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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, न्यायिक मजिस्ट्रेट आरोपियों को आवाज के नमूने देने का निर्देश दे सकेंगे
Fri, 02 Aug 2019 01:42 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 02 Aug 2019 01:42 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने शुक्रवार को एक आदेश में कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेटों को आपराधिक मामलों के आरोपियों को जांच के दौरान आवाज के नमूने एजेंसियों को देने का आदेश करने का अधिकार है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में ये प्रावधान नहीं हैं जो न्यायिक मजिस्ट्रेट को लंबित जांच में आरोपी को आवाज के नमूने मुहैया कराके जांच एजेंसियों के साथ सहयोग का निर्देश देने की अनुमति देता हो। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस भी इस पीठ के सदस्य हैं।
पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपराधिक मामलों के आरोपियों को उचित जांच के लिए अपनी आवाज के नमूने सौंपने का आदेश देने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेटों को दे रही है। अभी तक आरोपी जांच एजेंसियों को अपनी आवाज के नमूने देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं थे।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में ये प्रावधान नहीं हैं जो न्यायिक मजिस्ट्रेट को लंबित जांच में आरोपी को आवाज के नमूने मुहैया कराके जांच एजेंसियों के साथ सहयोग का निर्देश देने की अनुमति देता हो। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस भी इस पीठ के सदस्य हैं।
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पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपराधिक मामलों के आरोपियों को उचित जांच के लिए अपनी आवाज के नमूने सौंपने का आदेश देने का अधिकार न्यायिक मजिस्ट्रेटों को दे रही है। अभी तक आरोपी जांच एजेंसियों को अपनी आवाज के नमूने देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं थे।
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