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Additional Charge: सिंधिया को इस्पात और स्मृति ईरानी को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, जानें इसकी वजह

Wed, 06 Jul 2022 09:12 PM IST
Amit Mandal ब्यूरो/न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 06 Jul 2022 09:12 PM IST
सार

मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह ने बुधवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। दोनों का राज्यसभा कार्यकाल गुरुवार को समाप्त हो रहा है।

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Jyotiraditya Scindia and Smriti Irani gets Additional Charge of Ministry
नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार में वह तीसरे इस्पात मंत्री हैं। कामकाज संभालने से पहले सिंधिया ने उद्योग भवन में अपने कार्यालय में अपनी मेज पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखी। उन्होंने इस्पात सचिव संजय कुमार सिंह और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यभार संभाला।

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पूर्व इस्पात मंत्री राम चंद्र प्रसाद सिंह ने राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले, बुधवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सिंह पिछले वर्ष आठ जुलाई को इस्पात मंत्री बने थे। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का स्थान लिया था जिन्हें मंत्रिमंडल फेरबदल में शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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बुधवार को प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रियों मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह का इस्तीफा मंजूर कर लिया । दोनों ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। इसी के साथ मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह के मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार दूसरे मंत्रियों को दे दिया गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय जबकि स्मृति ईरानी को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 

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नकवी के इस्तीफे के बाद अब मोदी मंत्रिमंडल में कोई मुस्लिम चेहरा नहीं
नकवी करीब ढाई दशक से भाजपा का प्रमुख मुस्लिम चेहरा रहे हैं। नकवी के इस्तीफे के साथ ही मोदी मंत्रिमंडल में मुसलमान की अंतिम भागीदारी भी खत्म हो गई। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में एमजे अकबर, नजमा हेपतुल्ला और नकवी के रूप में तीन-तीन मुस्लिम चेहरे थे। 

हालांकि पहले ही कार्यकाल में मी टू विवाद में अकबर की छुट्टी हुई, जबकि हेपतुल्ला को राज्यपाल बना दिया गया। तब भी नकवी के रूप में मंत्रिमंडल में नकवी ही एक मात्र मुस्लिम चेहरा बचे थे।

आरसीपी पर भाजपा नहीं बना पाई मन
टिकट न मिलने के बाद आरसीपी भाजपा के संपर्क में थे। उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा थी। हालांकि संभवत: नीतीश की नाराजगी के कारण भाजपा निर्णय नहीं ले पाई।

विस्तार की भी संभावना
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह के इस्तीफे के साथ ही शिवसेना में हुई बगावत के बाद मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना बनती दिख रही है। आरसीपी के इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में जदयू का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है।


फिर महाराष्ट्र में शिवसेना पर बढ़त हासिल करने के लिए शिंदे गुट को मजबूत करने की भी जरूरत है। उधर, विधानसभा के बाद लोकसभा में भी शिवसेना में बड़ी टूट की संभावना बन रही है। ऐसे में शिंदे गुट को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने के अलावा पार्टी की सबसे बड़ी सहयोगी जदयू को जल्द प्रतिनिधित्व देने पर सहमति बन सकती है।

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