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Karnataka: नए कैबिनेट में कांग्रेस प्रमुख-पूर्व CM के बेटे को भी जगह, जानें मंत्रियों में किसकी संपत्ति कितनी
Wed, 03 Jun 2026 04:09 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 03 Jun 2026 04:09 PM IST
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सार
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डीके शिवकुमार का नया कैबिनेट।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कर्नाटक में आज (3 जून) सियासी रूप से हलचल का दिन है। दरअसल, सिद्धारमैया ने बीते हफ्ते मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कांग्रेस विधायक दल ने डीके शिवकुमार को अपना नेता चुना। अब आज शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। शीर्ष नेतृत्व में परिवर्तन होने के साथ अब मंत्रिमंडल में भी आमूलचूल परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, सिद्धारमैया के कार्यकाल में मंत्री रहे कई नेताओं को नए कैबिनेट में भी मौका दिया गया है।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर डीके शिवकुमार के नए कैबिनेट में किस-किस नेता के मंत्री के तौर पर शामिल होने का मौका मिला है? इन नेताओं की उम्र, शिक्षा और राजनीतिक इतिहास को लेकर क्या जानकारी मौजूद है? इनके पेशे और संपत्ति का क्या ब्योरा मौजूद है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- कौन-कौन डीके शिवकुमार मंत्रिमंडल में?
डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में पहले चरण में सीएम शिवकुमार के अलावा लगभग 14 मंत्री शामिल हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन वरिष्ठ नेताओं और अनुभवी प्रशासकों के इस नई कैबिनेट का हिस्सा बनने के कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे, सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र और जी. परमेश्वरा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आइये जानते हैं...1. डॉ. जी परमेश्वर: इनके राज्य के उपमुख्यमंत्री बनने की पुष्टि हो चुकी है और इन्हें राजस्व विभाग मिलने की संभावना है।
2. प्रियांक खरगे: इन्हें गृह विभाग का प्रभार दिए जाने के कयास हैं।
3. रामलिंगा रेड्डी: इन्हें बंगलूरू विकास विभाग मिल सकता है।
4. कृष्णा बायरेगौड़ा: इन्हें ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग मिलने की संभावना है।
5. एमबी पाटिल: इन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें शिवकुमार द्वारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फोन आया है।
6. यतींद्र सिद्धारमैया: निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के भी इस मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना है।
7. यूटी खादर: इनके बारे में बताया गया है कि ये मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
इन प्रमुख नामों के अलावा, केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, सतीश जारकीहोली, ईश्वर खंड्रे, बायरती सुरेश, शरण प्रकाश पाटिल और दिनेश गुंडू राव के भी डीके शिवकुमार की इस नई कैबिनेट में शामिल हैं।
4. कृष्णा बायरेगौड़ा: इन्हें ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग मिलने की संभावना है।
5. एमबी पाटिल: इन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें शिवकुमार द्वारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फोन आया है।
6. यतींद्र सिद्धारमैया: निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र के भी इस मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना है।
7. यूटी खादर: इनके बारे में बताया गया है कि ये मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
इन प्रमुख नामों के अलावा, केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, सतीश जारकीहोली, ईश्वर खंड्रे, बायरती सुरेश, शरण प्रकाश पाटिल और दिनेश गुंडू राव के भी डीके शिवकुमार की इस नई कैबिनेट में शामिल हैं।
अब जानें- मंत्री पद की शपथ लेने वाले नेताओं के बारे में
1. जी परमेश्वर
डॉ. जी परमेश्वर कर्नाटक के एक प्रभावशाली दलित नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से हैं। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कर्नाटक के नए कैबिनेट में उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है। इसके अलावा उन्हें कैबिनेट में राजस्व विभाग की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
निजी जीवन
जी परमेश्वर का उनका जन्म 6 अगस्त 1951 को तुमकुरु जिले के गोल्लाहल्ली में हुआ था। वे एक बेहद शिक्षित नेता हैं। उन्होंने कृषि में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की है। इसके अलावा, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी से प्लांट फिजियोलॉजी में पीएचडी की उपाधि ली है। अपने छात्र जीवन के दौरान वे एक बेहतरीन एथलीट भी थे; उनके नाम 10.9 सेकंड में 100 मीटर की रेस पूरी करने का यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड दर्ज रह चुका है।
जी परमेश्वर का उनका जन्म 6 अगस्त 1951 को तुमकुरु जिले के गोल्लाहल्ली में हुआ था। वे एक बेहद शिक्षित नेता हैं। उन्होंने कृषि में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की है। इसके अलावा, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी से प्लांट फिजियोलॉजी में पीएचडी की उपाधि ली है। अपने छात्र जीवन के दौरान वे एक बेहतरीन एथलीट भी थे; उनके नाम 10.9 सेकंड में 100 मीटर की रेस पूरी करने का यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड दर्ज रह चुका है।
सियासी सफर
- डॉ. परमेश्वर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सलाह और प्रोत्साहन के बाद राजनीति में कदम रखा था।
- वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के इतिहास में लगातार दो कार्यकाल के लिए सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले नेता हैं।
- वे 2018-2019 के बीच कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री और 2015-2017 के बीच गृह मंत्री रह चुके हैं। अपने लंबे करियर में उन्होंने उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे मंत्रालयों का कार्यभार भी संभाला है।
- मौजूदा समय में वे कोराटागेरे सुरक्षित (एससी) निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। इससे पहले वे मधुगिरी से भी कई बार चुनाव जीत चुके हैं।
पेशा और संपत्ति
2023 के उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनका पेशा एलआईसी एजेंट और कृषि सलाहकार का है। उनके पास 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है और उन पर लगभग 15 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। हलफनामे के मुताबिक, उन पर तीन आपराधिक मामले भी लंबित हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक कांग्रेस और कर्नाटक के एक प्रभावशाली नेता हैं। कर्नाटक की नई सरकार में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है और गृह विभाग की अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
2023 के उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनका पेशा एलआईसी एजेंट और कृषि सलाहकार का है। उनके पास 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है और उन पर लगभग 15 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। हलफनामे के मुताबिक, उन पर तीन आपराधिक मामले भी लंबित हैं।
2. प्रियांक खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक कांग्रेस और कर्नाटक के एक प्रभावशाली नेता हैं। कर्नाटक की नई सरकार में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है और गृह विभाग की अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
निजी जीवन
प्रियांक खरगे का जन्म 22 नवंबर 1978 को कर्नाटक के गुलबर्गा में हुआ था। उनके पिता मल्लिकार्जुन खरगे और मां राधाबाई खरगे हैं। प्रियांक ने बंगलूरू के एमईएस कॉलेज, मल्लेश्वरम से पढ़ाई की है और उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वे 10वीं पास और आई-पीयूसी (प्री-यूनिवर्सिटी) शिक्षित हैं। इसके अलावा उन्होंने 1999 में कंप्यूटर आर्ट्स और एनिमेशन में प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। उनकी पत्नी का नाम श्रुति खरगे है। वे स्वयं को एक अंबेडकरवादी और बौद्ध धर्म का अनुयायी मानते हैं।
राजनीतिक सफर
प्रियांक खरगे ने 1998 में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के एक कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे 2001 से 2005 तक संगठन के प्रदेश महासचिव रहे और 2011 से 2014 तक कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रहे।
इसके बाद उन्होंने अपना पहला चुनाव 2009 में चित्तापुर से लड़ा था, लेकिन भाजपा के वाल्मीकि नायक से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 2013, 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में गुलबर्गा के चित्तापुर सुरक्षित (एससी) निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत दर्ज की है।
प्रियांक खरगे ने 1998 में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के एक कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे 2001 से 2005 तक संगठन के प्रदेश महासचिव रहे और 2011 से 2014 तक कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रहे।
इसके बाद उन्होंने अपना पहला चुनाव 2009 में चित्तापुर से लड़ा था, लेकिन भाजपा के वाल्मीकि नायक से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 2013, 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में गुलबर्गा के चित्तापुर सुरक्षित (एससी) निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत दर्ज की है।
2016 में 38 वर्ष की आयु में, वे तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। उस समय उन्होंने आईटी और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य किया था। आईटी मंत्री के रूप में उन्होंने नए उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 'स्टार्टअप बूस्टर किट' की शुरुआत की थी और 2017 में 'बंगलूरू टेक समिट' भी शुरू करवाया था। 2018 में एचडी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में उन्होंने समाज कल्याण मंत्री के रूप में कार्य किया। वहीं, 2023 की मौजूदा सरकार में वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के आईटी और डाटा विभाग के अध्यक्ष रहे हैं।
पेशा और संपत्ति
प्रियांक के हलफनामे के मुताबिक, उनका पेशा व्यवसाय है। उनके पास कुल 16.83 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है, जिसमें 6.19 करोड़ रुपये की चल और 10.63 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर लगभग 28.75 लाख रुपये की देनदारियां हैं।
उनके खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव, मानहानि और दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
पेशा और संपत्ति
प्रियांक के हलफनामे के मुताबिक, उनका पेशा व्यवसाय है। उनके पास कुल 16.83 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है, जिसमें 6.19 करोड़ रुपये की चल और 10.63 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर लगभग 28.75 लाख रुपये की देनदारियां हैं।
उनके खिलाफ नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव, मानहानि और दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
4. यतींद्र सिद्धारमैया
सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने वाली कर्नाटक की नई सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया जा सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस नई सरकार में उन्हें चिकित्सा शिक्षा और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।यतींद्र सिद्धारमैया का जन्म 27 जून 1980 को हुआ था। एक मेधावी छात्र रहे यतींद्र ने 2009 में बेलगावी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से पैथोलॉजी में एमडी. की डिग्री हासिल की है। यतींद्र अविवाहित हैं।
राजनीतिक जीवन
- यतींद्र शुरुआत में राजनीति में आने के बिल्कुल इच्छुक नहीं थे और अपने मेडिकल पेशे में ही व्यस्त रहते थे।
- उनके बड़े भाई राकेश को सिद्धारमैया का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन 2016 में राकेश के असामयिक निधन के कारण एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया।
- वरुणा निर्वाचन क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने का दबाव बढ़ने पर, 36 वर्ष की आयु में उनकी मां पार्वती के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
- 2018 में उन्होंने वरुणा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ा और 58,616 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। उनके पिता सिद्धारमैया ने उनके लिए अपनी यह पारंपरिक सीट छोड़ दी थी।
- 2023 के विधानसभा चुनाव में, यतींद्र ने अपने पिता के लिए अपनी जीती हुई वरुणा सीट छोड़ दी। एक बेटे के पिता के लिए अपनी सीट छोड़ने के इस कदम से राजनीतिक हलकों में उन्हें काफी सम्मान मिला।
- 2023 में जब सिद्धारमैया दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, तो यतींद्र को विधायकों द्वारा विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) चुना गया।
- हाल ही में बागलकोट विधानसभा उपचुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेटी की जीत सुनिश्चित करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
संपत्ति और पेशा
एमएलसी चुनाव के हलफनामे के मुताबिक, उनके पास कुल लगभग 31.88 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 9.23 करोड़ रुपये की चल और 22.65 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उनकी चल संपत्ति में 1.51 करोड़ रुपये की एक बीएमडब्ल्यू एक्स7 कार भी शामिल है। उन पर लगभग 10.47 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। उनके खिलाफ 2 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। वे पेशे से एक डॉक्टर (पैथोलॉजिस्ट), कृषक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
एमएलसी चुनाव के हलफनामे के मुताबिक, उनके पास कुल लगभग 31.88 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 9.23 करोड़ रुपये की चल और 22.65 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उनकी चल संपत्ति में 1.51 करोड़ रुपये की एक बीएमडब्ल्यू एक्स7 कार भी शामिल है। उन पर लगभग 10.47 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। उनके खिलाफ 2 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। वे पेशे से एक डॉक्टर (पैथोलॉजिस्ट), कृषक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
3. एमबी पाटिल
मल्लनगौड़ा बसनगौड़ा पाटिल की गिनती कांग्रेस के उन नेताओं में से है, जो कि राज्य के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं और इसे साधने का भी जरिया हैं। वे जागतिक लिंगायत महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं।
निजी जीवन
एमबी पाटिल का जन्म 7 अक्तूबर 1964 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था। उनके पिता बीएम. पाटिल भी एक नेता और शिक्षाविद् थे। पाटिल एक सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने 1990 में कर्नाटक यूनिवर्सिटी (धारवाड़) से संबद्ध बीएलडीई इंस्टीट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग में बीई. की डिग्री हासिल की है।
राजनीतिक सफर
पाटिल ने 1991 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे मौजूदा समय में बाबलेश्वर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। यह उनका विधानसभा में पांचवां कार्यकाल है। इससे पहले वे तिकोता से भी विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे 1998 से 1999 के बीच बीजापुर से लोकसभा के सदस्य (सांसद) भी रहे हैं।
- 2013 से 2018 के दौरान सिद्धारमैया सरकार में उन्होंने जल संसाधन मंत्री के रूप में कार्य किया था। इस दौरान सिंचाई से जुड़ी रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने के लिए उनके काम को काफी सराहा गया था।
- 2018 से 2019 तक एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने गृह मंत्री का पद भी संभाला था।
- 2023 में राज्य में बनी सिद्धारमैया सरकार में वे बड़े और मध्यम उद्योग के साथ बुनियादी ढांचा विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
एमबी पाटिल बीएलडीई एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। साथ ही एमबी. पाटिल फाउंडेशन के जरिए सामाजिक कार्यों, जैसे- गरीब छात्रों को स्कूल बैग व किताबें बांटना, स्मार्ट क्लासरूम बनवाना और वृक्षारोपण में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्हें एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता के तौर पर जाना जाता है और उन्हें भविष्य में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के एक प्रमुख दावेदार के रूप में भी देखा जाता है।
पेशा और संपत्ति
2023 के हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 141 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। उन पर लगभग 25.59 करोड़ रुपये की देनदारियां भी हैं। उन पर पांच आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव और महामारी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। हलफनामे में उन्होंने अपना पेशा स्वरोजगार दिखाया है।
5. सतीश जारकीहोली
सतीश जारकीहोली कांग्रेस के एक छह बार के विधायक, वरिष्ठ और बेहद प्रभावशाली नेता हैं, जो मुख्य रूप से उत्तरी कर्नाटक और बेलगावी क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बन रही कर्नाटक की नई सरकार में वे एक कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ले रहे हैं।
निजी जीवन
सतीश जारकीहोली नायक समुदाय से आते हैं, जिसे कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा प्राप्त है। पिछड़े और आदिवासी समुदायों के बीच उनका गहरा प्रभाव है और इसी ने उनके राजनीतिक उत्थान में अहम भूमिका निभाई है। सतीश जारकीहोली का संबंध बेलगावी के एक बेहद ताकतवर राजनीतिक परिवार से है। उनके भाई रमेश जारकीहोली, बालचंद्र जारकीहोली और लखन जारकीहोली भी राजनीति में सक्रिय हैं और प्रभावशाली पदों पर हैं।
उनकी पत्नी का नाम शकुंतला जारकीहोली है। उनकी बेटी प्रियंका जारकीहोली ने 2024 में चिक्कोडी सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा है और उनके बेटे का नाम राहुल जारकीहोली है।
राजनीतिक सफर
सतीश बेलगावी जिले की येमकनमर्दी (एसटी) विधानसभा सीट से लगातार 2008 से विधायक हैं और इस सीट को उन्होंने अपना एक मजबूत गढ़ बना लिया है। इससे पहले, वे 1998 से 2008 तक बेलगावी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। वे सिद्धारमैया सरकार (2013-2016) में आबकारी मंत्री, एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार (2018-2019) में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री, और 2004-2005 में कपड़ा राज्य मंत्री रह चुके हैं।
इसके अलावा वे 2020 से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। उत्तरी कर्नाटक में उनके प्रभाव और जातीय/क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए, उन्हें पार्टी में उपमुख्यमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार के रूप में भी देखा जाता रहा है। दिलचस्प बात यह है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने भी एक बार कहा था कि सतीश जारकीहोली उनके पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे।
पेशा और संपत्ति
सतीश जारकीहोली ने अपना पेशा कृषि और व्यापार बताया है। 2023 के हलफनामे के अनुसार, वे कर्नाटक के सबसे अमीर राजनेताओं में से एक हैं। उनके पास कुल 175.29 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। इसमें लगभग 28.98 करोड़ रुपये की चल और 146.31 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। 2008 में उनकी घोषित संपत्ति करीब 15 करोड़ रुपये थी, जो लगातार चुनाव-दर-चुनाव बढ़ती गई है। उन पर लगभग 12.29 करोड़ रुपये की देनदारियां (Liabilities) हैं, जो मुख्य रूप से रियल एस्टेट और व्यावसायिक लेन-देन से जुड़े कर्ज हैं।
इसके अलावा उन पर दो आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने, दूसरों की जान जोखिम में डालने और कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम 2020 के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
सतीश बेलगावी जिले की येमकनमर्दी (एसटी) विधानसभा सीट से लगातार 2008 से विधायक हैं और इस सीट को उन्होंने अपना एक मजबूत गढ़ बना लिया है। इससे पहले, वे 1998 से 2008 तक बेलगावी स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। वे सिद्धारमैया सरकार (2013-2016) में आबकारी मंत्री, एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार (2018-2019) में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री, और 2004-2005 में कपड़ा राज्य मंत्री रह चुके हैं।
इसके अलावा वे 2020 से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। उत्तरी कर्नाटक में उनके प्रभाव और जातीय/क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए, उन्हें पार्टी में उपमुख्यमंत्री पद के एक मजबूत दावेदार के रूप में भी देखा जाता रहा है। दिलचस्प बात यह है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने भी एक बार कहा था कि सतीश जारकीहोली उनके पिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे।
पेशा और संपत्ति
सतीश जारकीहोली ने अपना पेशा कृषि और व्यापार बताया है। 2023 के हलफनामे के अनुसार, वे कर्नाटक के सबसे अमीर राजनेताओं में से एक हैं। उनके पास कुल 175.29 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। इसमें लगभग 28.98 करोड़ रुपये की चल और 146.31 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। 2008 में उनकी घोषित संपत्ति करीब 15 करोड़ रुपये थी, जो लगातार चुनाव-दर-चुनाव बढ़ती गई है। उन पर लगभग 12.29 करोड़ रुपये की देनदारियां (Liabilities) हैं, जो मुख्य रूप से रियल एस्टेट और व्यावसायिक लेन-देन से जुड़े कर्ज हैं।
इसके अलावा उन पर दो आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने, दूसरों की जान जोखिम में डालने और कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम 2020 के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
6. केएच मुनियप्पा
75 वर्षीय केएच मुनियप्पा ने 2023 का विधानसभा चुनाव बंगलूरू ग्रामीण जिले की देवनहल्ली सुरक्षित (एससी) सीट से जीता है। उनके पिता का नाम हनुमप्पा है। मुनियप्पा एक पेशेवर स्नातक हैं। उन्होंने 1986 में बैंगलोर यूनिवर्सिटी के एसजेआरसी) कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की है।उनके चुनाव हलफनामे के मुताबिक, उनका मुख्य पेशा वकालत, राजनीति और कृषि है। उनकी आय के मुख्य स्रोतों में एक पूर्व सांसद के रूप में मिलने वाली पेंशन के साथ-साथ किराये और कृषि से होने वाली आय शामिल है।
मुनियप्पा के पास कुल 59.63 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपनी कुल संपत्ति लगभग 32 करोड़ रुपये घोषित की थी। उनकी चल संपत्ति में इनोवा और मर्सिडीज बेंज जैसी गाड़ियां तथा एक ट्रैक्टर भी शामिल है। उन पर बैंक कर्ज आदि के रूप में लगभग 25.94 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।
इसके अलावा मुनियप्पा के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। यह मामला केजीएफ कोलार जिले की अदालत में लंबित है, जिसमें आपराधिक धमकी (आईपीसी धारा-506), जानबूझकर चोट पहुंचाने (आईपीसी धारा-323), गलत तरीके से रोकने (आईपीसी धारा-341) और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप शामिल हैं।
7. रामलिंगा रेड्डी
रामलिंगा रेड्डी को भी शिवकुमार के नेतृत्व में बन रही कर्नाटक की नई सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया जा रहा है। 70 वर्षीय रामलिंगा रेड्डी ने 2023 का विधानसभा चुनाव बीटीएम लेआउट निर्वाचन क्षेत्र (बीबीएमपी दक्षिण) से जीता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई सरकार में उन्हें बंगलूरू विकास विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।वे एक विज्ञान स्नातक हैं। उन्होंने 1975 में बैंगलोर विश्वविद्यालय से संबद्ध गवर्नमेंट साइंस कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की है।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनका मुख्य पेशा राजनीति और व्यवसाय है। वे कर्नाटक के काफी अमीर राजनेताओं में गिने जाते हैं। 2023 के हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 110.67 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। इससे पहले 2018 के चुनावों में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 66 करोड़ रुपये थी। उन पर बैंक कर्ज और अन्य बकाये के रूप में लगभग 37.99 करोड़ रुपये की देनदारियां भी हैं।
हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ चार आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और कर्नाटक महामारी रोग अधिनियम 2020 और आपदा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
8. केजे. जॉर्ज
केलाचंद्र जोसेफ जॉर्ज को भी कर्नाटक कैबिनेट में मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है। उनका जन्म 24 अगस्त 1949 को केरल के कोट्टायम जिले के चिंगवनम में हुआ था। 1960 के दशक में उनका परिवार कर्नाटक के कोडागु जिले में आकर बस गया था। उनके 2018 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने 12वीं (इंटरमीडिएट) तक की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से अपनी बीए की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।
राजनीतिक सफर
केजे जॉर्ज ने 1968 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की और 1969 में गोनिकोप्पल टाउन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्होंने कांग्रेस संगठन में युवा कांग्रेस महासचिव से लेकर एआईसीसी सदस्य तक कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे मौजूदा समय में बंगलूरू के सर्वगनानगर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं, यहां से उन्होंने 2008, 2013, 2018 और 2023 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है। इससे पहले वे 1985 से 1994 तक भारतीनगर सीट से भी विधायक रह चुके हैं।
सिद्धारमैया सरकार (2013-2016) में उन्होंने कर्नाटक के गृह मंत्री और बाद में बंगलूरू विकास एवं नगर नियोजन मंत्री के रूप में कार्य किया। एच.डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार (2018-2019) में वे आईटी, बीटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री रहे। 1980 और 90 के दशक में वीरेंद्र पाटिल और एस. बंगारप्पा की सरकारों में भी वे परिवहन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और आवास एवं शहरी विकास जैसे मंत्रालयों में मंत्री रह चुके हैं।
बंगलूरू पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (बीपीएसी) ने विधानसभा में उनकी उपस्थिति, पूछे गए सवालों और विकास निधि के उपयोग के आंकड़ों के आधार पर उन्हें बंगलूरू के सर्वश्रेष्ठ विधायकों में से एक का दर्जा दिया था।
पेशा और संपत्ति (2018 का रिकॉर्ड)
राजनीति के अलावा उनका मुख्य पेशा व्यवसाय है। वे अपने पिता और भाइयों के साथ मिलकर 1980 में स्थापित केलाचंद्र ग्रुप के संस्थापकों में से एक हैं। 2018 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास कुल 80.37 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। उन पर लगभग 48.08 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
बंगलूरू पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (बीपीएसी) ने विधानसभा में उनकी उपस्थिति, पूछे गए सवालों और विकास निधि के उपयोग के आंकड़ों के आधार पर उन्हें बंगलूरू के सर्वश्रेष्ठ विधायकों में से एक का दर्जा दिया था।
पेशा और संपत्ति (2018 का रिकॉर्ड)
राजनीति के अलावा उनका मुख्य पेशा व्यवसाय है। वे अपने पिता और भाइयों के साथ मिलकर 1980 में स्थापित केलाचंद्र ग्रुप के संस्थापकों में से एक हैं। 2018 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास कुल 80.37 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। उन पर लगभग 48.08 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं। उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
9. कृष्णा बायरे गौड़ा
50 वर्षीय कृष्णा बायरेगौड़ा कर्नाटक के पूर्व कैबिनेट मंत्री सी. बायरेगौड़ा के बेटे हैं। वे एक उच्च शिक्षित नेता हैं। डीके शिवकुमार की इस नई कैबिनेट में उन्हें ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग की अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना है।उन्होंने 1994 में बंगलूरू के क्राइस्ट कॉलेज से बीबीएम. की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 1999 में अमेरिका के वॉशिंगटन में स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल अफेयर्स में एमए की स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है।
राजनीतिक सफर
उन्होंने 2023 का विधानसभा चुनाव बंगलूरू शहरी जिले की ब्यातरायनपुरा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीता और उन्हें इस सरकार में राजस्व विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। वे इससे पहले 2013 से 2018 के बीच सिद्धारमैया सरकार में कृषि मंत्रालय और एचडी कुमारस्वामी की सरकार में ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग।
पेशा और आय
उनका मुख्य पेशा कृषि है और उनकी आय का मुख्य स्रोत विधायक का वेतन, कृषि और बैंक का ब्याज है। उनकी पत्नी सीजीआई इन्फर्मेशन लिमिटेड कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट (डिलीवरी) के पद पर कार्यरत हैं।
कृष्णा ने अपने हलफनामे में कुल 16.70 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति दिखाई है। उन पर बैंक लोन आदि के रूप में लगभग 95.22 लाख रुपये की देनदारियां हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले लंबित हैं।
10. यूटी खादर
यूटी खादर फरीद कांग्रेस के प्रमुख और अनुभवी नेताओं में से एक हैं। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बन रही कर्नाटक की नई सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। डीके शिवकुमार की कैबिनेट में मंत्री के रूप में शामिल होने के लिए वे विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के पद से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा उपाध्यक्ष रुदप्पा लमानी को सौंपा था।
2023 के हलफनामे के मुताबिक, यूटी खादर की उम्र 54 वर्ष है। वे एक पेशेवर स्नातक हैं। उन्होंने 2003 में मंगलुरु विश्वविद्यालय के एसडीएम लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली। उनके पिता स्वर्गीय यूटी फरीद हैं, जो खुद उल्लाल निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चार बार (1972, 1978, 1999 और 2004) विधायक रह चुके थे।
राजनीतिक सफर
यूटी खादर ने पहली बार 2007 में अपने पिता के निधन के बाद मंगलुरु (तत्कालीन उल्लाल) से उपचुनाव जीतकर कर्नाटक विधानसभा में कदम रखा था। इसके बाद से वे अजेय रहे हैं और उन्होंने 2008, 2013, 2018 और 2023 के विधानसभा चुनावों में अपनी सीट को लगातार बरकरार रखा है। दिलचस्प बात यह है कि 2018 के चुनावों में वे दक्षिण कन्नड़ जिले से जीतने वाले एकमात्र कांग्रेस विधायक थे।
वे सिद्धारमैया सरकार के पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। अपने पिछले कार्यकालों में उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले, शहरी विकास और आवास जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला है। 2022-23 के दौरान उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के उपनेता के रूप में भी अहम भूमिका निभाई थी। वे कर्नाटक विधानसभा के 17वें अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने 24 मई 2023 को अध्यक्ष का पद ग्रहण किया था।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनका मुख्य पेशा वकालत है, जबकि उनकी पत्नी व्यवसाय से जुड़ी हैं। यूटी खादर के पास कुल 6.97 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उन पर लगभग 69.80 लाख रुपये की देनदारियां हैं, जिसमें मुख्य रूप से बैंकों के आवास और वाहन लोन शामिल हैं।
इसके अलावा उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और महामारी रोग अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनका मुख्य पेशा वकालत है, जबकि उनकी पत्नी व्यवसाय से जुड़ी हैं। यूटी खादर के पास कुल 6.97 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उन पर लगभग 69.80 लाख रुपये की देनदारियां हैं, जिसमें मुख्य रूप से बैंकों के आवास और वाहन लोन शामिल हैं।
इसके अलावा उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और महामारी रोग अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
11. ईश्वर खांद्रे
61 वर्ष के ईश्वर खांद्रे भीमन्ना खांद्रे के बेटे है। हाल ही में दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने मंत्री पद का अवसर देने के लिए कांग्रेस आलाकमान का आभार व्यक्त किया और कल्याणा-कर्नाटक क्षेत्र व बीदर के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। वे एक पेशेवर स्नातक हैं। उन्होंने 1985 में गुलबर्गा के पीडीए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीई. की डिग्री हासिल की है।
राजनीतिक सफर
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने कांग्रेस सेवा दल के जरिए सार्वजनिक जीवन और राजनीति में कदम रखा था। वे बीदर जिले की भालकी विधानसभा सीट से चार बार के विधायक चुने जा चुके हैं। वे कर्नाटक सरकार में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस दौरान उनके कई कामों की तारीफ हुई। उनके कार्यकाल में 12,000 एकड़ वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया और 15,000 एकड़ अतिरिक्त भूमि को आरक्षित वन घोषित किया गया। उनके नेतृत्व में वन विभाग ने लगभग 11 करोड़ पौधे लगाने का दावा भी किया है।
इसके अलावा उन्होंने वन अपराधों पर लगाम लगाने के लिए गरुड़ाक्षी नाम की ऑनलाइन एफआईआर प्रणाली शुरू की और वन्यजीवों की निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन का उपयोग शुरू करवाया। इसके अलावा बंगलूरू विश्वगुरु बसवन्ना बायो-पार्क और 5,678 एकड़ के ग्रेटर हेसरघट्टा ग्रासलैंड कंजर्वेशन एरिया की शुरुआत का श्रेय भी उन्हें जाता है।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनका मुख्य पेशा समाज सेवा और कृषि है। उनके पास कुल 8.74 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। चौंकाने वाली बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति 12.33 करोड़ रुपये घोषित की थी। यानी इस बार उनकी संपत्ति में गिरावट दर्शायी गई है। उन पर लगभग 58.02 लाख रुपये की देनदारियां हैं।
ईश्वर खांद्रे के खिलाफ सात आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से चुनाव के दौरान रिश्वत, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और महामारी रोग अधिनियम 2020 के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनका मुख्य पेशा समाज सेवा और कृषि है। उनके पास कुल 8.74 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। चौंकाने वाली बात यह है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने अपनी संपत्ति 12.33 करोड़ रुपये घोषित की थी। यानी इस बार उनकी संपत्ति में गिरावट दर्शायी गई है। उन पर लगभग 58.02 लाख रुपये की देनदारियां हैं।
ईश्वर खांद्रे के खिलाफ सात आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से चुनाव के दौरान रिश्वत, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और महामारी रोग अधिनियम 2020 के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
12. बायरती सुरेश
बायरती सुरेश, जिन्हें बीएस. सुरेश के नाम से भी जाना जाता है कर्नाटक के विधायक हैं। उन्हें सरकार में शहरी विकास और नगर नियोजन विभाग सौंपा जा सकता है। हालांकि, इसमें बंगलूरू शहर विकास का प्रभार शामिल नहीं होगा।
बायरती सुरेश का जन्म 19 जुलाई 1972 को हुआ था। उन्होंने 1991 में बंगलूरू के नेशनल कॉलेज से 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है। उनकी पत्नी का नाम बायरती पद्मावती है (जिन्होंने 2019 के विधानसभा उपचुनाव में होसकोटे से चुनाव लड़ा था)। उनके दो बच्चे हैं।
राजनीतिक सफर
वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते हैं। सुरेश ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2012 में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य के रूप में की थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए उन्होंने अपने एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे बंगलूरू के हेब्बल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। उन्होंने 2023 के चुनावों में भी इसी सीट से अपनी जीत बरकरार रखी है।
पेशा और संपत्ति
2023 के हलफनामे के अनुसार, उनका मुख्य पेशा कृषि, व्यवसाय और जमींदारी है। बीएस. सुरेश कर्नाटक के सबसे अमीर विधायकों और मंत्रियों में से एक हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बाद वह सबसे अमीर कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास कुल 648 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। उन पर विभिन्न प्रकार के बैंक कर्ज आदि के रूप में लगभग 114.86 करोड़ रुपये की भारी देनदारियां हैं।
इसके अलावा उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण, दूसरों के जीवन को खतरे में डालने, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
वे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते हैं। सुरेश ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2012 में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य के रूप में की थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए उन्होंने अपने एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे बंगलूरू के हेब्बल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। उन्होंने 2023 के चुनावों में भी इसी सीट से अपनी जीत बरकरार रखी है।
पेशा और संपत्ति
2023 के हलफनामे के अनुसार, उनका मुख्य पेशा कृषि, व्यवसाय और जमींदारी है। बीएस. सुरेश कर्नाटक के सबसे अमीर विधायकों और मंत्रियों में से एक हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बाद वह सबसे अमीर कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास कुल 648 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। उन पर विभिन्न प्रकार के बैंक कर्ज आदि के रूप में लगभग 114.86 करोड़ रुपये की भारी देनदारियां हैं।
इसके अलावा उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण, दूसरों के जीवन को खतरे में डालने, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
13. शरण प्रकाश पाटिल
डॉ. शरण प्रकाश रुदप्पा पाटिल को भी डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले कैबिनेट में जगह मिली है। 55 वर्षीय डॉ. पाटिल ने 2023 का विधानसभा चुनाव गुलबर्गा जिले की सेडम सीट से जीता है। वे एक उच्च शिक्षित नेता हैं। उन्होंने 1995 में गुलबर्गा यूनिवर्सिटी के एमआर. मेडिकल कॉलेज से स्किन एंड वीडी में एमडी की स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की।
पेशा और संपत्ति
2023 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, डॉ. पाटिल और उनकी पत्नी दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। उनके आय के मुख्य स्रोतों में वेतन, कृषि और पेशेवर आय शामिल है। उनके पास कुल 28.70 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। इसमें 4.43 करोड़ रुपये की चल और 24.27 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उन पर अलग-अलग बैंक लोन आदि के रूप में लगभग 14.30 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।
इसके अलावा उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में मुख्य रूप से गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, सार्वजनिक उपद्रव करने और महामारी रोग अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।
