ITBP इंस्पेक्टर केस: हाईकोर्ट में पेश होंगे गृह मंत्रालय के जेएस-पी, निरीक्षकों के मामले में है ये अपडेट
54 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' को लेकर अब बीएसएफ और सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर भी दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच चुके हैं। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि 24 सितंबर से पहले 5400 का 'ग्रेड पे' लागू नहीं होता है तो विभाग के संबंधित अफसर दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूद रहें।
विस्तार
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में वित्त मंत्रालय का 2008 में जारी हुआ एक कार्यालय ज्ञापन (ओएम) लागू नहीं होता। बाकी केंद्र के सभी विभागों में वह ओएम लागू हो रहा है। इस ओएम में कहा गया है कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का 'ग्रेड पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। यह बात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्वत: ही लागू नहीं होती। इसे लागू कराने के लिए सीएपीएफ निरीक्षकों को अदालतों की शरण लेनी पड़ रही है। पिछले साल 48 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' को लेकर आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली कोर्ट से यह लड़ाई जीती थी, लेकिन अभी तक उन्हें इसका फायदा नहीं मिला। वजह, केंद्र सरकार, दिल्ली उच्च न्यायालय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां पर एसएलपी खारिज हो गई। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को न्याय नहीं मिल रहा। अवमानना याचिका पर आईटीबीपी के आईजी 'पर्स' 26 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष वीसी के जरिए पेश हुए। यह मामला, गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तावित है। वहीं से फाइनल निर्णय होना है। उच्च न्यायालय ने अब इस केस में 15 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के जेएस (पी) को सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दिया है।
बता दें कि 54 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' को लेकर अब बीएसएफ और सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर भी दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच चुके हैं। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों के मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि 24 सितंबर से पहले 5400 का 'ग्रेड पे' लागू नहीं होता है तो विभाग के संबंधित अफसर दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूद रहें। सीआरपीएफ निरीक्षकों के मामले में 14 अक्तूबर को सुनवाई होनी है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सरकार के पास अब कोई ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। एसएलपी खारिज हो चुकी है। अब इस मामले में यह संभावना तलाशी जा रही है कि जिस याचिकाकर्ता के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला आया है, केवल उसे ही फायदा दे दिया जाए।
अक्तूबर में सीआरपीएफ के इंस्पेक्टरों के मामले की भी सुनवाई है। जब तीनों बलों के इंस्पेक्टरों का केस एक ही है तो फैसला भी लगभग एक ही रहने की संभावना है। जब आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार को अदालत से जीत मिली तो बीएसएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत में पहुंच गए। इनके पक्ष में फैसला आया। नतीजा, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई, लेकिन वहां पर एसएलपी खारिज हो गई। इसके बावजूद अभी तक याचिकाकर्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा। उन्हें अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ रही है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त लहजा अपनाया है। पहले अदालत ने आईटीबीपी के आईजी 'पर्स' 26 अगस्त को अदालत के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के जेएस (पी) को वही आदेश दे दिया है। बीएसएफ के इंस्पेक्टरों के मामले में भी हाईकोर्ट ने कह दिया है कि 24 सितंबर से पहले 5400 का 'ग्रेड पे' लागू नहीं होता है तो विभाग के संबंधित अफसर दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूद रहें। 9 सितबंर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के मामले में कहा था कि इस फैसले को लागू किया जाए। इसके बाद केंद्र सरकार, एसएलपी में चली गई। वो भी डिसमिस हो गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने बोला कि आठ सप्ताह में फैसले को लागू करो। 18 अगस्त 2025 तक उक्त फैसले को लागू करने की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। 18 अगस्त को जब मामले की सुनवाई हुई तो दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, मामले में अदालत के आदेश का पालन नहीं हुआ है। अवमानना केस 46/2025 के तहत दिल्ली हाईकोर्ट ने सीधा आदेश दिया था कि आईटीबीपी के आईजी 'पर्स' वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर 26 अगस्त को पेश हों। बीएसएफ के इंस्पेक्टर आनंद प्रताप सिंह व अन्य ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अवमानना याचिका दायर की थी। इसमें गोविंद मोहन और अन्य को पार्टी बनाया गया था।
सबसे पहले इस मामले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गत वर्ष लंबे संघर्ष के बाद उनकी जीत हुई। अदालत ने उन्हें 54 सौ ग्रे पे देने का फैसला सुनाया। उसके बाद बीएसएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत में पहुंच गए। इतना ही नहीं, सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत में चले गए। आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार को इस केस में यूं ही जीत नहीं मिली थी। सुशील कुमार के केस में सरकार, सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी में चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को एसएलपी, खारिज कर दी। इसके बाद सुशील कुमार का केस कन्फर्म हो गया।
डीजी बीएसएफ ने अपने इंस्पेक्टरों के मामले में 14 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ संचार किया। इसमें कहा गया कि सुशील कुमार के केस के दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2024 को फैसला सुनाया था। उसे सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी 13406/2025 के जरिए चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल के अपने फैसले में एसएलपी को खारिज कर दिया। इस मामले में बीएसएफ के लीगल अफसरों की राय ली गई है। उन्होंने अपनी राय में कहा है कि अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश लागू किया जाना जरुरी है। अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में एनएफयू का जो केस है यानी बीएसएफ इंस्पेक्टर आनन्द प्रताप सिंह का, उसे 54 सौ का 'ग्रेड पे' दे दिया जाए। डीजी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उचित दिशा निर्देश जारी करने की प्रार्थना की।
बीएसएफ इंस्पेक्टरों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनीश दयाल ने अपने फैसले में कहा, 24 सितंबर 2025 को यह केस लिस्ट किया जाए। यह देखेंगे कि तब तक ये फैसला लागू हुआ है या नहीं। अगर इस तय अवधि में ये फैसला लागू नहीं होता है तो संबंधित अफसर कोर्ट में मौजूद रहें।
आईटीबीपी निरीक्षक के मामले में अदालत की सुनवाई में बताया गया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अगस्त 2008 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, तो उनका ग्रेड पे 54 सौ हो जाएगा। इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स 'सीबीडीटी' में कार्यरत कर्मियों को यह फायदा नहीं मिला।
इस मामले में सीबीडीटी के इंस्पेक्टर एम सुब्रमणयम, '167/2009' कैट में चले गए। कैट ने भी इंस्पेक्टर के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उसके बाद एम सुब्रमणयम, मद्रास हाईकोर्ट '13225/2010' में चले गए। सरकार ने अदालत में कहा, आपको ये लाभ नहीं मिलेगा। जो पदोन्नत होकर आए हैं, उन्हीं को ये लाभ मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, उक्त कर्मचारी को यह लाभ दिया जाए। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ, सरकार सुप्रीम कोर्ट 8883/2011 में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद सरकार को लताड़ लगाई।
मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। केंद्र सरकार, इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को फायदा देने के लिए तैयार नहीं हुई। सरकारी अपील भी 10 अक्तूबर 2017 को डिसमिस हो गई। सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो रिव्यू दो पेटिशन किए थे। ये भी 23 अगस्त 2018 को डिसमिस कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस मामले में जो एसएलपी रिजेक्ट की गई थी, केस का वही स्टे्टस रहेगा। इसके बाद सीबीडीटी ने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर कर लिया। सुप्रीम कोर्ट में पेटिशन रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रुप बी में यह आदेश लागू कर दिया। मतलब, वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, उनका ग्रेड पे 54 सौ रुपये हो जाएगा, ये फायदा दे दिया।
सरकार ने कहा, यह आदेश केवल ग्रुप बी वालों के लिए ही लागू होगा। हालांकि यह पे ग्रेड तो ग्रुप ए में भी आता है, लेकिन ग्रुप बी में ही ये फायदा दिया गया। इसके पीछे वजह बताई गई कि ग्रुप बी में कमजोर वर्ग है, उन्हें आर्थिक तौर पर सफल बनाना है। केंद्र सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी। सरकार ने कहा, सभी को ये फायदा नहीं मिलेगा, केवल पदोन्नति वालों को ही दिया जाएगा। खास बात है कि केंद्र सरकार ने सभी विभागों में यह फायदा दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा। ग्रुप बी 'सिविल' वालों को लाभ मिला, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को नहीं दिया।
आईटीबीपी इंस्पेक्टर 'फार्मासिस्ट' सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उसमें कहा गया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने इस केस में फैसला दिया है। हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने भी इस केस में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखा है। सुशील कुमार ने उक्त फैसलों के आधार पर 21 जून 2020 को आईटीबीपी को लीगल नोटिस भेजा था। बल ने उसे 18 सितंबर 2020 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद 43321/2021 रिट पेटिशन किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर पेटिशन को डिस्पोज कर दिया कि विभाग इस रिट पेटिशन को ही प्रतिवेदन मानें।
इसी पर एक विस्तारित आदेश जारी करें। इसके बावजूद विभाग ने प्रतिवेदन को 24 सितंबर 2021 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद रिट पेटिशन हाईकोर्ट में लगाई गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी से कहा, आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता को वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, फायदा दिया जाए। ये फायदा, छह जुलाई 2019 से देना होगा। सीआरपीएफ और बीएसएफ में सिपाही से लेकर निरीक्षक तक और कैडर अफसर, खासतौर पर सहायक कमांडेंट, पदोन्नति के लिए परेशान हैं।