{"_id":"5d778c4f8ebc3e017768a44d","slug":"it-is-difficult-to-drive-above-80-kmph-speed-on-mumbai-roads-says-bombay-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओवर स्पीड पर बोला हाईकोर्ट, मुंबई में सड़कों की हालत खराब, 80 से ऊपर गाड़ी चलाना मुश्किल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ओवर स्पीड पर बोला हाईकोर्ट, मुंबई में सड़कों की हालत खराब, 80 से ऊपर गाड़ी चलाना मुश्किल
Tue, 10 Sep 2019 05:13 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 10 Sep 2019 05:13 PM IST
विज्ञापन
बंबई उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बंबई उच्च न्यायालय ने वाहनों की गति से जुड़े नियमों के कड़ाई से क्रियान्वयन के लिए एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मुंबई में सड़कों की हालत ऐसी नहीं है कि कोई भी शख्स 80 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से गाड़ी चला सके।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने पिछले सप्ताह शहर के एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया है कि वाहनों में गति नियंत्रक लगाने के लिए किए गए प्रावधान का सख्ती से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
गति नियंत्रक ऐसा उपकरण होता है जिसका इस्तेमाल इंजनों की गति का आकलन करने और नियंत्रित करने के लिए होता है। याचिका में दावा किया गया कि स्कूली बसों सहित कई वाहन शहर में तय गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। हालांकि पीठ ने कहा कि गति सीमा निष्प्रभावी है ।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति नंदराजोग ने कहा कि मुंबई जैसे शहर में, कौन सी सड़क बनी हुई है जहां एक वाहन 80 किमी की गति को पार कर सकता है? शहर ने इस याचिका में उठाए गए मुद्दों और समस्याओं का खुद समाधान कर लिया है।
अदालत ने आगे मामले की सुनवाई के लिए 14 नवंबर की तारीख निर्धारित की। महाराष्ट्र सरकार ने मई 2017 में काली और पीली टैक्सियों, मोबाइल ऐप आधारित कैब और टूरिस्ट टैक्सी, छोटे टैंपो और 3500 किलोग्राम से कम वजन वाली पिक-अप वैन में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तय सीमा के साथ गति नियंत्रक लगाने का निर्देश दिया था। बहरहाल, उच्च न्यायालय ने गति सीमा लागू करने का जिक्र करते हुए यमुना एक्सप्रेस-वे का हवाला दिया।