किसके आदेश पर जामिया कैंपस में घुसी थी पुलिस, दिल्ली पुलिस लगाएगी पता!
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सीपीआई के राज्यसभा सांसद डी. राजा ने सोमवार को कॉन्स्टिटूशन क्लब में विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से आयोजित एक प्रेसवार्ता में कहा कि मैंने जामिया मामले की हकीकत जानने के लिए दिल्ली पुलिस से बातचीत की थी। दिल्ली पुलिस ने मुझे कई बातें बताईं। जैसे कोई दुर्घटना नहीं हुई, और पुलिस ने मेडिकल हेल्प दी है। जब मैंने पूछा कि पुलिस को विश्वविद्यालय में घुसने का आदेश किसने दिया था, इस सवाल पर पुलिस बोली कि हम जांच कर यह बात पता लगाएंगे।
डी. राजा ने कहा कि पुलिस ने जामिया परिसर को घेर कर छात्रों को पीटा है। मोदी सरकार ने देश का शांतिपूर्ण माहौल खराब कर दिया है। पहले 370, फिर नागरिकता संशोधन बिल और अब जामिया विश्वविद्यालय का मामला, इन सब के चलते देश में सिविल वॉर की स्थिति बन गई है। सपा सांसद जावेद अली ने कहा कि जामिया में पुलिस ने बर्बतापूर्वक तरीके से छात्रों पर लाठियां बरसाई हैं। मोदी सरकार के नागरिकता संशोधन बिल का देशव्यापी विरोध हो रहा है। संसद का विशेष सत्र बुलाकर सरकार को यह बिल वापस लेना होगा।
जबरन पास कराया नागरिकता संशोधन बिल!
प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मोदी सरकार ने राज्यसभा में दबाव के जरिए नागरिकता संशोधन बिल पास कराया है। लोकसभा में तो उनके पास बहुमत था, लेकिन राज्यसभा में मोदी सरकार मजबूत नहीं थी। राज्यसभा में क्षेत्रीय दलों ने मोदी सरकार के दबाव में आकर इस बिल का समर्थन कर दिया। सरकार अपने विवादित बिलों को पास कराने के लिए कई तरह से विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों पर दबाव डालती है। अगर सभी क्षेत्रीय दलों के पास पूर्ण आजादी हो तो वे कभी भी इस बिल को पास नहीं होने देते।
पाकिस्तान तो मरा हुआ देश है!
गुलाम नबी आजाद ने एक सवाल में जवाब में कहा कि मोदी अपने गलत कामों को जायज बताने के लिए पाकिस्तान का नाम जानबूझ कर बीच में ले आते हैं। अरे, पाकिस्तान तो खुद एक मरा हुआ देश है। उसका नाम लेकर बिल्ली कुत्ते को तो डराया जा सकता है, लेकिन हिन्दुस्तान की जनता को उसके जरिए भयभीत नहीं किया जा सकता। भाजपा की यह डराने वाली नीति बहुत पुरानी है। धारा 370 या एसीबी जैसे विवादित बिल लाकर मोदी सरकार मूल समस्याओं से लोगों का ध्यान भटका रही है।
उन्होंने कहा कि देश में किसानों की दयनीय हालत, शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और महंगाई जैसे असल मुद्दों से सरकार का कोई लेना देना नहीं है। विपक्षी दलों ने नागरिकता संशोधन बिल जैसे मसलों पर बातचीत करने के लिए राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।