फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Jacket made of scorpion grass has huge demand in country and abroad

बिच्छू घास से बने जैकेट की देश-विदेश में भारी मांग

Mon, 20 Aug 2018 06:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Updated Mon, 20 Aug 2018 06:00 AM IST
विज्ञापन
Jacket made of scorpion grass has huge demand in country and abroad

जंगलों में उगने वाली बिच्छू घास यानी हिमालयन नेटल (स्थानीय भाषा में कंडाली) से उत्तराखंड में जैकेट, शॉल, स्टॉल, स्कॉर्फ  व बैग तैयार किए जा रहे हैं। चमोली व उत्तरकाशी जिले में कई समूह बिच्छू घास के तने से रेशा (फाइबर) निकाल कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद बना रहे हैं। अमेरिका, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, रूस आदि देशों को निर्यात के लिए नमूने भेजे गए हैं। इसके साथ ही जयपुर, अहमदाबाद, कोलकाता आदि राज्यों से इसकी भारी मांग आ रही है। 

विज्ञापन


चमोली जिले के मंगरौली गांव में रूरल इंडिया क्राफ्ट संस्था और उत्तरकाशी जिले के भीमतल्ला में जय नंदा उत्थान समिति हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का काम करती हैं। इन संस्थाओं ने बिच्छू घास के रेशे से हाफ  जैकेट, शॉल, बैग, स्टॉल बनाए हैं। उद्योग विभाग के निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल का कहना है कि नेचुरल फाइबर को बढ़ावा देने के लिए सरकार व विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। 
विज्ञापन


ऐसे तैयार होता है कपड़ा 

उत्तराखंड के सभी जिलों में बिच्छू घास प्राकृतिक रूप से उगती है। तने को सूखाने के बाद मशीन में प्रोसेसिंग की जाती है। इसके बाद धागा बनता है। 3 से 5 किलो बिच्छू घास से एक किलो धागा निकलता है। इसमें प्रति मीटर 600 से 700 रुपये की लागत आती है। रेशा मुलायम होने से कपड़ा तैयार करने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। बिच्छू घास के रेशे से बनी जैकेट की कीमत 1,700 से 1,800 रुपये तक है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

  
नहीं मिल रहा पर्याप्त कच्चा माल

रूरल इंडिया क्राफ्ट संस्था के बचन सिंह रावत का कहना है कि बिच्छू घास की प्रदेश में व्यावसायिक खेती नहीं होती है। ऐसे में कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि इन उत्पादों की भारी मांग है। मंगरौली गांव में कंडाली के रेशे से उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। देश के कई राज्यों के कारोबारियों ने ऑर्डर देने के लिए संपर्क किया है। उद्योग विभाग की ओर से जैकेट को निर्यात करने के लिए उसके नमूने विदेश भेजे गए हैं। उनका कहना है कि सरकार प्रदेश में नेचुरल फाइबर को बढ़ावा देती है, तो इससे लोगों को रोजगार मिलने की ज्यादा संभावना है। देहरादून के शेरपुर में 120 महिलाओं को संस्था की ओर से इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पराबैंगनी किरणों से बचाता है यह जैकेट 

बिच्छू घास से तैयार रेशा पराबैंगनी किरणों से बचाता है। इसके रेशे से बनी जैकेट को गर्मी व सर्दी दोनों ही मौसम में पहना जा सकता है। साथ ही यह देखने में दूसरे जैकेट से आकर्षक लगता है।

 
बिच्छू घास की बनती है सब्जी

पर्वतीय क्षेत्रों में बिच्छू घास की पत्तियों को हरी सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि अब लोगों के रहन-सहन, खाना-पान का तौर तरीका बदलने से इसे गिने चुने लोग ही सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed