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राज्यसभा: हंगामे के बीच किशोर न्याय संशोधन विधेयक को मंजूरी, बच्चों का होगा बेहतर संरक्षण

Thu, 29 Jul 2021 04:27 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 29 Jul 2021 04:27 AM IST
सार

  • बच्चा गोद लेने व संरक्षण में जिलाधिकारी को अतिरिक्त अधिकार

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Juvenile Justice Amendment Bill approved amidst uproar in Rajya Sabha
राज्यसभा में हंगामा - फोटो : ANI

विस्तार

राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और शोरशराबे के बीच बुधवार को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) संशोधन विधेयक 2021 संसद से पारित हो गया। सदन में विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। लोकसभा में यह विधेयक 24 मार्च को पारित हो चुका है। इसके साथ ही अब बच्चा गोद लेने व संरक्षण के मामले में जिलाधिकारी को अतिरिक्त अधिकार मिलेंगे।

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हंगामे के कारण दोपहर तक के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्ष के सांसद फिर वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। शोरशराबे के बीच ही महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने विधेयक के संबंध में कहा, यह बच्चों के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है तथा आगामी पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया है। सभी सदस्यों को राजनीति से हटकर इसे पास करना चाहिए। ये ऐसे बच्चे हैं जो वोटर नहीं हैं।
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मंत्री ने कहा, बाल कल्याण समितियों को ज्यादा ताकत दी जा रही है। इससे बच्चों का बेहतर संरक्षण करने में मदद मिलेगी। संशोधन विधेयक में बच्चों से जुड़े मामलों का तेजी से निस्तारण होगा और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट तथा अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को शक्तियां देकर सशक्त बनाया गया है।
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बच्चा गोद लेने में लग रहे थे 60 से ज्यादा दिन
मंत्री ने बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा, 60 दिनों का समय लगना चाहिए लेकिन काफी अधिक समय लग रहा है। समय से कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से बच्चों के हित प्रभावित हो रहे हैं। गोद लिए जाने से संबंधित करीब एक हजार मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। उन्होंने कहा, बच्चों के संरक्षण को ध्यान में रखकर जिला मजिस्ट्रेट को निगरानी और कानून के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी जा रही है। इस दौरान विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों का आसन के समक्ष आ कर हंगामा जारी था। हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए हुए ये सदस्य सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

चर्चा के लिए नाम पुकारे गए, सदस्य वेल में हंगामा करते रहे
विधेयक पर चर्चा के लिए पीठासीन अध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने सदस्यों के नाम पुकारे। इनमें से कुछ सदन में नहीं थे, और कुछ आसन के समक्ष हंगामा कर रहे थे। वहीं कुछ सदस्यों ने सदन में व्यवस्था न होने का तर्क देकर अपनी बात नहीं रखी। चर्चा में किसी सदस्य के हिस्सा न लेने पर पीठासीन अध्यक्ष कालिता ने मंत्री से कहा कि वे विधेयक पारित करने के लिए प्रस्ताव करें। स्मृति ने विधेयक पारित करने के लिए प्रस्ताव किया और ध्वनि मत से विधेयक को मंजूरी दे दी गई।

शोर शराबे  के बीच 40 मिनट चला प्रश्नकाल
विपक्षी दलों के शोरशराबे के बीच बुधवार को राज्यसभा में 40 मिनट का प्रश्नकाल चला। इस बीच विपक्षी सांसद वेल में पोस्टर लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे। लेकिन उपसभापति हरिवंश ने चार मंत्रालय से संबंधित सवाल जवाब करा सदन को चलाने का फैसला किया।


प्रश्नकाल में भाजपा समेत सहयोगी दलों बीजद, एआईडीएमके, जदयू सांसदों ने सवाल उठाए और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी,  श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव और सामाजिक न्याय अधिकारिकता राज्य मंत्री प्रतिभा भौमिक ने जवाब दिए। इस बीच तीन बार स्थगन के बाद भी जब विपक्ष का हंगामा बंद नहीं हुआ तो उच्च सदन को बृहस्पतिवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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