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डिजिटल युग में न्याय करना है तनाव भरा काम : जस्टिस सीकरी
Mon, 11 Feb 2019 02:49 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Mon, 11 Feb 2019 02:49 AM IST
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justice ak sikri
- फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी का कहना है कि डिजिटल युग में न्याय करना ‘तनाव भरा’ काम है। किसी भी मामले की कोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले ही लोग सोशल मीडिया पर बहस करने लगते हैं कि इसका क्या फैसला आना चाहिए? इसका जजों पर असर पड़ता है।
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जस्टिस सीकरी ने लॉ एसोसिएशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (लॉएशिया) के पहले सम्मेलन में ‘डिजिटल युग में प्रेस की स्वतंत्रता’ पर बोलते हुए रविवार को कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता नागरिक व मानवाधिकार की रूपरेखा और कसौटी बदल रही है। मीडिया ट्रायल का मौजूदा रुझान इसकी मिसाल है। पहले भी मीडिया ट्रायल होता था, लेकिन आज याचिका दायर होते ही लोग फैसले को लेकर बहस करने लगते हैं। लोग बताने लगते हैं कि फैसला क्या होना चाहिए।
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जस्टिस सीकरी ने कहा, उनका खुद का अनुभव है कि जज पर इसका प्रभाव पड़ता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते-पहुंचते जज काफी परिपक्व हो जाते हैं। उन्हें पता होता है कि मीडिया में कुछ भी होता रहे, उन्हें कानून के आधार पर फैसला कैसे करना है।
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जस्टिस सीकरी के मुताबिक, कुछ साल पहले तक धारणा थी कि लोगों को सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या निचली अदालत के फैसले की आलोचना का पूरा अधिकार है। अब लोग फैसला सुनाने वाले जज को भी बदनाम करते हैं। यहां तक कि उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की जाती है।