Kanjhawala case: 'फायर फाइटिंग' मोड से बाहर आए दिल्ली पुलिस, इन तीन शब्दों को फॉलो करके ही कम होंगे अपराध
Kanjhawala case: दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कंझावाला की घटना दिल्ली में निर्भया कांड की याद दिला रही है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से निर्भया कांड में इस्तेमाल की गई बस पूरी दिल्ली में सड़कों पर दौड़ती रही, ठीक उसी तरीके से एक कार युवती को घसीटते हुए दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती रही...
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दिल्ली में कंझावाला सड़क हादसे (Kanjhawala case) में पुलिस के ऊपर तमाम सवालिया निशान उठ रहे हैं। सड़क सुरक्षा मामलों से जुड़े विशेषज्ञों से लेकर पुलिस के रिटायर्ड अधिकारियों ने इस मामले में बरती गई लापरवाहियों पर दिल्ली पुलिस की तमाम कमियों को दूर करने की न सिर्फ सलाह दी है, बल्कि आगे से और ज्यादा अलर्ट पर रहने के लिए कहा है। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों ने सलाह दी है कि दिल्ली पुलिस को अब अपने 'फायर फाइटिंग' मोड से बाहर निकल जाए हर वक्त 'क्राइम प्रिवेंशन' के मोड में रहना चाहिए। ताकि किसी भी बड़ी घटना को वक्त रहते रोका जा सके। इसके अलावा पुलिस को ART जैसे तीन बड़े शब्दों को फॉलो करके बेहतर पुलिसिंग की नसीहत भी दी गई।
दिल्ली के कंझावाला सड़क हादसे की जांच के लिए गृह मंत्रालय की बनाई गई कमेटी ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर संजय अरोड़ा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। दिल्ली पुलिस की विशेष आयुक्त शालिनी सिंह के नेतृत्व में तैयार की गई यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी जानी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक जिस रूट पर यही घटना हुई है, उस पूरे 13 किलोमीटर के रास्ते में पांच पीसीआर वैन तैनात थीं। यही नहीं घटना के चश्मदीद से पुलिस ने डेढ़ दर्जन से ज्यादा बार बात भी की है। घटना की जानकारी के लिए छह बार पीसीआर कॉल भी हुई। मामले की गंभीरता देखते हुए और पीसीआर वैन को भी लगाया गया। बावजूद इसके 13 किलोमीटर के इस पूरे रूट पर पुलिस दल आरोपियों को घटनास्थल से नहीं पकड़ सकी।
दिल्ली पुलिस की नाकामी पर अब चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कंझावाला की घटना दिल्ली में निर्भया कांड की याद दिला रही है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से निर्भया कांड में इस्तेमाल की गई बस पूरी दिल्ली में सड़कों पर दौड़ती रही, ठीक उसी तरीके से एक कार युवती को घसीटते हुए दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती रही। रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि इससे ज्यादा खौफनाक और क्या हो सकता है कि दिल्ली की सड़कों पर शराब पिए हुए लोग तेज आवाज में कार का म्यूजिक बजाते हुए किसी लड़की के शरीर को घसीटते हुए ले जा रहे हैं। उक्त रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि जब दिल्ली में कोई भी बड़े आयोजन हों, उस वक्त तो पुलिस को और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। बेहतर है पुलिस को फायर फाइटिंग मोड से बाहर आकर हर वक्त अलर्ट मोड में ही रहना चाहिए।
दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी और विशेष पुलिस आयुक्त रहे प्रदीप भारद्वाज कहते हैं कि जब तक दिल्ली की अस्सी-नब्बे हजार फोर्स के एक-एक सिपाही को एआरटी (आर्ट) का अहसास कराया जाएगा, तब और बेहतर पुलिसिंग हो सकेगी। रिटायर्ड आईपीएस भारद्वाज कहते हैं कि अकाउंटेबिलिटी रिस्पांसिबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी के साथ ही एक-एक सिपाही को और वरिष्ठ उच्च अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होना चाहिए। वह कहते हैं कि ऐसा होने पर किसी भी क्राइम को होने से पहले ही ना सिर्फ उसको रोका जा सकेगा। बल्कि से शहर सुरक्षित भी बनाया जा सकेगा। वो मानते हैं कि कंझावाला मामले में कहीं न कहीं चूक तो हुई है। आगे से ऐसी चूक ना हो इसके लिए पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी होगी और अपने नेटवर्क को ज्यादा से ज्यादा स्ट्रांग करना होगा।
इतनी बड़ी वारदात में एक और तथ्य सामने आ रहा है कि दिल्ली में सड़कों पर तेज आवाज में गाने कैसे बज रहे थे। सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस पिकेट-बैरिकेड्स, पीसीआर पुलिस के अधिकारियों समेत स्थानीय पुलिस के जवानों की मुस्तैदी के बाद भी अगर दिल्ली की सड़कों पर तेज आवाज में वाहन चलते हैं, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोड सेफ्टी अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि गाड़ी में तय आवाज से ज्यादा म्यूजिक बजाना, तो वैसे भी गैर कानूनी है। फिर ऐसा वॉल्यूम और ज्यादा खतरनाक है, जब कोई बड़ी घटना हो और उसका अंदाजा सिर्फ इसीलिए ना हो सके कि गाड़ी में तेज आवाज में म्यूजिक बज रहा था, तो यह अपराध ही हुआ। दिल्ली पुलिस से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल इस पूरे मामले में एक-एक पहलू की जांच की जा रही है।