चीन से घटे आयात की भरपाई में लग सकते हैं 25 दिन, अमेरिका को विकल्प के रूप में देख रही सरकार
उद्योग जगत ने चीन से आने वाले शीर्ष 20 सामानों की सूची सरकार को सौंपी है, जिसमें से 13 के विकल्प के रूप में अमेरिका को देखा जा रहा है।
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कोरोनावायरस की वजह से चीन से बाधित कच्चे माल के आयात की भरपाई में करीब एक महीने का समय लग सकता है। उद्योग जगत ने चीन से आने वाले शीर्ष 20 सामानों की सूची सरकार को सौंपी है, जिसमें से 13 के विकल्प के रूप में अमेरिका को देखा जा रहा है। अगर वहां से सीधे कार्गो के जरिये कच्चा माल भारत लाया जाता है, तो भी इसमें कम से कम 25 दिन का समय लगेगा।
कोरोना संकट के बीच वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों उद्योग जगत के साथ बैठक की थी, जिसमें सरकार को चीन से आयात होने सबसे ज्यादा जरूरी 20 कच्चे माल की सूची सौंपी गई थी। साथ ही उद्योग जगत ने इसके आयात का विकल्प भी सुझाया था। मसलन, अभी चीन से सबसे ज्यादा टेलीफोन सेट और वायरलेस हैंडसेट के अलावा इलेक्ट्रिकल कलपुर्जे आते हैं।
साल 2018 में इस श्रेणी के तहत कुल 1.20 लाख करोड़ रुपये का सामान आयात किया गया था, जिसमें 42.8 फीसदी यानी 51.36 हजार करोड़ का सामान सिर्फ चीन से आया था। वहां से आयात घटने पर विकल्प के रूप में अमेरिका, वियतनाम और यूएई का नाम सुझाया गया है। इसी तरह, इलेक्ट्रॉनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और माइक्रो असेंबल्ड का 2018 में कुल आयात 62.69 हजार करोड़ का था जिसमें 32 फीसदी हिस्सेदारी चीन की थी। इसका विकल्प दक्षिण कोरिया, ताइवान और सिंगापुर को बनाया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को जल्द चाहिए विकल्प
चीन से आयात के विकल्प की सबसे ज्यादा तलाश इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को है। इस उद्योग की रीढ़ माने जा रहे डायोड, ट्रांजिस्टर, सेमीकंडक्टर, फोटोसेंसिटिव सेमीकंडक्टर आदि के कुल आयात में 63.4 फीसदी की आपूर्ति अकेले चीन करता है। उद्योग जगता का कहना है कि लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक सामान में डायोड या सेमीकंडक्टर डिवाइस का इस्तेमाल होता है। साथ ही उत्पादों की मरम्मत में भी इसकी जरूरत होती है।
साल 2018 में चीन से इन सामानों का आयात 44,327 करोड़ रुपये का था। पिछले महीने से इनका कंसाइनमेंट नहीं आ रहा और बाजार में किल्लत बढ़ रही, जिससे स्पेयर महंगा हो गया है। उद्योग जगत ने इसका विकल्प जापान, मलयेशिया और अमेरिका को बताया है।
चीन से दोगुना समय लेता है अमेरिका से आयात
नौवहन उद्योग के जानकारों का कहना है कि चीन से आयात के मुकाबले अमेरिका से सामान मंगाने में दोगुना समय लगता है। अगर चीन के पश्चिमी तट से किसी बंदरगाह तक सामान लाना हो तो करीब 15 दिन का समय लगता है, जबकि अमेरिका से सीधे भारतीय बंदरगाह पर सामान लाने में ही 25 से 30 दिन का समय लग जाता है। साथ ही इसकी परिवहन लागत में भी इजाफा हो जाता है, जिसका असर उत्पाद पर पड़ सकता है।