विवादों के इतर जेएनयू की है खास पहचान, सपनों की उड़ान को यहां मिलते हैं पंख
- जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी सिर्फ विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि आइडिया और अवधारणा है
- जानिए : ऐसे ही नहीं बनता कोई जेएनयू
- गरीबों के सपनों की उड़ान के पंख हैं जेएनयू
- अकादमिक अनुसंधान में मील का पत्थर है जेएनयू
- कैंपस से करियर तक: जानिए जेएनयू के छात्रों का सफर
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विस्तार
अमेरिका की हार्वर्ड यूर्निवर्सिटी की तर्ज पर बनाए गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की अवधारणा के केंद्र में उत्कृष्टता, रचनात्मकता और बौद्धिकता की अनवरत तलाश है। इसमें रोमांच, प्रयोगधर्मिता और विषय की तह में जाने की जिद और छटपटाहट है। इसी वजह से यहां ऐसी फिजा का सृजन होता है जिसमें गहन मानवीय चिंतन हमारी सामान्य विचार प्रक्रिया बन जाता है और सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक जीवन मूल्य और वैज्ञानिक सोच हमारी संस्कृति। यह परिदृश्य सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक समस्याओं के वैज्ञानिक और सम्यक समाधान की तरफ ले जाता है। आइए हम जानते हैं जेएनयू के बारे में और यह भी कि आखिर कहां से निकलती है इसकी धारा और कहां तक जाती है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय संक्षेप में इसका परिचय है जेएनयू
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को संक्षेप में जेएनयू कहते हैं, जो एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। नई दिल्ली के दक्षिणी भाग में इसका परिसर है।
जेएनयू मानविकी, समाज विज्ञान, विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन आदि विषयों में उच्च स्तर की शिक्षा और शोध कार्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी गिनती भारत के अग्रणी संस्थानों में की जाती है। जुलाई 2012 में जेएनयू को समस्त मानकों में भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय माना गया था।
NACC ने जेएनयू विश्वविद्यालय को 4 में से 3.9 ग्रेड दिया है, जो कि अब तक देश में किसी भी शैक्षिक संस्थान को दिया गया उच्चतम ग्रेड है।
परिचय
- स्थापित: 1969
- केन्द्रीय विश्वविद्यालय
- कुलाधिपति: कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन
- कुलपति: ममिडला जगदेश कुमार
- विद्यार्थी संख्या: 8,500
- स्थान : नई दिल्ली, भारत
- उपनाम: जेएनयू
- सम्बन्धन: यूजीसी
- साइट : www.jnu.ac.in
- जेएनयू का कैंपस करीब 1100 एकड़ में फैला हुआ है
- कैंपस के अंतर्गत एक बहुमंजिला लाइब्रेरी है जो देश की श्रेष्ठ लाइब्रेरी की श्रेणी में गिनी जाती है।
जेएनयू कैंपस में करीब 18 हॉस्टल हैं जिनमें से 8 हॉस्टल लड़कों के लिए, 4 लड़कियों के लिए और अन्य 4 हॉस्टल लड़कों- लड़कियों दोनों के लिए हैं।
एक वर्किंग वुमन हॉस्टल
एक विवाहित जोड़ों के लिए।
जेएनयू के हॉस्टल सुविधा और किराएं की सहूलियत को लेकर काफी अच्छे हैं। एक सीटर कमरे का मासिक किराया 300 और टू सीटर कमरे का मासिक किराया 150 रुपए है। जेएनयू हॉस्टल अपने आप में सबसे बड़े छात्रावास में शामिल है।
ब्रह्मपुत्र (लड़कों), 386
चन्द्रभागा (लड़कों और लड़कियों), 204
गंगा (लड़कियों), 342
गोदावरी (लड़कियों), 344
झेलम (लड़कों), 307
कावेरी (लड़कों), 343
कोयना (लड़कियों), 544
लोहित (लड़कों और लड़कियों), 303
माही / Mandavi (लड़कों), 349
महानदी (MRSH) (शादीशुदा), 86
नर्मदा (लड़कों), 208
पेरियार (लड़कों), 359
साबरमती (लड़कों और लड़कियों), 263
शिप्रा (लड़कियों), 544
सतलुज (लड़कों), 341
ताप्ती (लड़कों और लड़कियों), 386
यमुना (कामकाजी महिलाओं), 191
कुल मिलकर हॉस्टल की क्षमता लगभग 5500 छात्र- छात्राओं की है।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU): सुविधा और क्षमता
- जेएनयू की एनआईआरएफ रैंकिंग 2 है।
- हॉस्टल फीस (रुपये में)
- पहले - सिंगल बेड के लिए 2,740 और डबल बेड के लिए 2,620
- अब - सिंगल बेड 11,400 और डबल बेड 7,800
- मेस डिपोजिट (रिफंडेबल) - 5,500
- मेस बिल प्रति माह - 2,500
पानी व बिजली का बिल इसके अलावा जोड़ा गया है, जो पहले नहीं था।
जेएनयू का उद्देश्य
जेएनयू संस्था नहीं विचार है,
13 दिसंबर 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अपने भाषण में लोगों को संबोधित करते हुए कहा था,"किसी भी विश्वविद्यालय का उद्देश्य मानवता, सहनशीलता, तर्कशीलता, चिंतन प्रक्रिया और सत्य की खोज की भावना को स्थापित करना होता है"
जवाहर लाल नेहरू
- जेएनयू का उद्देश्य रहा है- अध्ययन, अनुसंधान और अपने समस्त जीवन के प्रभाव द्वारा ज्ञान का प्रसार करना।
- जेएनयू का मकसद जवाहरलाल नेहरू ने जिन सिद्धान्तों पर जीवन-पर्यंन्त काम किया, उनके विकास के लिए प्रयास करना है।
- जेएनयू की नींव विचार पर रखी गई थी और फिर इसने एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में अपने आप को स्थापित किया। इससे शिक्षा प्राप्त करके निकले छात्रों ने देश विदेश में बहुत नाम अर्जित किया,
- उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री, नौकरशाह या फिर फिल्मी दुनिया में अपने हुनर की पहचान बिखेरना हो, मंत्री से संत्री तक और देश विदेश तक अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं।
- अनिल कुमार गुप्ता (उपराष्ट्रपति आरिसेंट) से लेकर मुकुल शर्मा ( कैप जेमिनी अमेरिका एलएलसी, शिकागो ) तक जेएनयू के पूर्व छात्र रहे हैं।
कैंपस से करियर तक: जानिए जेएनयू के छात्रों का सफर
जेएनयू : शोध छात्र से लेकर डिप्लोमैट जयशंकर तक
सुब्रमण्यम जयशंकर
सुब्रमण्यम जयशंकर ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। जयशंकर ने राजनीति विज्ञान में एमफिल किया है और फिर जेएनयू से पीएचडी की उपाधि ली। सुब्रमण्यम जयशंकर को परमाणु कूटनीति में विशेषज्ञता हासिल है।विदेश सेवा के 1977 बैच के अधिकारी रहे हैं। जयशंकर की पहली पोस्टिंग रूस के भारतीय दूतावास में थी। सुब्रमण्यम जयशंकर ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। जयशंकर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा के प्रेस सचिव भी रह चुके हैं।
वे विदेश मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पद पर भी रहे हैं। सुब्रमण्यम जयशंकर अमेरिका में भारत के प्रथम सचिव भी रहे हैं। वे पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भी हैं।
निर्मला सीतारामन: एमफिल छात्रा से केंद्रीय मंत्री तक
निर्मला सीतारमण
- वर्तमान में भारत की वित्त मंत्री।
- स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के बाद भारत के रक्षा मंत्रालय की कमान संभालने वाली दूसरी महिला नेता हैं और स्वतंत्र रूप से पहली पूर्णकालिक महिला रक्षामंत्री बनी हैं।
- 2003 से 2005 तक निर्मला सीतारमण राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या रह चुकी हैं।
- 3 सितंबर 2017 तक भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता के साथ-साथ भारत की वाणिज्य और उद्योग (स्वतंत्र प्रभार) तथा वित्त व कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री रही हैं।
- 3 सितंबर 2017 को श्री नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया।
- 1980 में निर्मला सीतारमण ने सीतालक्ष्मी रामास्वामि कॉलेज, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु से स्नातक की शिक्षा पूर्ण की।
- निर्मला सीतारमण ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विषय में एमफिल किया है।
अभिजीत बनर्जी : जेएनयू के छात्र से लेकर नोबल पुरुस्कार विजेता तक
अभिजीत बनर्जी
- अपने कैंपस के दिनों को याद करते हुए नोबल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने लिखा है -
- 2016 में एक लेख में उन्होंने ये भी बताया था कि,
"उन्हें किस तरह से 1983 में अपने दोस्तों के साथ तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था, तब जेएनयू के वाइस चांसलर को इन छात्रों से अपनी जान को ख़तरा हुआ था अपने आलेख में उन्होंने लिखा था, और हुआ ये था कि एक बार जेएनयू के तत्कालीन वाइस चांसलर पीएन श्रीवास्तव का विरोध करने के बाद छात्रों के घेराव करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था और तिहाड़ जेल में भेज दिया गया।
जेएनयू: हर रंग चढ़ता और उतरता है
जब जेएनयू ने किया इंदिरा गांधी का विरोध
सत्तर के दशक का समय था आपातकाल घोषित हुआ इसी दौरान जेएनयू तत्कालीन सरकार विरोध में आगे रहा और जेएनयू कैंपस से निकले सीताराम येचुरी और प्रकाश करात ने वामपंथी राजनीति में अपना कमाया और देश की राजनीति में अपनी जगह बनाई।जेएनयू के पर्चे पर जब इंदिरा गांधी ने इस्तीफा दे दिया
आपातकाल का एक मशहूर किस्सा है कि, जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं तो सीताराम येचुरी के नेतृत्व में जेएनयू से छात्रों का एक दल इंदिरा गांधी से मुलाकात करने के लिए गया और उनके सामने एक पर्चा पढ़ा जिसमें लिखा था कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए आपातकाल के दौरान क्या क्या गलत हुआ। और यहां पर छात्रों की मांग थी कि वो जेएनयू के चांसलर पद से तुरंत इस्तीफा दें और इसके चलते इंदिरा गांधी ने बाद में इस्तीफा भी दे दिया था।
खुलकर बोलने की आजादी और जेएनयू के छात्र चुनाव
- जेएनयू के छात्र चुनाव अपने आप में यूनिक होते है और ये चुनाव खुद छात्र ही करवाते हैं।
- कैंपस के छात्र मिलकर ही एक चुनाव समिति बनाते हैं।
- जो चुनाव की रणनीति और चुनावी प्रक्रिया तय करते हैं।
- चुनावों में खुलकर बहस होती है।
- करीब सारे बैनर पोस्टर हाथ से बनाए जाते हैं, छपवा कर पोस्टर बैनर लगाने का चलन नहीं है और यही बात चुनावों को अलग बनती हैं।
अजब गजब है कैंपस
यहां के छात्र नेता आज राजनीतिक दलों में भी सक्रिय रहे हैं। जेएनयू को अक्सर वामपंथी विचारधारा का माना जाता हैं, मगर 2001 में हुए चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संदीप महापात्र ने मात्र एक वोट से चुनाव जीता लिया था।
हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसा है जेएनयू
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की खास छात्रवृतियाँ और सदस्यता व्यवस्था
जेएनयू में मिलने वाली छात्रवृति
- ओकिता मेमोरियल सदस्यता
- जी. पार्थसारथी वृत्ति सदस्यता
- ऑस्ट्रेलियाई उच्च आयोग सदस्यता
- पीएच छात्रों के लिए विशेष सदस्यता
- यूजीसी-सीएसआईआर कनिष्ठ शोध सदस्यता
- फोर्ड फाउंडेशन छात्रवृतियां
- योग्यता-बनाम-साधन छात्रवृति
- जी. पार्थसारथी वृत्ति सदस्यता
- ऑस्ट्रेलियाई उच्च आयोग सदस्यता
- तेंदुलकर छात्रवृति
- प्रो. नुरुल हसन छात्रवृति
- प्रो. एम.जे.के थावराज एमसीएम छात्रवृति
- निप्पोन फाउंडेशन (जापान)
- कोरिया फाउंडेशन (कोरिया)
- येल विश्वविद्यालय की फॉक्स अंतर्राष्ट्रीय सदस्यता
- स्वामी प्रणवानंद मेमोरियल शोध सदस्यता
- डी एस गर्दी संस्कृत सदस्यताएँ
- डॉ. प्रफुल्ला के. पनी शोध सदस्यता
- पोस्को सदस्यता
- प्रो. गौरी शंकर सिंगला मेरिट सदस्यता
सियासत, राजनीति से अलग भी हैं जेएनयू
द गंगा ढाबा: नेताओं की पाठशाला
धरना प्रदर्शन और विरोध के अलावा भी जेएनयू की एक तस्वीर हैं, जिसमें नेतृत्व हैं , देश भक्ति है और कुछ कर गुजरने का जज्बा भी। जेएनयू के चाय ढाबे उसको एक अलग पहचान देते हैं, जहां चर्चा भी होती है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर जमकर बहस भी। टेफलस कैंटीन से लेकर द गंगा ढाबा, जेएनयू को औरों से अलग बनता है।
कुछ ऐसी गुरुदक्षिणा भी देते है जेएनयू के छात्र
हर शिक्षक को ऐसे ही शिष्य की गुरुदक्षिणा का इंतजार रहता है।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान प्रो. मुखर्जी ने कहा, "गंगा ढाबा उस जमाने में भी उतना ही छात्रों और शिक्षकों को पसंद था, जितना आज। इसलिए उन दिनों भी हमारे विभाग के छात्र वहां जाकर देश-दुनिया के हर मुद्दे पर बात करते थे। इसमें अभिजीत भी शामिल था। "
अभिजीत को नोबेल मिला और मशहूर मैं हो गया...
जेएनयू की पहचान ये भी है, और इस पहचान को कुछ लोगों के चलते मिटने नहीं देना चाहिए।
मुखर्जी कहते हैं कि हर कोई मेरी बात जानना चाहता है कि मैं क्या सोचता हूं। बस इतना कि हर शिक्षक को ऐसे ही शिष्य की गुरुदक्षिणा का इंतजार रहता है। मेरा कोई खास रोल नहीं है, लेकिन मेरा नाम अभिजीत के खास प्रोफेसर के रूप में जुड़ गया।
एक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय निर्मला सीतारमन और सुब्रह्मण्यम जयशंकर का भी है
जिसके तहत लिखा जाता है कि, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर को जेएनयू के प्रतिष्ठित एल्यूमनाई अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। जेएनयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अगस्त में होने वाले तीसरे दीक्षांत समारोह में इन दोनों को सम्मानित किया जाएगा।
कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार के मुताबिक, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज और स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्ट्डीज से एमए और एमफिल की है। जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्ट्डीज से एमफिल और पीएचडी की पढ़ाई की है। उनके शोध का विषय न्यूक्लियर डिप्लोमेसी था।
जेएनयू जहा है अटल मैनेजमेंट
जेएनयू में जवाहलाल भी हैं और अटल बिहारी वाजपेयी भी
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड इंटरप्रिंयोरशिप का नाम अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड इंटरप्रिंयोरशिप के नाम से जाना जाता है। 2018 में यह फैसला जेएनयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में लिया गया था।
जेएनयू कैंपस हैं क्लबों की नगरी
- माउंटेरियन एंड ट्रैकिंग क्लब
- नेचर एंड वाइल्ड लाइफ
- फोटोग्राफी
- यूनेस्को
- योग
- वेलनेस
- फाइन आर्ट
जानिए : ऐसे ही नहीं बनता जेएनयू
- जेएनयू की स्थापना संसद के एक एक्ट से हुई मगर मकसद था देश के सुदूर इलाकों से भी विद्यार्थी आकर शिक्षा प्राप्त करें और अपने सपनों को पूरा करें।
- जेएनयू पूरे भारत में सोशल साइंस के मल्टी डिसीप्लिनरी रिसर्च का एकमात्र संस्थान है और दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- जेएनयू यूनिवर्सिटी में अनेक विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। अंडर ग्रैजुएट कोर्स केवल विदेशी भाषाओं में ही होते हैं, अन्य सारे कोर्स मास्टर्स से शुरू होते हैं।
- मिलता हैं देश के सैनिक को प्रमाण: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के सैनिकों को सर्टिफिकेट जेएनयू से ही मिलता हैं।
- अपने काम से नाम अर्जित करते हैं : हर वर्ष जेएनयू के छात्र छात्राएं अच्छी तादात में लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, हैदराबाद पुलिस अकादमी और विदेश सेवाओं में जाते हैं और आईएएस, आईपीएस आईएफएस बनकर अपने काम से नाम अर्जित करते हैं।
जेएनयू के प्रतीक चिन्ह का अर्थ
जेएनयू के प्रतिक को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो इसका अर्थ स्पष्ट होगा।
- इसमें प्रतीकात्मक रूप में जेएनयू लिखा है।
- बीच में जो आकृति है वह एक दीया है।
- जिसका अर्थ है ज्ञान का दीपक।
गरीबों के सपनों की उड़ान के पंख हैं जेएनयू
अकादमिक अनुसंधान में मील का पत्थर है जेएनयू
जेएनयू का नाम अगर आप दुनिया के किसी भी हिस्से में लेंगे तो लोग उससे विश्व मानचित्र पर पहचानेंगे और आपको बात रखने का मौका भी प्रदान देंगे, कुछ टुकड़े टुकड़े गैंग के चलते हम इसको देशद्रोही के रूप में परिभाषित नहीं कर सकते हैं, क्योंकि जेएनयू में इन चंद लोगों के अलावा भी ऐसे जेएनयू के विद्यार्थी है जिन्होंने अपने काम से देश को गर्व महसूस कराया है।
असली जेएनयू ये भी है
'भारत तेरे टुकड़ें होंगे' भारत की बर्बादी तक, जंग लड़ेंगे, जंग लड़ेगे, 'कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा' और 'पाकिस्तान जिंदाबाद' जैसे विवादास्पद नारेबाजी कुछ लोगों की मंशा, षड्यंत्र और मानसिक विकलांगता हो सकती है मगर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से निकलें छात्रों ने भारत की एकता, अखंडता और सौहार्द के लिए तन मन से अपना जीवन समर्पित भी किया है।
सैंकड़ों देशविरोधी नारें लगाने वाली जुबानों पर भारी है निर्मला सीतारमण, अभिजीत बनर्जी और सुब्रमण्यम जयशंकर जैसे चेहरे और जेेएनयू की शिक्षा प्रणाली।
असली जेएनयू ये भी है......