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जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र, जस्टिस केएम जोसेफ का नाम फिर भेजें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 10 May 2018 05:47 PM IST
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जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस जे चेलमेश्वर ने शीर्ष अदालत के लिए जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सरकार के पास भेजने और इसके लिए कॉलेजियम की बैठक जल्द बुलाए जाने की मांग की है।
इस बाबत चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि 10 जनवरी को जिन परिस्थितियों में कॉलेजियम द्वारा उत्तराखंड के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की गई थी उनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए, उनके नाम को पुनर्विचार के लिए भेजा जाए।
शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार शाम को भेजे गए इस पत्र में जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस जोसेफ के नाम पर आपत्ति करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा उठाए गए सभी सवालों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब भी दिया है। बता दें कि 10 जनवरी को कॉलेजियम द्वारा भेजी गई अनुशंसा को खारिज करते हुए 26 अप्रैल को प्रसाद ने कहा था कि जस्टिस जोसेफ से सीनियर कई जज है, इसलिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाना उचित नहीं होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि जस्टिस जोसेफ जिस केरल राज्य के रहने वाले है, उसकी शीर्ष अदालत में पहले से ही पर्याप्त नुमाइंदगी है। इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट में कई राज्यों का और अनुसूचित जातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
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इस बाबत चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि 10 जनवरी को जिन परिस्थितियों में कॉलेजियम द्वारा उत्तराखंड के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की गई थी उनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए, उनके नाम को पुनर्विचार के लिए भेजा जाए।
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शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार शाम को भेजे गए इस पत्र में जस्टिस चेलमेश्वर ने जस्टिस जोसेफ के नाम पर आपत्ति करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा उठाए गए सभी सवालों का सिलसिलेवार ढंग से जवाब भी दिया है। बता दें कि 10 जनवरी को कॉलेजियम द्वारा भेजी गई अनुशंसा को खारिज करते हुए 26 अप्रैल को प्रसाद ने कहा था कि जस्टिस जोसेफ से सीनियर कई जज है, इसलिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाना उचित नहीं होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि जस्टिस जोसेफ जिस केरल राज्य के रहने वाले है, उसकी शीर्ष अदालत में पहले से ही पर्याप्त नुमाइंदगी है। इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट में कई राज्यों का और अनुसूचित जातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
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एक और जज पक्ष में
एक और जज पक्ष में
इससे पहले पिछले हफ्ते केरल दौरे में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ भी जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सरकार के पास भेजे जाने का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने नाम वापसी पर चिंता जताते हुए कहा था कि अब वह सब हो रहा है, जो कभी नहीं हुआ और कभी नहीं होना चाहिए था।
बुधवार को नहीं हो पाई बैठक
सरकार द्वारा जस्टिस जोसेफ का नाम वापस किए जाने के बाद कॉलेजियम की एक बैठक हुई थी लेकिन उसमें कोई फैसला नहीं हुआ था। इसके बाद बुधवार को भी एक बैठक होने वाली थी, लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर के अवकाश पर रहने के कारण आयोजित नहीं हो सकी।
अगली बैठक की तारीख तय करना चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है। बता दें कि कॉलेजियम में चीफ जस्टिस और जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं।
इससे पहले पिछले हफ्ते केरल दौरे में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ भी जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सरकार के पास भेजे जाने का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने नाम वापसी पर चिंता जताते हुए कहा था कि अब वह सब हो रहा है, जो कभी नहीं हुआ और कभी नहीं होना चाहिए था।
बुधवार को नहीं हो पाई बैठक
सरकार द्वारा जस्टिस जोसेफ का नाम वापस किए जाने के बाद कॉलेजियम की एक बैठक हुई थी लेकिन उसमें कोई फैसला नहीं हुआ था। इसके बाद बुधवार को भी एक बैठक होने वाली थी, लेकिन जस्टिस चेलमेश्वर के अवकाश पर रहने के कारण आयोजित नहीं हो सकी।
अगली बैठक की तारीख तय करना चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है। बता दें कि कॉलेजियम में चीफ जस्टिस और जस्टिस चेलमेश्वर के अलावा जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं।