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सरकार को उम्मीद शांति वार्ता में शामिल होगी हुर्रियत, शर्त के साथ बातचीत के दिए संकेत
संजय मिश्र/नई दिल्ली
Updated Tue, 14 Nov 2017 08:37 AM IST
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Dineshwar Sharma
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जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए केंद्र सरकार के जरिए शुरू की गई बातचीत की पहल को हुर्रियत ने बेशक बेकार की कवायद बताया है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि हुर्रियत भी बातचीत में शामिल होगी। सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के भारी दबाव के बावजूद हुर्रियत ने बातचीत के लिए सरकार के पास संकेत भेजे हैं। संकेतों के साथ हुर्रियत की ओर से कुछ शर्तें भी रखी गई हैं जिनमें हुर्रियत नेताओं के गिरफ्तार बेटों और रिश्तेदारों को रिहा करने की मांग भी सामने आई है।
फारूक अब्दुल्ला बोले- दिनेश्वर शर्मा तभी सफल होंगे जब संसद में पेश हो फाइनल रिपोर्ट
इस बीच सरकार भी अभी हुर्रियत को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं है। जबकि हुर्रियत नेता सरकार की बातचीत में तो शामिल होना चाहते हैं लेकिन वे इस संदेश से भी बचना चाहते हैं कि वे झुक गए हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर का दौरा कर लौटे सरकार के जरिए नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने सोमवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर उन्हें पहले दौर के चर्चा की रिपोर्ट दी है। सूत्रों की मानें तो दिनेश्वर की बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि बातचीत का पहला दौर सार्थक रहा है।
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बातचीत के लिए क्या है हुर्रियत की शर्त
Dineshwar Sharma
- फोटो : ANI
सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार दिनेश्वर शर्मा से बातचीत के लिए हुर्रियत की ओर से सकारात्मक संकेत आए हैं। लेकिन परदे के पीछे हुर्रियत ने विभिन्न मामलों में गिरफ्तार अपने नेता पुत्रों और रिश्तेदारों के रिहाई की मांग सरकार के सामने रखी है। इसमें हिजबुल मुखिया सैय्यद सलाउद्दीन के पुत्र सैय्यद शाहीद युसूफ और हुर्रियत प्रमुख सैय्यद अली शाह गिलानी के दामाद अलताफ शाह की रिहाई की मांग प्रमुखता से है।
युसूफ को टेरर फंडिंग मामले में 24 अक्टूबर को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। वहीं गिलानी के दामाद अल्ताफ की गिरफ्तारी भी इस वर्ष जुलाई में ही टेरर फंडिंग के आरोप में हुई है। दोनों अभी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन सरकार ने हुर्रियत के इन मांगों को मानने के मामले में अपनी ओर से कोई संकेत नहीं दिए हैं। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से हुर्रियत पर भारी दबाव है कि वह बातचीत में शामिल न हो। बावजूद इसके हुर्रियत की ओर से बातचीत में शामिल होने के संकेत हैं।
युसूफ को टेरर फंडिंग मामले में 24 अक्टूबर को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। वहीं गिलानी के दामाद अल्ताफ की गिरफ्तारी भी इस वर्ष जुलाई में ही टेरर फंडिंग के आरोप में हुई है। दोनों अभी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन सरकार ने हुर्रियत के इन मांगों को मानने के मामले में अपनी ओर से कोई संकेत नहीं दिए हैं। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से हुर्रियत पर भारी दबाव है कि वह बातचीत में शामिल न हो। बावजूद इसके हुर्रियत की ओर से बातचीत में शामिल होने के संकेत हैं।
सरकार से संपर्क साधने का दावा कर चुकी है हुर्रियत
हुर्रियत नेता
इससे पहले हुर्रियत कांफ्रेंस का कट्टरपंथी धड़ा भी सरकार के संपर्क साधने का दावा कर चुका है। कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के लिए केंद्र के जरिए नियुक्त किए गए विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा के घाटी दौरे से पहले सैयद अली शाह गिलानी की अगुवाई वाली हुर्रियत कांफ्रेंस ने दावा किया था कि राज्य सरकार के एक अधिकारी ने गिलानी और शर्मा की बैठक कराने को लेकर उनसे संपर्क साधा था, लेकिन औपचारिक तौर पर बातचीत को बेकार की कवायद बताते हुए हुर्रियत ने दिनेश्वर को मिलने से इंकार किया था।
दरअसल कश्मीर के स्थाई समाधान के लिए विशेष पहल करते हुए केंद्र सरकार ने अपनी ओर से पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को विशेष प्रतिनिधि बनाया है। जम्मू-कश्मीर के सभी हितधारकों से बातचीत कर शर्मा सूबे में शांति बहाली का प्रयास करेंगे। सरकार के इस पहल को अटल सरकार की नीति का पालन माना जा रहा है।
दरअसल कश्मीर के स्थाई समाधान के लिए विशेष पहल करते हुए केंद्र सरकार ने अपनी ओर से पूर्व आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को विशेष प्रतिनिधि बनाया है। जम्मू-कश्मीर के सभी हितधारकों से बातचीत कर शर्मा सूबे में शांति बहाली का प्रयास करेंगे। सरकार के इस पहल को अटल सरकार की नीति का पालन माना जा रहा है।