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सियासत: CM सिद्धारमैया ने की स्टालिन की सराहना, कहा- केंद्र-राज्य के बेहतर संबंध के लिए राष्ट्रीय संवाद जरूरी

Tue, 03 Mar 2026 11:28 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: Nirmal Kant Updated Tue, 03 Mar 2026 11:28 PM IST
सार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एमके स्टालिन की पहल की सराहना करते हुए केंद्र-राज्य संबंधों को सुधारने और संघीय संतुलन बहाल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संवाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की एकता सांविधानिक विश्वास और राज्यों के सहयोग से मजबूत होती है, न कि एकतरफा फैसलों से। पढ़िए रिपोर्ट-

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karnataka cm siddaramaiah praises mk stalin backs national dialogue on centre state relations
सिद्धारमैया, सीएम, कर्नाटक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को तमिलनाडु के अपने समकक्ष एमके स्टालिन की प्रशंसा की। उन्होंने केंद्र-राज्य संबंधों को ठीक करने और संघवाद के संतुलन को बहाल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संवाद की मांग का समर्थन किया।
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सिद्धारमैया ने तमिलनाडु और अन्य राज्यों के साथ मिलकर काम करने की कर्नाटक की तत्परता का जिक्र किया। उन्होंने  कहा कि भारत जैसे विविधता भरे गणराज्य में एकता एकतरफा दावे के बजाय सांविधानिक भरोसे और मिलकर काम करने की साझेदारी पर टिकी होनी चाहिए। 
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स्टालिन के पत्र और समिति की रिपोर्ट की सराहना की
सोमवार को लिखे गए अपने पत्र में उन्होंने बताया कि उन्हें स्टालिन का 20 फरवरी का पत्र और केंद्र-राज्य संबंधों पर तमिलनाडु सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट का पहला हिस्सा मिल गया है। उन्होंने इस पहली सराहना की और इसे सांविधानिक सुधार और उसे नया रूप देने का सोचा-समझा प्रयास बताया।  
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संविधान निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
देश के बंटवारे और राष्ट्रीय एकता की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान बनाते समय संविधान सभा ने उस दौर की खास ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जानबूझकर एक मजबूत संघीय ढांचा तैयार किया था।

भारत 'राज्यों का संघ', न कि नाममात्र के समान राज्य
हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को 'राज्यों का संघ' माना गया है, न कि नाममात्र के समान राज्य। संघवाद को सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण से बचाव के लिए एक संरचनात्मक सुरक्षा उपाय के रूप में तैयार किया गया था।

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'संघवाद की मूल भावना बहाल करने की जरूरत'
सिद्धारमैया ने पिछले कई दशकों में बढ़ते केंद्रीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समवर्ती सूची की बहुत व्यापक व्याख्या की जा रही है, केंद्र की ओर से शर्तों के साथ वित्तीय मदद दी जा रही है, राज्यों को कम स्वतंत्रता देने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं लाई जा रही हैं और राज्यों के कानूनों को राज्यपाल की मंजूरी मिलने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

'संघवाद की मूल भावना बहाल करने की जरूरत'
उन्होंने कहा कि जिसे सहकारी संघवाद कहा जाता था, वह अब धीरे-धीरे जबरदस्ती वाले संघवाद जैसा बनता जा रहा है। सांविधानिक प्रावधानों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सातवीं अनुसूची के साथ अनुच्छेद 246 की मूल भावना और अनुच्छेद 245 से 254 तक तय किए गए ढांचे को सांविधानिक सिद्धांतों के अनुसार फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।

इनपुट: आईएएनएस



 

 
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