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नया नहीं है बहुमत पर मनमानी थोपने का सिलसिला, इंदिरा और नेहरू के पीएम रहते हुई थी शुरुआत
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 19 May 2018 07:31 PM IST
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बहुमत की अनदेखी कर मनमानी थोपने का सिलसिला नया नहीं है। इसके सिलसिले की शुरुआत बीती सदी के 60 के दशक में इंदिरा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष और जवाहर लाल नेहरू के पीएम रहते शुरू हुआ। तब केंद्र ने केरल में बनी कम्युनिस्ट पार्टी की नंबूदरीपाद सरकार को बहुमत रहते बर्खास्त कर दिया था।
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सिर्फ इंदिरा गांधी के पीएम रहते 50 बार राज्य सरकारों को बर्खास्त किया गया। हालांकि रिकार्ड बताते हैं कि केंद्र में सत्ता हासिल करने के बाद हर दल ने बहुमत की अनदेखी कर मनमानी की। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 123 बार राज्य सरकारों को विभिन्न कारणों से बर्खास्त किया गया है।
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मनमानी का सिलसिला 1959 में नंबुदरी सरकार को बर्खास्त करने से शुरू हुआ। तब पुलिस फायरिंग में एक गर्भवती मछुआरिन की मौत के बहाने नंबुदरी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद वर्ष 1982 में हरियाणा में लोकदल की देवीलाल सरकार को तोड़ कर भजन लाल की सरकार बनाई गई।
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इंदिरा के पीएम रहते वर्ष 1983 में आंध्रप्रदेश की एनटीआर सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। वह भी तब जब वह हार्ट का ऑपरेशन कराने विदेश गए हुए थे। उनकी अनुपस्थिति में उन्हीं की सरकार के वित्त मंत्री एन भास्कर राव को सीएम बना दिया गया। हालांकि बाद में एनटीआर ने राष्ट्रपति भवन और राजभवन में विधायकों का प्रदर्शन करा कराया। इसी साल कानून व्यवस्था के सवाल पर पंजाब की दरबारा सिंह सरकार को बर्खास्त किया गया।
वर्ष 1988 राजीव गांधी के पीएम रहते कर्नाटक में एसआर बोम्मई सरकार को बहुमत रहते बर्खास्त किया। जिस पर सुप्रीम ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। इसके बाद वर्ष 1991 में आई कांग्रेस की ही नरसिंह राव सरकार ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित भाजपा की चार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। वर्ष 2004 से 2014 तक कांग्रेस की अगुवाई वाली मनमोहन सरकार ने भी 12 बार विभिन्न कारणों से राज्य सरकारों को बर्खास्त किया।
अन्य दल भी पीछे नहीं
मनमानी के मामले में अन्य दल भी पीछे नहीं रहे। वर्ष 1977 में आई मोरारजी सरकार ने 16 राज्य सरकारों को बर्खास्त किया। वर्ष 1999 से 2004 के दौरान वाजपेयी सरकार ने 5 राज्य सरकारों को बर्खास्त किया, जबकि मोदी सरकार अब तक तीन राज्य सरकारों को बर्खास्त कर चुकी है। हालांकि इनमें से दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के फैसले को पलट दिया।