनेट बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि सरकार लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देगी।
विज्ञापन
लिंगायत स्कॉलर डॉक्टर बासवाराज बल्लूर ने कहा, 'केवल सिद्धारमैया की वजह से इस तरह का बड़ा कदम लिया गया। हमें नहीं लगता कि कोई और इस तरह का फैसला ले सकता है।' एक सतर्क मुख्यमंत्री के तौर पर शुरुआत करने के बाद अपने पांच साल के कार्यकाल 2013-18 के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया एक बोल्ड और कड़े फैसले लेने वाले सीएम बने हैं। कर्नाटक में बहुत से लोग सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश सिद्धारमैया की असमय मौत की तरफ लोगों का ध्यान जाता है।
विज्ञापन
राकेश सिद्धारमैया की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने वाले थे। एक तरफ जहां वह अपनी सार्वजनिक जिंदगी में काफी जुझारू बने हैं वहीं निजी जीवन में वह दार्शनिक हो गए हैं। 2013 में जिस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला था उसी दिन उन्होंने सरकार द्वारा संचालित अन्न भाग्य योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को सरकार 7 किलो चावल मुफ्त में देगी। इससे जहां वह लोगों के बीच मशहूर हुए वहीं 2016 में अपने कड़े फैसलों की वजह से वह एक क्षेत्रीय नेता के तौर पर उभरे।
विज्ञापन
पिछड़ी जाती कुरुबा से ताल्लुक रखने वाले सिद्धारमैया ने अपने कार्यकाल के दौरान कुछ ऐसे फैसले लिए जिसकी वजह से उनकी पार्टी परेशानी में पड़ गई। जिसमें कर्नाटक के लिए अलग झंडे की मांग, लिंगायत के लिए अलग धार्मिक अल्पसंख्यक का टैग, भाजपा के हिंदुत्व का सीधा विरोध करना शामिल था। अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यक और पिछड़ी जातियों में वह एक मशहूर नेता के तौर पर उभरे थे। यह चुनाव सिद्धारमैया की चावल योजना पर निर्धारित होगा। जहां सिद्धारमैया राज्य में एक बार फिर अपनी सरकार बनाना चाहती है जबकि बीएस येदियुरप्पा कमबैक के लिए तैयार हैं।