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J&k सरकार ने नियमों को नजरअंदाज कर अलगावादी नेता के पोते को दी सरकारी नौकरी

Sat, 04 Mar 2017 01:29 PM IST
amarujala.com- prensented by: आनंद
amarujala.com- prensented by: आनंद Updated Sat, 04 Mar 2017 01:29 PM IST
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Jammu-Kashmir government ignored the regulations of job to get job of separatist grandson
- फोटो : PTI

बीते साल जब कश्मीर में अलगावादी पूरे कश्मीर में दंगा कर रहें थे और कई महीनों तक कश्मीर बंद हो गया था। उस दौरान अलगावादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी के पोते को प्रदेश सरकरी नौकरी दी गई। अब ऐसी खबरें हैं कि सरकार ने नियुक्ति करते समय नियमों में शि‌थिलता बरती। 

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उच्च सूत्रों का माने तो प्रदेश की पीडीपी-बीजेपी गठबंधन सरकार ने सैय्यद के पोते अनीस उल इस्लाम को जम्मू-कश्मीर पर्यटक विभाग के सहायक विभाग शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉनवोकेशन सेंटर ( एसकेआईसीसी ) में एक रिसर्च ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया है। अनीस को इस पद पर 12 लाख रूपये वार्षिक वेतन दिया जायेगा।
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साथ ही उनको पेंशन जैसी सुविधा भी दी जायेगी। बताया जा रहा है कि पंजाब के जालधंर से एमबीए की पढ़ाई करने वाले अनीस को जम्मी-कश्मीर की सीआईडी ने 2009 में पासपोर्ट देने से भी मना कर दिया था। मगर बाद में जम्मी-कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनको पासपोर्ट दिया गया। जिसके बाद वह ब्रिटेन में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई करने चले गये। 

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जम्मू-कश्मीर पर्यटक विभाग मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सीधे तौर पर देखती

Jammu-Kashmir government ignored the regulations of job to get job of separatist grandson
जम्मू-कश्मीर पर्यटक विभाग को मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सीधे तौर पर देखती है। विभाग के नियमों की बात करें तो ऐसी नियुक्ति राज्य अधीनस्थ सेवा भर्ती बोर्ड के द्वारा या फिर पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा की जाती है। मगर अनीस की इन नियमों के द्वार नियुक्ति नहीं की गई।

वहीं पर्यटन सचिव और सीनियर चयन समिति के चेयरमैंन फारुख शाह ने अंग्रेजी अखबार टाइमस ऑफ इंडिया को बताया कि गिलानी के पोते को नियम के तहत नौकरी दी गई है। उनका कहना है कि रिसर्च ऑफिसर के लिए 140 उम्मीदवारों ने अप्लाई किया था।

जिसके तहत अनीस का चयन हुआ है। मगर नौकरी के लिए अप्लाई करने वाले कुछ लोगों ने कहा कि उनको इंटरव्यू के लिए भी नहीं बुलवाया गया। आपको बता दें जम्मू-कश्मीर सरकार नें गिलानी के पोते को उस समय नौकरी दी थी जब अलावादीयों ने पूरे कश्मीर में हिंसा फैला रखी थी। साथ ही कई महीनों तक कश्मीर बंद था।
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