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कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन जस्टिस कुरियन बोले- न्यायपालिका और न्याय के हित में कदम उठाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 13 Jan 2018 06:42 PM IST
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जस्टिस कुरियन जोसेफ
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भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से विद्रोह करनेवाले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों में से एक जस्टिस कुरियन जोसेफ ने शनिवार को उम्मीद जताई और कहा कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान होगा। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने शुक्रवार को कहा कि चीफ जस्टिस मामलों को अपनी पसंद की पीठ के पास सुनवाई के लिए भेजते हैं। इसके अलावा वरिष्ठ जजों ने कई मुद्दे उठाए और कहा कि न्यायपालिका में सबकुछ ठीक नहीं है और ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का अभूतपूर्व कदम उठाने के एक दिन बाद जस्टिस जोसेफ ने कहा है कि, 'उन्होंने न्यायपालिका और न्याय के हित में यह कदम उठाया।'
उन्होंने इन बातों को खारिज कर दिया कि उन्होंने अनुशासन का उल्लंघन किया है और उम्मीद जताई कि उनके कदम से सुप्रीम कोर्ट के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता आएगी।
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जस्टिस जोसेफ कलडी में अपने पैतृक घर में थे। जब स्थानीय न्यूज चैनलों ने शुक्रवार के घटनाक्रम पर उनसे प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने मलयालम में कहा कि, 'न्याय और न्यायपालिका के लिए खड़े हुए... यही हमने (नई दिल्ली में) कल कहा था। इससे अलग कुछ भी नहीं।'
उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'एक मुद्दे पर सबका ध्यान केंद्रित हुआ है। चूंकि इस पर ध्यान गया है तो निश्चित रूप से इसका हल निकलेगा।' जस्टिस जोसेफ ने कहा कि न्यायाधीशों ने 'न्यायपालिका में लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए ही यह कदम उठाया।'
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जोसेफ कुरियन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि, 'जब तक इस संस्थान को बचाया नहीं जाएगा, इस देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा।'
चीफ जस्टिस के बाद वरिष्ठतम जज जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि, 'हम नहीं चाहते कि हम पर कोई सवाल उठाए और न्यायपालिका की निष्ठा पर सवाल उठे। हमने कई बार गड़बड़ियों को लेकर चीफ जस्टिस से शिकायत की लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।'
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सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का अभूतपूर्व कदम उठाने के एक दिन बाद जस्टिस जोसेफ ने कहा है कि, 'उन्होंने न्यायपालिका और न्याय के हित में यह कदम उठाया।'
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उन्होंने इन बातों को खारिज कर दिया कि उन्होंने अनुशासन का उल्लंघन किया है और उम्मीद जताई कि उनके कदम से सुप्रीम कोर्ट के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता आएगी।
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जस्टिस जोसेफ कलडी में अपने पैतृक घर में थे। जब स्थानीय न्यूज चैनलों ने शुक्रवार के घटनाक्रम पर उनसे प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने मलयालम में कहा कि, 'न्याय और न्यायपालिका के लिए खड़े हुए... यही हमने (नई दिल्ली में) कल कहा था। इससे अलग कुछ भी नहीं।'
उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'एक मुद्दे पर सबका ध्यान केंद्रित हुआ है। चूंकि इस पर ध्यान गया है तो निश्चित रूप से इसका हल निकलेगा।' जस्टिस जोसेफ ने कहा कि न्यायाधीशों ने 'न्यायपालिका में लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए ही यह कदम उठाया।'
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जोसेफ कुरियन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि, 'जब तक इस संस्थान को बचाया नहीं जाएगा, इस देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा।'
चीफ जस्टिस के बाद वरिष्ठतम जज जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि, 'हम नहीं चाहते कि हम पर कोई सवाल उठाए और न्यायपालिका की निष्ठा पर सवाल उठे। हमने कई बार गड़बड़ियों को लेकर चीफ जस्टिस से शिकायत की लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।'