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जाटों ने बदली रणनीति, अब महिलाएं आएंगी मोर्चे पर

Thu, 23 Feb 2017 12:29 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 23 Feb 2017 12:29 PM IST
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Jat reservation: Jat has changed their strategy, now women come in front

हरियाणा के रोहतक के पास जशिया गांव में लोगों का हुजूम इकट्ठा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, भीड़ बढ़ती जा रही है। दूर-दराज के इलाकों से ट्रैक्टर में भर-भर कर लोग जशिया आ रहे हैं। ये सभी लोग जाट समुदाय से हैं जो पिछले 25 दिनों से आरक्षण की मांग को लेकर यहां धरना दे रहे हैं।

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ठीक एक साल पहले फरवरी माह में पूरे हरियाणा में आरक्षण के लिए जाटों के आंदोलन के दौरान कई दिनों तक हिंसा चलती रही। इस हिंसा में 31 लोग मारे गए थे और इस दौरान हुई आगजनी और लूटपाट की घटनाओं में लोगों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा।
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अब अपनी आरक्षण की मांग के साथ-साथ जाट समुदाय के लोग हिंसा के दौरान मारे गए अपने लोगों के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं। वैसे तो यह आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण ही है मगर रोज आकर धरना दे रहे लोगों ने अब अपने तेवर तल्ख करने शुरू कर दिए हैं।
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जाट आरक्षण आंदोलन समिति के बैनर तले चलाया जा रहा आंदोलन शुरू तो हरियाणा से हुआ था, मगर अब यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होता हुआ दिल्ली में दस्तक दे रहा है। आंदोलन के 25 वें दिन आंदोलनकारियों का गुस्सा सरकार से ज्यादा मीडिया पर नजर आया जिन पर उन्होंने एकतरफा खबरें देने का आरोप लगाया।

जाट बिरादरी को बदनाम करने की चल रहा ही है साजिश

Jat reservation: Jat has changed their strategy, now women come in front
जाट नेता किशनलाल हूडा कहते हैं कि सरकार ने पिछले साल आश्वासन दिया था कि फरवरी की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा जो नहीं हुआ। उनका कहना था कि जाट बिरादरी को आरक्षण देने के मामले में भी हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार 'ढुलमुल' रवैया अपना रही हैं।

उन्होंने कहा, "हमारे आक्रोश का कारण भी यही है। हमने अब तक शांतिपूर्ण आंदोलन ही चलाया है मगर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।" पिछली बार आंदोलन में महिलाएं कहीं नजर नहीं आ रही थीं। मगर इस बार जाट आरक्षण आंदोलन समिति ने अपनी रणनीति बदलते हुए सभी धरनास्थलों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की है।

आंदोलन में हिस्सा लेने वाली एक महिला हैं मीना मकरौली जो जशिया के पास ही रहती हैं। मीना को नाराजगी है कि उनका आन्दोलन पिछले 25 दिनों से चल रहा है मगर सरकार के किसी प्रतिनिधि ने आकर उनसे बात नहीं की है। वो कहती हैं, "इतने लोग सड़कों पर कई दिनों से हैं। मगर सरकार को तो परवाह ही नहीं है।

क्या ये अधिकारी और नेता सिर्फ़ एसी ऑफिसों में ही बैठने के लिए हैं। जाट बिरादरी को बदनाम करने की साजिश चल रही है जबकि हमारे साथ 36 जातियों का समर्थन है। हम सबको साथ लेकर चल रहे हैं मगर कुछ नेता हमें देशद्रोही तक कहने से बाज नहीं आ रहे हैं।"

 

पिछले 25 दिनों से इन्हे मिल रहीं हैं धमकियां

Jat reservation: Jat has changed their strategy, now women come in front
गढौली गांव की रहने वाली राजकली कहती हैं कि इस बार आंदोलन में महिलाएं ही आगे बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। वो कहती हैं कि इस बार महिलाओं ने ठान ली है कि जब तक सरकार आरक्षण देने के लिए तैयार नहीं हो जाती है, वो सड़कों पर ही डटी रहेंगी।

इनमें सुपरा चौक के वो दुकानदार भी हैं जिनकी दुकानों को उनके सामने लूटकर आग के हवाले कर दिया गया था। बाजार के प्रधान धर्मवीर सैनी ने बीबीसी से बात की और यह आरोप लगाया कि पिछले 25 दिनों से उन्हें धमकियां मिल रहीं हैं।

वो कहते हैं कि उन्हें सरकार ने मुआवजा दिया जरूर, मगर रोहतक में हालात ऐसे होते चले जा रहे हैं कि वो अब पलायन करने का मन बना रहे हैं। सुपरा चौक के दुकानदारों का कहना है कि उनके परिवार के लोग रात को ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं क्योंकि उन्हें हमेशा हमले का अंदेशा बना रहता है।

हालांकि राज्य सरकार ने जाटों के आंदोलन को देखते हुए अर्धसैनिक बालों की तैनाती की है। मगर लोगों को यह सबकुछ अपर्याप्त लग रहा है।
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