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ओम बिरला ने कहा- ब्राह्मणों का स्थान ऊंचा, तो सिब्बल ने कसा तंज, ट्विटर पर चर्चा- असली ब्राह्मण कौन

Wed, 11 Sep 2019 11:03 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 11 Sep 2019 11:03 PM IST
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kapil Sibal on Om Birla remark Brahmins place high in society Twitter discuss Who is real Brahmin
om birla kapil sibal - फोटो : PTI
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ब्राह्मणों से संबंधित टिप्पणी को लेकर सियासी दलों ने इस पर विवाद शुरू कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने बिरला पर निशाना साधा है। बिरला ने कहा था कि समाज में ब्राह्मणों का हमेशा से उच्च स्थान रहा है। 
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सिब्बल ने तंज कसते हुए कहा है, "यही विचाराधारा है, जिसके कारण भारत में जातिवाद और असमानता फैलती है। बिरला जी हम आपका सम्मान इसलिए नहीं करते हैं कि आप ब्राह्मण हैं बल्कि इसलिए करते हैं कि आप लोकसभा में हमारे स्पीकर हैं।" 
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दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला रविवार को कोटा में हुए अखिल ब्राह्मण महासभा के कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने सोमवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर इस कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "समाज में ब्राह्मणों का हमेशा से उच्च स्थान रहा है। यह स्थान उनकी त्याग, तपस्या का परिणाम है। यही वजह है कि ब्राह्मण समाज हमेशा से मार्गदर्शक की भूमिका में रहा है।"

सिब्बल से पहले पुनिया ने की टिप्पणी

इससे पहले कांग्रेस नेता पीएल पुनिया सहित सोशल मीडिया में कई यूजर्स ने भी बिरला पर निशाना साधा। पुनिया ने कहा था किसी भी व्यक्ति का आकलन उसके मेरिट के आधार पर किया जाना चाहिए। वहीं गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने बिरला की टिप्पणी को जाति प्रणाली का महिमामंडन करने वाला बताया। उन्होंने इसे अपराध बताते हुए लोकसभा स्पीकर से माफी की मांग भी की थी। 

सोशल मीडिया पर ब्राह्मण पर चर्चा

ओम बिरला के ट्विटर पोस्ट पर कई यूजर्स ने अपनी टिप्पणियां दी।

भारतयी पुलिस सेवा अधिकारी आईपीएस संदीप मित्तल लिखते हैं, "यास्क मुनि के अनुसार ब्राह्मण कौन? 
जन्मना जायते शूद्रः संस्कारात् भवेत द्विजः। 
वेद पाठात् भवेत्विप्रःब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः।। 

अर्थात – व्यक्ति जन्मतः शूद्र है। संस्कार से वह द्विज बन सकता है। वेदों के पठन-पाठन से विप्र हो सकता है। किंतु जो ब्रह्म को जानले, वही ब्राह्मण है।" 

मित्तल आगे लिखते हैं, "महर्षि मनु के अनुसार 
विधाता शासिता वक्ता मो ब्राह्मण उच्यते।
तस्मै नाकुशलं ब्रूयान्न शुष्कां गिरमीरयेत्॥ 

अर्थात- शास्त्रों का रचयिता तथा सत्कर्मों का अनुष्ठान करने वाला, शिष्यादि की ताडनकर्ता, वेदादि का वक्ता और सर्व प्राणियों की हितकामना करने वाला ब्राह्मण कहलाता है। 


इसके अलावा कई यूजर्स ने बिरला के बयान पर तर्क-वितर्क किया। 

एक यूजर ने लिखा, "राम क्या ब्राह्मण थे? क्या कृष्ण ब्राह्मण थे? क्या सम्राट अशोक ब्राह्मण थे? क्या गुप्त राजा ब्राह्मण थे? यदि नहीं, तो ब्राह्मण कब होने लगे ऊंच स्थान वाले?"

इसके जवाब में एक यूजर ने लिखा, "राम के गुरु ब्राह्मण थे, कृष्णा के गुरु ब्राह्मण थे, अशोक के गुरु ब्राह्मण थे. गुप्त के गुरु ब्राह्मण थे और सुनिए गुरु का स्थान क्या होता है थोड़ा अध्ययन कर लें..."
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