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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   J&K women marrying non-natives don't lose residency rights: Expert

राज्य से बाहर शादी करने पर स्थायी निवास अधिकार नहीं गंवाती जम्मू कश्मीर की महिला: विशेषज्ञ

Tue, 22 Jan 2019 10:32 PM IST
अमित मंडल भाषा, श्रीनगर
भाषा, श्रीनगर Published by: अमित मंडल Updated Tue, 22 Jan 2019 10:32 PM IST
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J&K women marrying non-natives don't lose residency rights: Expert
सुप्रीम कोर्ट

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जम्मू कश्मीर की वे महिलाएं जो किसी दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करती हैं, तो ऐसी स्थिति में उन्हें उनके आवासीय अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि 35-ए के तहत ऐसी महिलाएं अपना मूल अधिकार नहीं खोती हैं। 

एक शीर्ष कानूनी विशेषज्ञ ने मंगलवार को कहा कि जम्मू कश्मीर की महिला राज्य के बाहर के पुरुष से शादी करने पर भी संविधान के अनुच्छेद 35-ए के तहत अपना स्थायी निवास और संपत्ति का अधिकार नहीं गंवाती है। जम्मू कश्मीर सरकार के पूर्व महाधिवक्ता इशाक कादरी ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने अक्टूबर 2002 में ‘राज्य एवं अन्य बनाम डाक्टर सुशीला साहनी एवं अन्य’ राज्य विषय (स्थायी निवास) कानून की उस शर्त को खारिज करके मामले को सुलझाया था जिसमें कहा गया था कि महिला के राज्य से बाहर शादी करने पर उसका स्थायी निवास दर्जा चला जाएगा।’’ 

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पीठ ने सात अक्टूबर 2002 को ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासी की बेटी के राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति से शादी करने पर भी उसका स्थायी निवासी का दर्जा नहीं जाएगा।

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व महाधिवक्ता इशाक कादरी ने बताया कि साल 2002 में हाईकोर्ट ने राज्य व अन्य बनाम डॉ सुशीला सावने और अन्य केस में फैसला दिया था कि यदि जम्मू-कश्मीर की कोई महिला किसी अन्य राज्य के पुरुष से शादी करती है, तो ऐसी स्थिति में उसका संपत्ति का मौलिक अधिकार स्वत: खत्म हो जाता है। 

कादरी ने बताया कि आर्टिकल 35 ए के तहत जम्मू कश्मीर के स्थाई निवासी के पास विशेषाधिकार संबंधी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चेंबर में सुनवाई करने की बात कही है। 


मालूम हो कि 2002 में राज्य की हाईकोर्ट ने महिला के अधिकारों को सुरक्षित रखा। अदालत ने अपने फैसले में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया। उस वक्त पहली बार इस फैसले के खिलाफ जम्मू-कश्मीर की विधानसभा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सात अक्तूबर 2002 को बेंच ने बहुमत के आधार पर फैसला दिया कि जम्मू कश्मीर की स्थाई निवासी राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी करने के बाद भी अपना स्थाई निवासी होने का अधिकार नहीं खोएंगे। 

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