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एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय को दिया निर्देश, जहां 500 से नीचे है टीडीएस वहां बंद करें आरओ प्यूरीफायर

Wed, 15 Jan 2020 03:41 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 15 Jan 2020 03:41 PM IST
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Issue notification in 2 months to ban RO purifiers, NGT tells environment ministry
NGT

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के अंदर उन जगहों पर आरओ प्यूरीफायर पर प्रतिबंधित लगाने की अधिसूचना जारी करे जहां पानी में कुल घुलनशील ठोस (टीडीएस) प्रतिलीटर 500 मिलीग्राम से नीचे है।

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एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को कहा कि उसके आदेश के अनुपालन में हो रही देरी के कारण लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। आदेश का शीघ्रता से अनुपालन होना चाहिए। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने एनजीटी के आदेश को लागू करने के लिए चार महीने का समय मांगा था।
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एनजीटी ने कहा का इस तथ्य के संदर्भ में कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े किसी भी मामले में त्वरित कदम उठाया जाना चाहिए, मसौदा अधिसूचना प्रसारित करने की अवधि या प्रतिक्रिया मंगाने का समय उतना ही लंबा होना चाहिए जितना प्रस्तावित है। इसे घटा कर दो महीने किया जा सकता है। अनुपालन रिपोर्ट मामले में सुनवाई की अगली तारीख से पहले ईमेल के जरिए दाखिल की जाए।
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इससे पहले मंत्रालय ने अपनी दलील में कहा था कि एनजीटी के आदेश के प्रभावी अनुपालन के लिए चार महीने की जरूरत है। दो महीने मसौदा प्रस्ताव के व्यापक प्रसारण के लिये जिससे टिप्पणियां आमंत्रित की जा सकें और दो महीने इन टिप्पणियों में आए सुझावों को शामिल करने तथा अधिसूचना को अंतिम रूप देने व विधि एवं न्याय मंत्रालय से मंजूरी हासिल करने के लिये।

इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। एनजीटी ने सुनवाई की आखिरी तारीख को मंत्रालय को अधिसूचना जारी करने में देरी के लिए फटकार लगाई और संबंधित अधिकारी को वेतन रोकने की चेतावनी दी। ट्रिब्यूनल ने पहले कहा था कि यह आदेश एक विशेषज्ञ समिति की एक रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें एमओईएफ के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

आरओ प्यूरिफायर के उपयोग को विनियमित करने के लिए, एनजीटी ने सरकार को निर्देश दिया था कि वे जहां पानी में कुल घुलित ठोस (टीडीएस) प्रति लीटर 500 मिलीग्राम से कम है, वहां पर प्रतिबंध लगाए जाएं और लोकतांत्रिक जल के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करें। ट्रिब्यूनल ने सरकार से यह भी कहा है कि वह पूरे देश में जहां भी आरओ की अनुमति है, 60 प्रतिशत से अधिक पानी की वसूली करना अनिवार्य करे।

टीडीएस अकार्बनिक लवण के साथ-साथ कार्बनिक पदार्थों की छोटी मात्रा से बना होता है। डब्ल्यूएचओ के अध्ययन के अनुसार, 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे का टीडीएस स्तर उत्कृष्ट माना जाता है, जबकि 900 मिलीग्राम प्रति लीटर खराब बताया जाता है और 1200 मिलीग्राम से अधिक अस्वीकार्य है।

रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) एक जल उपचार प्रक्रिया है जिसके द्वारा पानी से दूषित पदार्थों के निकालने के लिए एक अर्धवृत्ताकार झिल्ली के माध्यम से अणुओं पर दबाव का उपयोग किया जाता है। यह आदेश एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट से इनकार करने के बाद आया था, जिसमें कहा गया था कि अगर टीडीएस 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है, तो आरओ सिस्टम उपयोगी नहीं होगा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण खनिजों को हटाने के साथ-साथ पानी की अनुचित बर्बादी होगी।

यह बातें न्यायाधिकरण ने एनजीओ फ्रेंड्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। याचिका में आरओ सिस्टम के अनावश्यक उपयोग के कारण इसके अपव्यय को रोककर पीने योग्य पानी के संरक्षण की मांग की गई थी।

गन्ना जूस विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

दिल्ली में गन्ना जूस विक्रेताओं द्वारा डीजल इंजन के इस्तेमाल से बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर एनजीटी के समक्ष दाखिल एक याचिका पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) ने बुधवार को एनजीटी के समक्ष बताया कि प्राधिकारों को अपने इलाकों में ऐसी दुकानों को बंद करने के लिए कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ को डीपीसीसी ने बताया कि सितंबर में एसडीएम द्वारका के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण किया गया लेकिन वहां पर कोई जूस विक्रेता नहीं था।

डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि डीपीसीसी ने एसडीएमसी आयुक्त को एक पत्र जारी कर उनके इलाके में गन्ना जूस विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। डीपीसीसी ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी कर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सभी गन्ना जूस दुकानों को बंद कराने और इस संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

मोहम्मद इश्तिखार की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में एनजीटी को ये बताया गया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली में गन्ना जूस निकालने के लिए डीजल इंजनों का इस्तेमाल हो रहा है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ तस्वीरें भी दी थी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी ।

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