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जलियांवाला बाग हत्याकांड: क्या था रोलेट एक्ट? जिसके विरोध में गई सैकड़ों लोगों की जान

Sat, 13 Apr 2019 01:04 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 13 Apr 2019 01:04 PM IST
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Jallianwala Bagh Massacre: Know all about Rowlatt Act
जलियांवाला बाग - फोटो : social media

आज जलियांवाला बाग हत्याकांड को 100 साल पूरे हो गए हैं। 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में रोलेट एक्ट के विरोध में हजारों लोग एकत्र हुए थे। अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने इस बाग के मुख्य द्वार को अपने सैनिकों और हथियारंबद वाहनों से रोककर निहत्थी भीड़ पर बिना किसी चेतावनी के 10 मिनट तक गोलियों की बरसात कराई थी। 


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इस घटना में तकरीबन 1000 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 1500 से ज्यादा घायल हुए थे। लेकिन ब्रिटिश सरकार मरने वाले लोगों की संख्या 379 और घायल लोगों की संख्या 1200 बताती है। ये लोग यहां रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एकत्रित हुए थे। 

क्या था रोलेट एक्ट? 

रोलेट एक्ट जिसे काला कानून भी कहा जाता है, भारत की ब्रिटानी सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया गया। ये कानून सर सिडनी रौलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाया गया था। 

इस कानून से ब्रिटिश सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो गया था, कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए, उसे जेल में बंद कर सकती थी।

कानून का जमकर हुआ विरोध?

इस कानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले का नाम जानने का भी अधिकार नहीं था। इस कानून का पूरे देश में जमकर विरोध हुआ। देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे। महात्मा गांधी ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया। 

अमृतसर के दो बड़े सामाजिक नेता डॉ सत्यपाल और डॉ सैफुद्दीन किचलू भी गिरफ्तार कर लिए गए। तब अमृतसर समेत पूरे पंजाब में लोगों में रोष फैल गया। उन दिनों 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी वाले दिन पंजाब के किसान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एकत्र हुए थे। इसी दिन जलियांवाला बाग में एक विरोध सभा का आयोजन हुआ। जिसमें जनरल डायर ने लोगों पर गोलियां बरसा दीं। इस घटना को ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है।

 

आपके लिए- 13 अप्रैल, 1919 ब्रिटिश भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन माना जाता है। इसी दिन अंग्रेज अफसर ने सैकड़ों लोगों पर गोलियों की बरसात करवा दी। वो भी बिना किसी चेतावनी के। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरिजा मे ने भी बुधवार को इस घटना के प्रति खेद प्रकट किया है।


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