'बेरोजगारी के कारण बढ़ रही है सड़कों पर कांवड़ियों की संख्या'
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जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) नेता शरद यादव अपने एक बयान को लेकर विवाद में है। मोदी सरकार को घरने के लिए उन्होंने जो बोला वो खुद यादव के लिए मुसीबत बन गया है। दरअसल शरद यादव ने कानपुर में मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर रोजगार होता तो कांवड़ियों की इतनी बड़ी तादाद सड़कों पर न होती। उन्होंने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, 'युवाओं को रोजगार देने का वादा कर बीजेपी सत्ता में आई, लेकिन वह ये वादा पूरा नहीं कर सकी। इसकी मिसाल है हाल ही में सड़कों पर निकले लाखों कांवड़िए।'
उन्होंने सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं को भी एक बड़ी समस्या बताया। शरद यादव के इस बयान के बाद वो लोगों के निशाने पर आ गए। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर जगह शरद यादव के बयान की आलोचना हो रही है।
धर्मगुरुओं ने किया शरद यादव का विरोध
कानपुर में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि वो इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सपा या भाजपा से गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि समय आने पर बता दिया जाएगा कि किस पार्टी से गठबंधन करना है। शरद यादव के कांबड़ियों पर दिए बयान से शिव भक्तों के साथ ही धर्मगुरु भी नाराज हैं।
सुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्र नंद, अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरि और आत्मानंद ब्रह्मचारी, हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणी ने शरद यादव के इस बयान को लेकर नाराजगी जताई है। सावन के महीने में लाखों का संख्या में शिव भक्त कांवड़ ले जाते हैं। यह लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है, शरद यादव का यह बयान उन्हें बुरी तरह मुसीबत में डाल सकता है।