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Padma Shri: नारियल अम्मा के नाम से मशहूर के चेलाम्मल को मिला पद्म श्री, जानें अंडमान की इस महिला की कहानी
Thu, 25 Jan 2024 10:28 PM IST
शक्तिराज सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Thu, 25 Jan 2024 10:28 PM IST
सार
दक्षिण अंडमान में रहने वाली के चेलाम्मल 10 एकड़ की जमीन में खेती करती हैं। वह जैविक कृषि के जरिए वह लौंग, अदरक, अनानास और केले की खेती करती हैं।
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के चेलाम्मल
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
साल 2024 के लिए पद्म श्री सम्मान के विजेताओं का एलान हो चुका है। इस सूची में दक्षिण अंडमान में रहने वाली के चेलाम्मल का नाम भी शामिल है। नारियल अम्मा के नाम से मशहूर 69 साल की के चेलाम्मल 10 एकड़ की जमीन में खेती करती हैं। वह जैविक कृषि के जरिए वह लौंग, अदरक, अनानास और केले की खेती करती हैं। वह 150 से ज्यादा किसानों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित भी कर चुकी हैं और उनकी वजह से ये सभी किसान अब जैविक कृषि कर रहे हैं।
वह नवाचार के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने कई ऐसे तरीके निकाले हैं, जिससे नारियल की खेती आसानी से की जा सकती है। इसमें लागत भी कम है और पेड़ों को नुकसान से बचाने में भी आसानी होती है। उन्होंने खेली के लिए नवीन एवं किफायती समाधान तैयार किए। इससे नारियल और ताड़ के पेड़ को होने वाले नुकसान को नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।
नारियल अम्मा प्रति वर्ष 27,000 से अधिक नारियल का उत्पादन करती हैं और दो हेक्टेयर जमीन में नारियल के बागान की खेती करती हैं। वह अंडमान में होने वाले साधारण ताड़ के 460 पेड़ों का भी उत्पादन करती हैं। उन्होंने सिर्फ कक्षा छह तक पढ़ाई की, लेकिन पिछले पांच दशकों से प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ खेती के लिए नवाचार कर रही हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने नारियल और ताड़ के पेड़ों को होने वाले नुकसान से बचाने के प्रभावी और सस्ते तरीके खोजे, जो सामान्य लोगों के लिए काफी मुश्किल काम था।
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जानें पद्म पुरस्कारों के बारे में
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वह नवाचार के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने कई ऐसे तरीके निकाले हैं, जिससे नारियल की खेती आसानी से की जा सकती है। इसमें लागत भी कम है और पेड़ों को नुकसान से बचाने में भी आसानी होती है। उन्होंने खेली के लिए नवीन एवं किफायती समाधान तैयार किए। इससे नारियल और ताड़ के पेड़ को होने वाले नुकसान को नियंत्रण के उपाय शामिल हैं।
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नारियल अम्मा प्रति वर्ष 27,000 से अधिक नारियल का उत्पादन करती हैं और दो हेक्टेयर जमीन में नारियल के बागान की खेती करती हैं। वह अंडमान में होने वाले साधारण ताड़ के 460 पेड़ों का भी उत्पादन करती हैं। उन्होंने सिर्फ कक्षा छह तक पढ़ाई की, लेकिन पिछले पांच दशकों से प्रतिबद्धता और उत्साह के साथ खेती के लिए नवाचार कर रही हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने नारियल और ताड़ के पेड़ों को होने वाले नुकसान से बचाने के प्रभावी और सस्ते तरीके खोजे, जो सामान्य लोगों के लिए काफी मुश्किल काम था।
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जानें पद्म पुरस्कारों के बारे में
- भारत सरकार ने देश के दो सर्वोच्च नागरिक सम्मान - भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में की थी।
- इन पुरस्कारों से देश-विदेश के उन लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने किसी क्षेत्र में कोई प्रतिष्ठित व असाधारण कार्य किया हो, जिसमें लोक सेवा का तत्व जुड़ा हो।
- हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर इन पुरस्कारों की घोषणा की जाती है। फिर मार्च या अप्रैल में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।
- सामान्यत: मरणोपरांत ये पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान नहीं है। लेकिन कुछ विशिष्ट मामलों में सरकार के पास ये निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।
- नियम के अनुसार, किसी को अगर वर्तमान में पद्मश्री दिया गया है, तो फिर उसे पद्म भूषण या पद्म विभूषण अब से पांच साल बाद ही दिया जा सकता है। लेकिन यहां भी कुछ विशिष्ट मामलों में पुरस्कार समिति छूट दे सकती है।
- जिस दिन समारोह में राष्ट्रपति द्वारा सम्मान दिया जाता है, उसके बाद सभी विजेताओं के नाम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाते हैं।