फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   jaganmohan reddy of South's hero

10 साल के संघर्ष पथ पर तपकर बने दक्षिण के नायक

Sun, 26 May 2019 05:55 AM IST
Avdhesh Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sun, 26 May 2019 05:55 AM IST
विज्ञापन
jaganmohan reddy of South's hero
जगनमोहन रेड्डी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
लोकसभा चुनाव के नतीजों ने दक्षिण के पांच राज्यों के सियासी समीकरणों को उलट पलटकर रख दिया है। इस सियासी उथल-पुथल में वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगनमोहन रेड्डी दक्षिण की राजनीति में नए और युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं। भाजपा के खिलाफ देशव्यापी मोर्चा खोलने वाले चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी को आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ-साथ विस चुनाव में करारी शिकस्त देकर जगनमोहन ने सियासत में अपना कद बड़ा कर लिया है। 
विज्ञापन


वाईएसआर कांग्रेस ने 175 विधानसभा सीटों में से 152 और 25 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें जीतीं हैं। जगनमोहन को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया है। राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया है। जगनमोहन संभवतया 30 मई को  विजयवाड़ा में शपथ लेंगे। वह रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे।
विज्ञापन


डीएमके के बाद वाईएसआर कांग्रेस दक्षिण की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। 46 वर्षीय जगनमोहन के लिए साल 2009 किसी दु:स्वप्न की तरह था। इसी साल उनके सीएम पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी ने एक हेलिकॉप्टर हादसे में उनका साथ छोड़ा तो कांग्रेस ने भी उन्हें मझधार में छोड़ दिया लेकिन जगन ने हिम्मत नहीं हारी। कांग्रेस और जगनमोहन के बीच लड़ाई उस समय और बढ़ गई, जब नवंबर 2010 में कांग्रेस ने एन किरण कुमार रेड्डी को के. रोशैया के स्थान पर आंध्र का सीएम बनाया। हालांकि कांग्रेस को इसकी कीमत सत्ता गंवाकर चुकानी पड़ी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


29 नवंबर 2010 को, जगन कांग्रेस से अलग हो गए और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। मार्च 2011 में, जगन ने वाईएसआर कांग्रेस की स्थापना की आैर धीरे धीरे राज्य में अपनी पकड़ बनानी शुरू की। हालांकि, विस चुनाव (2014) में जगन सत्तारूढ़ टीडीपी से पार नहीं पा सके, मगर संघर्ष का सिलसिला जारी रहा। अंतत: इस लोस व विस चुनाव में उन्होंने राज्य में कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने के अलावा टीडीपी को करारी शिकस्त देकर हिसाब बराबर कर लिया। शुरू से जुझारू प्रवृत्ति के जगन राज्य में लगातार पांच साल तक टीडीपी के खिलाफ अभियान चलाते रहे।

प्रशांत किशोर का साथ

जगन की सफलता में रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी भारतीय राजनीतिक एक्शन कमेटी टीम का प्रमुख योगदान है। मई 2017 में प्रशांत उनके विशेष सलाहकार बने। उन्होंने आंध्र में टीडीपी को हराने के लिए विशेष राज्य का दर्जा दिलाने और इसे प्राप्त नहीं करने के लिए नायडू और उनकी पार्टी को घेरा। 

नायडू न घर के न घाट के

चार दशक के राजनीतिक कॅरिअर में एन चंद्रबाबू नायडू ने हमेशा पैंतरा बदला। कांग्रेस विधायक रहे, फिर ससुर एनटीआर की पार्टी टीडीपी में तख्ता पलटकर पार्टी और सीएम की कुर्सी पर कब्जा किया। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में राजग में आए। 2014 में फिर राजग का दामन थामा। 2018 में साथ छोड़ अचानक भाजपा विरोधी मोर्चा के गठन में लग गए। मगर नतीजों ने उनके सियासी कॅरिअर पर सवाल खड़ा कर दिया है।

केसीआर का जलवा कायम

बीते साल तेलंगाना विधानसभा में जबर्दस्त जीत के बाद लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन कर टीआरएस मुखिया और तेलंगाना सीएम के. चंद्रशेखर राव ने अपनी राजनीतिक धमक दिखाई है। लोकसभा चुनाव में हमला-जवाबी हमले से खुद को दूर रखा और विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा में भी बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे। भाजपा ने 4 सीटें जीतकर उनके लिए चुनौती जरूर पेश की है।

एमके स्टालिन ने पारिवारिक जंग से पार पाई

तमिलनाडु की राजनीति के दो ध्रुव जयललिता (अन्नाद्रमुक) और एम करुणानिधि (द्रमुक) की मौत के बाद राज्य में नेतृत्व शून्यता का दौर शुरू हो गया था। अन्नाद्रमुक कई धड़ों में बंट गई, लेकिन एमके स्टालिन ने पारिवारिक जंग से पार पाते हुए चुनाव से पहले कांग्रेस-वाम दलों के साथ एक मजबूत गठबंधन भी खड़ा कर लिया। चुनाव में जबर्दस्त जीत से स्टालिन का सियासी कद अचानक बड़ा हो गया है।


बुरी तरह गिरा पी विजयन का ग्राफ

ढाई साल पहले केरल की सत्ता संभालने वाले माकपा के पिनाराई विजयन के सामने वाम किले की नींव को मजबूती देने की चुनौती थी। प. बंगाल व त्रिपुरा में आधार खत्म होने के बाद लोकसभा चुनाव में वाम दलों की उम्मीद बस इसी राज्य पर टिकी थी। मगर विजयन बीते चुनाव से बड़ा प्रदर्शन करने के बजाय वाम मोर्चा का राज्य में बस खाता ही खुलवा सके। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed