SC से फिर उलझे जस्टिस कर्णन, कहा- मानसिक तौर पर परेशान हूं
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अदालत की अवमानना के मामले में जस्टिस सी. एस. कर्णन और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव की स्थिति बरकरार है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने जस्टिस कर्णन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया गया है। वह कोर्ट के कड़े रूख अपनाने के बाद पेश हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के न्यायिक और प्रशासनिक कामों पर लगी रोक को हटाने से इनकार किया हुआ है।
सुनवाई के दौरान वह काफी आक्रमाक नजर आ रहे थे। न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहड़ की अध्यक्षता वाली सात जजों की पीठ के खिलाफ आदेश लाएंगे। जिसके बाद उन्होंने यह आदेश दे दिया।
उन्होंने कोर्ट में अपनी न्यायिक शक्तियों की बहाली न होने पर कहा कि वह अगली पेशी के दौरान कोर्ट में पेश नहीं होंगे। कर्णन ने कोर्ट से कहा कि वह संवैधानिक पद पर निर्वाचित है और इस फैसले से मेरी प्रतिष्ठा को बहुत ठोस पहुंची है, मेरी बात सुने बिना ही मुझसे मेरा काम छीन लिया गया जिसकी वजह से मैं मानसिक तौर पर परेशान हूं।
20 जजों के खिलाफ कथित तौर भ्रष्टाचार में लिप्त होने की आरोप
इसके बाद कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या जस्टिस कर्नन का पूर्व में दिया बयान नासमझी या भूलवश था। जिसके जवाब में एडवोकेट जनरल ने कहा कि वह मानसिक तौर पर बिल्कुल ठीक हैं, लेकिन वह यह भी बखूबी जानते हैं कि वह क्या कह कहे रहे हैं और क्या कर रहे हैं।
इसके बाद संविधान पीठ ने उनसे कहा कि अगर वह मानसिक तौर पर परेशान हैं तो वह मेडिकल प्रमाण पत्र दर्ज कर सकते हैं जिसके जवाब में कर्णन ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी प्रमाण पत्र को दिखाने की जरूरत नहीं।
ये है पूरा मामला -
जस्टिस कर्णन ने मुख्य न्यायाधीश समेत संवेधानिक पीठ से 'मानसिक प्रताड़ना और सार्वजिनक अपमान' के चलते 14 करोड़ का हर्जाना मांगा है। उन्होंने सीबीआई से मांग की है कि वे उन 20 सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ जांच करें, जिनके खिलाफ कथित तौर भ्रष्टाचार में लिप्त होने की शिकायत की गई है।
इतना ही नहीं इसकी जानकारी संसद को भी दें। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के केस में पेश न होने के बाद उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया था। ऐसा पहली बार हुआ जब एक जज के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया।