रैगिंग के दायरे में आएंगे सरदारों पर बनने वाले जोक्स!
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अगर किसी छात्र को ऐसे चुटकुलों के जरिए चिढ़ाया जाता है जो सरदारों पर बने हैं और उससे उनका मनोबल गिरता है तो ऐसे जोक्स रैगिंग के दायरे में आएंगे। पूर्व सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष एचएस बेदी की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस तरह का सुझाव दिया है।
समिति ने ये भी कहा है कि सरदारों पर चुटकुले बनाने वाली और उन्हें प्रसारित करने वाली वेबसाइट्स, प्रिंट इलैक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी रोक लगनी चाहिए। इसके अलावा अगर कोई मीडिया आउटलेट इस तरह की सामग्री प्रचारित करता है या ऐसे जोक्स को फैलाता है तो उसका लाइसेंस भी रद्द होना चाहिए।
समिति का ये भी सुझाव है कि अगर किसी फिल्म में नस्लीय भेदभाव वाला कंटेंट मौजूद हो तो उसे भी प्रसारित करने पर रोक लगनी चाहिए।
सिख संप्रदाय की अस्मिता का हनन
जस्टिस बेदी समिति ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सौंपते हुए कुछ दिशा-निर्देशों का सुझाव दिया है। समिति दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा गठित की गई थी। ये दिशा-निर्देश प्राथमिक विद्यालयों, कॉलेजों और काम करने वाली जगहों पर नस्लीय भेदभाव करने वाले चुटकुलों और टिप्पणियों से बचाव के लिए दिए गए हैं।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर के सम्मुख दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी और अभियोजन पक्ष के वकील हरविंदर चौधरी ने सोशल मीडिया और स्कूलों में इस तरह के चुटुकुलों पर रोक लगाने की बात कही। समिति ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के चुटकुले सिख संप्रदाय की अस्मिता का हनन करता है।
इससे पहले भी संता-बंता पर बनने वाले चुटकुलों को लेकर खासा बवाल मचा था, और मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था।