दस और स्वदेशी सेटेलाइट लांच करेगा इसरो
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मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में शामिल होने से इसरो के अंतरराष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि एमटीसीआर के अन्य सदस्य देशों से निर्यात नियंत्रित उच्च टेक्नोलॉजी वाले उपकरणों की आपूर्ति आसान हो जाएगी। इसके अलावा इसरो के व्यावसायिक कार्यों में भी बढ़ोतरी होगी।
इस तरह भारत अंतरिक्ष सुरक्षा विषयों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। इसके साथ ही इसरो और नासा ने संयुक्त रूप से उपग्रह विकसित करने की योजना बनाई है। इस सेटेलाइट को लांच करने में अभी पांच साल और लग सकते हैं। यह रडार संबंधित उपग्रह होगा।
डा. सिंह ने बताया कि इसरो इसके लिए अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष यान एकीकरण एवं परीक्षण और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी का निर्वाह करेगा। इस सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़े विभिन्न कार्यों में उपयोगी होंगे।
इस सेटेलाइट से प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग और निगरानी, फसल चक्र की संपूर्ण अवधि के दौरान कृषि संबंधी जैव मात्रा का आकलन हो सकेगा। बाढ़ और तेल रिसाव की भी निगरानी संभव हो सकेगी।
सेटेलाइट का लाभ
इसके अलावा समुद्र तटीय परिवर्तन, सतह विकृति और कच्छ क्षेत्र में वनस्पति के मूल्यांकन में भी इस सेटेलाइट की भूमिका अहम होगी। नासा और इसरो को इस सेटेलाइट के लिए भारत और अमेरिकी सरकारों की स्वीकृति मिल चुकी है। भावी योजनाओं के लिए भारतीय और अमेरिकी वैज्ञानिकों की बैठक छह माह के अंदर होगी।
इसरो द्वारा लांच किया गया पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रह सफलता पूर्वक काम करने लगा है। इस उपग्रह से शहरी और ग्रामीण विकास योजनाओं, उपयोगिता प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जरूरी आंकड़े मिल रहे हैं।
यह मैपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए भी जरूरी सूचनाएं भेज रहा है। इसरो ने पिछले माह 17 विदेशी सेटेलाइट लांच किया था। एक साथ 20 सेटेलाइट लांच करने के सफल प्रयोग से इसरो ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ऊंची उड़ान दर्ज की है।
सेटेलाइट का लाभ इन सेटेलाइट से प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग और मॉनिटरिंग, फसल चक्र की संपूर्ण अवधि के दौरान कृषि संबंधी जैव मात्रा का आकलन करने में मदद मिलेगी। बाढ़ और तेल रिसाव की निगरानी भी आसान होगी। इसके अलावा तटीय क्षेत्रों में होने वाले परिवर्तन, कच्छ में वानस्पतिक मूल्यांकन में भी सेटेलाइट की अहम भूमिका होगी।