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Karnataka: कर्नाटक की जातिगत जनगणना रिपोर्ट में क्या है, भाजपा के साथ कांग्रेस नेता क्यों कर रहे इसका विरोध?
Fri, 01 Mar 2024 03:53 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 01 Mar 2024 03:53 PM IST
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कर्नाटक जातिगत जनगणना रिपोर्ट
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
बिहार के बाद कर्नाटक में जातिगत जनगणना रिपोर्ट पेश कर दी गई है। राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने गुरुवार को यह रिपोर्ट पेश की। भले ही रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। खुद सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के विधायकों ने इसका विरोध किया है। विपक्षी भाजपा ने भी जातिगत जनगणना रिपोर्ट पर सवालिया निशान खड़े किए हैं।इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि वह भविष्य की कार्रवाई तय करने के लिए कैबिनेट बैठक में जाति जनगणना रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे। 2014 में सिद्धारमैया सरकार ने जातिगत सर्वे कराने का आदेश दिया था। आइये जानते हैं कि कर्नाटक में जातिगत जनगणना रिपोर्ट को लेकर क्या हुआ है? रिपोर्ट में क्या-क्या शामिल है? इसको लेकर विवाद क्या है? भाजपा का क्या कहना है? इससे पहला किन राज्यों में इस तरह का सर्वे हुआ है?
कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया
- फोटो :
सोशल मीडिया
कर्नाटक में जातिगत जनगणना रिपोर्ट को लेकर क्या हुआ है?
राज्य के ओबीसी आयोग ने 29 फरवरी को जातिगत जनगणना रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट को सामाजिक आर्थिक सर्वे नाम दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट को ओबीसी आयोग के अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े ने अपने कार्यालय के आखिरी दिन विधानसभा पहुंचे और सीएम सिद्धारमैया से मुलाकात की।
मीडिया से बात करते हुए ओबीसी आयोग के अध्यक्ष ने कहा, 'हमने रिपोर्ट सौंप दी है। सीएम ने कहा कि वह इसे अगली कैबिनेट में पेश करेंगे और इसपर फैसला लेंगे।' हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
राज्य के ओबीसी आयोग ने 29 फरवरी को जातिगत जनगणना रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट को सामाजिक आर्थिक सर्वे नाम दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट को ओबीसी आयोग के अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े ने अपने कार्यालय के आखिरी दिन विधानसभा पहुंचे और सीएम सिद्धारमैया से मुलाकात की।
मीडिया से बात करते हुए ओबीसी आयोग के अध्यक्ष ने कहा, 'हमने रिपोर्ट सौंप दी है। सीएम ने कहा कि वह इसे अगली कैबिनेट में पेश करेंगे और इसपर फैसला लेंगे।' हालांकि, मुख्यमंत्री ने इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कर्नाटक विधानसभा
- फोटो :
ANI
रिपोर्ट में क्या है और यह कैसे बनी?
जातिगत जनगणना रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अनुसूचित जाति को सबसे अधिक आबादी वाला बताया गया है। दूसरे स्थान पर मुसलमानों को रखा गया है। इसके बाद क्रमश: लिंगायत और वोक्कालिगा को रखा गया है।
जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है वो कई साल पुरानी है। दरअसल, 2014 में कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सिद्धारमैया सरकार एक सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। यह सर्वे 127वें संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, ओबीसी के आनुपातिक आरक्षण पर निर्णय लेने के लिए किया गया था।
एच कंथाराज की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 2015 में अप्रैल और मई में सर्वे कराया। इस दौरान 1.6 लाख गणनाकारों ने लगभग 1.3 करोड़ घरों का सर्वे किया। इस दौरान 1,30,00,000 परिवारों के 5,90,00,000 लोगों से 54 सवाल पूछे गए थे। इस परियोजना पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में 2017 में रिपोर्ट तैयार हो गई थी। हालांकि, इसे न तो स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया।
मौजूदा अध्यक्ष हेगड़े के नेतृत्व में आयोग को नवंबर 2023 में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। हालांकि, कुछ और समय मांगे जाने पर सरकार ने रिपोर्ट सौंपने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। अब आखिरकार इस रिपोर्ट को सरकार को सौंप दिया गया है।
जातिगत जनगणना रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अनुसूचित जाति को सबसे अधिक आबादी वाला बताया गया है। दूसरे स्थान पर मुसलमानों को रखा गया है। इसके बाद क्रमश: लिंगायत और वोक्कालिगा को रखा गया है।
जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है वो कई साल पुरानी है। दरअसल, 2014 में कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सिद्धारमैया सरकार एक सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। यह सर्वे 127वें संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, ओबीसी के आनुपातिक आरक्षण पर निर्णय लेने के लिए किया गया था।
एच कंथाराज की अध्यक्षता में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 2015 में अप्रैल और मई में सर्वे कराया। इस दौरान 1.6 लाख गणनाकारों ने लगभग 1.3 करोड़ घरों का सर्वे किया। इस दौरान 1,30,00,000 परिवारों के 5,90,00,000 लोगों से 54 सवाल पूछे गए थे। इस परियोजना पर 169 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल में 2017 में रिपोर्ट तैयार हो गई थी। हालांकि, इसे न तो स्वीकार किया गया और न ही इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया गया।
मौजूदा अध्यक्ष हेगड़े के नेतृत्व में आयोग को नवंबर 2023 में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। हालांकि, कुछ और समय मांगे जाने पर सरकार ने रिपोर्ट सौंपने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। अब आखिरकार इस रिपोर्ट को सरकार को सौंप दिया गया है।
रिपोर्ट को लेकर विवाद क्या है?
रिपोर्ट के सौंपते ही इस पर विवाद छिड़ गया। कर्नाटक कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और वीरशैव-लिंगायत महासभा के अध्यक्ष शमनूर शिवशंकरप्पा ने जाति जनगणना को अवैज्ञानिक बताया है। उन्होंने कहा, 'बिना डोर-टू-डोर सर्वे किए तैयार की गई रिपोर्ट को समाज स्वीकार नहीं करेगा।'
दीर्घ और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लिंगायत समुदाय को अन्याय का सामना न करना पड़े। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि रिपोर्ट में खामियां हैं। इसके अलावा कांग्रेस के विधायक विनय कुलकर्णी और विजयानंद कशप्पनवर ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।
रिपोर्ट के सौंपते ही इस पर विवाद छिड़ गया। कर्नाटक कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और वीरशैव-लिंगायत महासभा के अध्यक्ष शमनूर शिवशंकरप्पा ने जाति जनगणना को अवैज्ञानिक बताया है। उन्होंने कहा, 'बिना डोर-टू-डोर सर्वे किए तैयार की गई रिपोर्ट को समाज स्वीकार नहीं करेगा।'
दीर्घ और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लिंगायत समुदाय को अन्याय का सामना न करना पड़े। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि रिपोर्ट में खामियां हैं। इसके अलावा कांग्रेस के विधायक विनय कुलकर्णी और विजयानंद कशप्पनवर ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।
रिपोर्ट पर भाजपा ने क्या कहा है?
कर्नाटक की विपक्षी भाजपा ने भी रिपोर्ट का विरोध किया है। पार्टी के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा, 'यह सर्वे वैज्ञानिक नहीं है। इससे लिंगायत और वोक्कालिगा नाराज हैं। हम इसका विरोध करेंगे। हम कांग्रेस सरकार से अनुरोध करेंगे कि वे घर-घर जाकर दोबारा सर्वे करें, जिसके बाद ही हम इसे स्वीकार करेंगे।'
कर्नाटक की विपक्षी भाजपा ने भी रिपोर्ट का विरोध किया है। पार्टी के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कहा, 'यह सर्वे वैज्ञानिक नहीं है। इससे लिंगायत और वोक्कालिगा नाराज हैं। हम इसका विरोध करेंगे। हम कांग्रेस सरकार से अनुरोध करेंगे कि वे घर-घर जाकर दोबारा सर्वे करें, जिसके बाद ही हम इसे स्वीकार करेंगे।'
रिपोर्ट पर उठे सवालों पर सरकार का क्या कहना है?
कांग्रेस के लिंगायत और वोक्कालिगा नेताओं द्वारा इस सर्वे पर आलोचना किए जाने के बाद सीएम सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इसपर पहले कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। सर्वे में विसंगतियां होने से इसपर विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी।
वहीं, राज्य के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने दावा किया कि जाति जनगणना रिपोर्ट का कोई विरोध नहीं है। खरगे ने कहा, 'लोगों को डेटा पर आपत्ति है, रिपोर्ट पर नहीं। हम उन्हें विश्वास में लेंगे। वे वैज्ञानिक बदलाव की मांग कर रहे हैं। सभी नेता इस बात पर सहमत हुए हैं कि आबादी के हिसाब से सुविधाएं बांटी जानी चाहिए।'
कांग्रेस के लिंगायत और वोक्कालिगा नेताओं द्वारा इस सर्वे पर आलोचना किए जाने के बाद सीएम सिद्धारमैया ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इसपर पहले कैबिनेट में चर्चा की जाएगी। सर्वे में विसंगतियां होने से इसपर विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी।
वहीं, राज्य के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने दावा किया कि जाति जनगणना रिपोर्ट का कोई विरोध नहीं है। खरगे ने कहा, 'लोगों को डेटा पर आपत्ति है, रिपोर्ट पर नहीं। हम उन्हें विश्वास में लेंगे। वे वैज्ञानिक बदलाव की मांग कर रहे हैं। सभी नेता इस बात पर सहमत हुए हैं कि आबादी के हिसाब से सुविधाएं बांटी जानी चाहिए।'
बिहार जाति जनगणना रिपोर्ट
- फोटो :
AMAR UJALA
इससे पहले किसी और राज्य में इस तरह का सर्वे हुआ है क्या?
पिछले साल बिहार में जातिगत सर्व की रिपोर्ट सामने आई थी। बिहार सरकार ने अक्तूबर 2023 में बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की थी। जातिगत जनगणना के आंकड़े कहते हैं कि राज्य में कुल 13 करोड़ से ज्यादा की आबादी है। जो 2011 की जनगणना के मुकाबले 25.5% से ज्यादा है। पिछड़ा वर्ग की कुल आबादी राज्य की जनसंख्या का 63 फीसदी से भी ज्यादा है। इनमें 27 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी जातियां तो 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियां भी शामिल हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 19.65 फीसदी है। वहीं, अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फीसदी है। इसके साथ ही कुल आबादी में सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी करीब 15.52 फीसदी है।
पिछले साल बिहार में जातिगत सर्व की रिपोर्ट सामने आई थी। बिहार सरकार ने अक्तूबर 2023 में बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी की थी। जातिगत जनगणना के आंकड़े कहते हैं कि राज्य में कुल 13 करोड़ से ज्यादा की आबादी है। जो 2011 की जनगणना के मुकाबले 25.5% से ज्यादा है। पिछड़ा वर्ग की कुल आबादी राज्य की जनसंख्या का 63 फीसदी से भी ज्यादा है। इनमें 27 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी जातियां तो 36 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियां भी शामिल हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 19.65 फीसदी है। वहीं, अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फीसदी है। इसके साथ ही कुल आबादी में सामान्य वर्ग की हिस्सेदारी करीब 15.52 फीसदी है।