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जेपी दिवालिया मामला: अपनी बोली खारिज करने के फैसले को एनबीसीसी सुप्रीम कोर्ट में दे सकती है चुनौती
Sat, 22 May 2021 04:16 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 22 May 2021 04:16 AM IST
सार
- सूत्रों का कहना है कि एनबीसीसी इस फैसले को दुराग्रही मानते हुए कानूनी सलाह ले रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनी इस निर्णय के खिलाफ पहले अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) अनुज जैन और सीओसी को लिखित में अपनी आपत्ति सौंपने की तैयारी कर रही है
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- फोटो : PTI
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विस्तार
जेपी इंफ्राटेक का अधिग्रहण करने के लिए क्रेडिटर्स पैनल की तरफ से अपनी बोली खारिज करने के फैसले को एनबीसीसी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। कर्जदाता समूहों की समिति (सीओसी) ने सरकारी हिस्सेदारी वाली एनबीसीसी के प्रस्ताव को दिवालिया कानून के कुछ खास प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाने पर खारिज कर दिया था।
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सूत्रों का कहना है कि एनबीसीसी इस फैसले को दुराग्रही मानते हुए कानूनी सलाह ले रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के कंपनी इस निर्णय के खिलाफ पहले अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) अनुज जैन और सीओसी को लिखित में अपनी आपत्ति सौंपने की तैयारी कर रही है।
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बता दें कि एनबीसीसी की योजना को 2019 के आखिरी महीनों और 2020 के शुरुआती महीनों में बोली प्रक्रिया के तीसरे दौर के दौरान सीओसी और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने हरी झंडी दे दी थी।
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लेकिन गत बुधवार को जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) की दिवालिया प्रक्रिया के चौथे दौर में उसे अधिग्रहण करने के लिए एनबीसीसी और सुरक्षा समूह ने अपनी-अपनी निर्णायक समाधान योजना दाखिल की थी। सीओसी ने बृहस्पतिवार को सुरक्षा समूह के प्रस्ताव पर अगले सप्ताह मतदान प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया था, जबकि एनबीसीसी की बोली को खारिज कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, एनबीसीसी के प्रस्ताव को दिवालिया कानून के अनुरूप नहीं मानते हुए सीओसी ने उसे मतदान प्रक्रिया में शामिल नहीं करने का निर्णय लिया था।
एक रेगुलेटरी फाइलिंग में जेआईएल ने स्वीकार किया है कि सीओसी ने 20 मई को बैठक के दौरान सुरक्षा रियल्टिी लिमिटेड का लक्षद्वीप इंवेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर दाखिल की गई समाधान योजना पर मतदान कराने का निर्णय लिया है।
यह ई-वोटिंग 24 मई को शुरू होकर 27 मई को बंद होगी। सूत्रों का कहना है कि कुछ कर्जदाता बैंक एनबीसीसी के प्रस्ताव को मतदान के लिए रखने के पक्ष में थे, लेकिन सीओसी ने बहुमत के साथ इसे नकार दिया। अब एनबीसीसी इस निर्णय को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।