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राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के हर फैसले का सम्मान करेगा जमीयत-उलेमा-ए-हिंद

Wed, 06 Nov 2019 04:16 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 06 Nov 2019 04:16 PM IST
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jamiat ulema e hind will respect the Supreme Court verdict on Ram Mandir temple
Jamait ulema e Hind Maulana Arshad Madni - फोटो : Amar Ujala

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मसले पर 16 तारीख पहले कभी भी अपना फैसला सुना सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरएसएस और मुस्लिम समाज के कई नेता शांति बनाए रखने के लिए प्रयास जारी रखे हुए हैं। बुधवार को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के हर फैसला का सम्मान करेंगे। हालांकि उन्होंने दुहराया कि बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाई गई थी और सुप्रीम कोर्ट को तथ्यों पर अपना फैसला सुनानाा चाहिए।

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30 अगस्त को हुई थी मुलाकात

बुधवार शाम चार बजे मौलाना सैयद अरशद मदनी की मुलाकात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से होनी है। माना जा रहा है कि दोनों नेता अयोध्या फैसले के बाद शांति बनाए रखने के मुद्दे पर ठोस बातचीत कर सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी मुलाकात होगी। इसके पहले गत 30 अगस्त को दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी। पूर्व भाजपा नेता रामलाल ने दोनों नेताओं के बीच बात कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

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मंगलवार को भी केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के आवास पर आरएसएस और मुस्लिम समाज के नेताओं के बीच मुलाकात हुई थी। वार्ता के बाद सभी नेताओं ने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की थी। बुधवार को एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मदनी ने कहा कि दोनों समाज के नेता यह मानते हैं कि विचारधारा की असहमति के बाद भी सबको इस बात से सहमत होना चाहिए कि समाज में शांति बनाए रखना देश की पहली प्राथमिकता है।

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कश्मीर पर ताकत के बल पर शांति नहीं आएगी

मुस्लिम नेता मदनी ने कहा कि केंद्र सरकार को यह समझना चाहिए कि ताकत के दम पर कभी स्थाई शांति नहीं आ सकती। यही कारण है कि कश्मीर में शांति लाने के लिए शांतिपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस जैसे शक्तिशाली देशों का इतिहास बताता है कि ताकत के बल पर किसी को अपना नहीं बनाया जा सकता। इसलिए सरकार को सबको साथ लेकर चलने का मार्ग तलाशना चाहिए। कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है और हमें सबको साथ लेकर चलना चाहिए। 

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