{"_id":"650f4e17b65c53a7220f0f70","slug":"justice-hima-kohli-praised-participation-of-women-in-legal-profession-2023-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Women: जस्टिस हिमा कोहली ने कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारिता को सराहा, कहा- समावेशी समाज की ओर कदम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Women: जस्टिस हिमा कोहली ने कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारिता को सराहा, कहा- समावेशी समाज की ओर कदम
Sun, 24 Sep 2023 02:14 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sun, 24 Sep 2023 02:14 AM IST
सार
जस्टिस हिमा कोहली शनिवार को फोर्ब्स इंडिया-लीगल पावर लिस्ट 2022 के समापन समारोह में पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय कानूनी पेशा अब अलग-अलग दायरे में नहीं चलता।
विज्ञापन
justice hima kohli
- फोटो : twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। फिर चाहे वह नौकरशाही हो या वकालत। महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली ने शनिवार को कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ रहा है, जो समावेशी समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
देश में बदल गई स्थिति
जस्टिस हिमा कोहली शनिवार को फोर्ब्स इंडिया-लीगल पावर लिस्ट 2022 के समापन समारोह में पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय कानूनी पेशा अब अलग-अलग दायरे में नहीं चलता। यह एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है। यह इसमें शामिल होने वाली हर नई आवाज के साथ प्रबल होता रहता है। कानूनी पेशे में अलग-अलग पृष्ठभूमि से पहली पीढ़ी के वकीलों का प्रवेश और महिलाओं का प्रतिनिधित्व समावाशी समाज की दिशा में कदम है, जो काफी महत्वपूर्ण है। यह देश में एक संदेश देता है कि अब स्थिति असल में बदल गई है।
नैतिक प्रवचन को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक
जस्टिस कोहली ने कानूनी विरासत वाले परिवारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब नए पेड़ों की हवाएं चलती हैं तो वह ज्यादा नई और ताजी लगती है। अलग-अलग समाज से आने वाले पहली पीढ़ी के वकीलों के साथ एक नया दृष्टिकोण भी आता है। कानूनी समुदाय के भीतर एक नैतिक प्रवचन को प्रोत्साहित करने के लिए यह आवश्यक है।
विज्ञापन
महिलाएं मल्टीटास्किंग होती है
कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी पर कोहली ने कहा कि यह सिर्फ गिनती का मामला नहीं है। असल में यह कानूनी परिदृश्य में एक बुनियादी बदलाव का प्रतीक है। यह ईमानदार सोच के विकास के लिए सकारात्मक कदम है। आमतौर पर महिलाएं मल्टी टास्किंग होती हैं। इसी कौशल के कारण वह नए अनुभव और दृष्टिकोण लाती हैं। इससे विचारों की समझ बढ़ती है। कानूनी पेशे में महिलाओं और पहली पीढ़ी के वकीलों की बढ़ती भागिदारिता के कारण परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है।
विज्ञापन
देश में बदल गई स्थिति
जस्टिस हिमा कोहली शनिवार को फोर्ब्स इंडिया-लीगल पावर लिस्ट 2022 के समापन समारोह में पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय कानूनी पेशा अब अलग-अलग दायरे में नहीं चलता। यह एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है। यह इसमें शामिल होने वाली हर नई आवाज के साथ प्रबल होता रहता है। कानूनी पेशे में अलग-अलग पृष्ठभूमि से पहली पीढ़ी के वकीलों का प्रवेश और महिलाओं का प्रतिनिधित्व समावाशी समाज की दिशा में कदम है, जो काफी महत्वपूर्ण है। यह देश में एक संदेश देता है कि अब स्थिति असल में बदल गई है।
विज्ञापन
नैतिक प्रवचन को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक
जस्टिस कोहली ने कानूनी विरासत वाले परिवारों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब नए पेड़ों की हवाएं चलती हैं तो वह ज्यादा नई और ताजी लगती है। अलग-अलग समाज से आने वाले पहली पीढ़ी के वकीलों के साथ एक नया दृष्टिकोण भी आता है। कानूनी समुदाय के भीतर एक नैतिक प्रवचन को प्रोत्साहित करने के लिए यह आवश्यक है।
विज्ञापन
महिलाएं मल्टीटास्किंग होती है
कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी पर कोहली ने कहा कि यह सिर्फ गिनती का मामला नहीं है। असल में यह कानूनी परिदृश्य में एक बुनियादी बदलाव का प्रतीक है। यह ईमानदार सोच के विकास के लिए सकारात्मक कदम है। आमतौर पर महिलाएं मल्टी टास्किंग होती हैं। इसी कौशल के कारण वह नए अनुभव और दृष्टिकोण लाती हैं। इससे विचारों की समझ बढ़ती है। कानूनी पेशे में महिलाओं और पहली पीढ़ी के वकीलों की बढ़ती भागिदारिता के कारण परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है।