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धर्मांतरण पर शिकंजा: कर्नाटक विधानसभा ने पारित किया धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षण विधेयक, कांग्रेस-जेडीएस ने किया विरोध

Thu, 23 Dec 2021 05:39 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, बेंगलुरू
एएनआई, बेंगलुरू Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 23 Dec 2021 05:39 PM IST
सार

धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा करने के लिए लाए गए इस विधेयक के तहत जबर्दस्ती, धोखेबाजी से, लालच देकर या जबरन विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन रोकने के प्रावधान किए गए हैं। 
 

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Karnataka Assembly passes Protection of Right to Freedom of Religion Bill, 2021
कर्नाटक विधानसभा

विस्तार

जबरन धर्मांतरण को अपराध घोषित करने वाला ‘कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण विधेयक, 2021’ गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा में हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया। कांग्रेस इसे जनता के खिलाफ, अमानवीय, असांविधानिक, गरीब विरोधी और बेरहम बताते हुए बिल का विरोध किया। जेडीएस ने भी बिल का विरोध किया। विपक्ष ने कहा कि यह बिल किसी सूरत में पारित नहीं होना चाहिए और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।  

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कांग्रेस के विरोध का जवाब देते हुए सत्तारूढ़ भाजपा ने सदन में दावा किया कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ही इस बिल की शुरुआत की थी। हालांकि वह इसे अंतिम रूप नहीं दे पाये। नेता प्रतिपक्ष सिद्धारमैया ने पहले तो इस दावे को खारिज कर दिया लेकिन बाद में स्वीकार किया कि उनके शासन में सिर्फ मसौदा बिल तैयार कर कैबिनेट के सामने पेश करने की बात हुई थी लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हुआ था। 
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इस बिल के पीछे संघ का हाथ : सिद्धारमैया
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि इस बिल के पीछे संघ का हाथ है। इसके जवाब में मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने कहा, संघ धर्मांतरण विरोधी रुख के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर कांग्रेस सरकार 2016 में संघ की नीति को अपनाते हुए यह बिल क्यों लाना चाहती थी? क्योंकि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार ने भी ऐसा कानून बनाया था। बोम्मई ने कहा, यह बिल पूरी तरह कानूनी और सांविधानिक है। इसमें स्वस्थ समाज की परिकल्पना है। कांग्रेस सिर्फ वोटबैंक के लिए इसका विरोध कर रही है। उनका दोहरा चरित्र आज सबके सामने आ गया। 
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कानून का उल्लंघन करने पर पांच साल जेल व 25000 जुर्माने का प्रावधान 
बिल में नियम का उल्लंघन करने वाले नाबालिग पर तीन से पांच साल तक की कैद और 25000 रुपये जुर्माना लगाने का प्रावधान है। वहीं महिला, एससी एसटी दोषियों को तीन से 10 वर्ष की कैद और कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही दोषी को उस व्यक्ति को पांच लाख रुपये तक का हर्जाना देना पड़ेगा जिसका धर्म परिवर्तन कराया गया। एक साथ बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने वाले को तीन से दस साल की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान बिल में किया गया है। इसके अलावा अगर विवाह के लिए धर्मांतरण कराया गया तो ऐसी शादी को गैर कानूनी माना जाएगा। इस बिल के तहत सभी अपराध गैर जमानती होंगे। 

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