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भारत के लिए भी फायदेमंद है PSLV-C38,ये हैं खासियतें
amarujala.com- Presented: अभिषेक तिवारी
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:31 AM IST
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ISRO launch PSLV-C38 rocket
- फोटो : ani
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा लॉन्चपैड से एक और इतिहास रचा है। इसरो ने श्रीहरिकोटा से 14 देशों की 31 सेटेलाइट 30 सह-उपग्रहों के साथ कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है। जानिए इसकी खास बातें-
- उपग्रहों में भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया, ब्रिटेन और अमेरिका समेत 14 देशों के 29 नैनो उपग्रह शामिल हैं।
- लेटेस्ट रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट की लॉन्चिंग के बाद आतंकी कैंप और दुश्मन के बंकर्स को खोजने में और ज्यादा मदद भारत को मिलेगी।
- यह सेटेलाइट अपने बहुपक्षीय कैमरों का उपयोग करके नियमित रूप से दूरस्थ संवेदन सेवाएं प्रदान करेगा। इस सैटलाइट द्वारा भेजी गई तस्वीरों का इस्तेमाल कार्टोग्राफिक उपयोग के लिए, शहरी और ग्रामीण एप्लिकेशन, तटीय भूमि उपयोग और विनियमन, उपयोगिता प्रबंधन जैसे सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण, भू-उपयोग के नक्शे का निर्माण, भौगोलिक और मानव निर्मित सुविधाओं और विभिन्न अन्य भूमि सूचना प्रणाली (एलआईएस) लाने के लिए पता लगाने के साथ-साथ भौगोलिक सूचना प्रणाली के लिए भी किया जा सकेगा।
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- यह अंतरिक्ष में भी पाकिस्तानी आतंकियों पर नजर रखेगा। इसके अलावा इससे बहुत ही सूक्ष्म फोटोज को लेने मे सहायता मिलेगी।
- धरती के अवलोकन के लिए प्रक्षेपित किए जा रहे 712 किलोग्राम वजनी कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह पीएसएलवी-सी38 के साथ करीब 243 किलोग्राम वजनी 30 अन्य सह उपग्रहों को भी एक साथ प्रक्षेपित किया।
- इसमें एक नैनो सैटलाइट इंडिया की भी है, जिसे तमिलनाड़ु के कन्याकुमारी स्थित नूरुल इस्लाम यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने बनाया है।
- इस सेटेलाइट से अंतरिक्ष में भी भारत को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
- यह उपग्रह 505 किलोमीटर ध्रुवीय सूर्य स्थैतिक कक्षा (एसएसओ) में पहुंचेगा है। पीएसएलवी-सी38 के साथ भेजे गए इन सभी उपग्रहों का कुल वजन करीब 955 किलोग्राम है। --
- इसके प्रक्षेपण के बाद यह माना जा रहा है कि इसरो इसके जरिये अंतरिक्ष पर अपनी संपत्ति की रक्षा सजग तरीके से कर सकेगा।
- पीएसएलवी-सी38 को अंतरिक्ष केंद्र के फर्स्ट लांच पैड से प्रक्षेपित किया गया है। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (एंट्रिक्स), इसरो की व्यावसायिक शाखा और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के बीच व्यावसायिक व्यवस्थाओं के तहत 29 अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता नैनो उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया।
- यह इसरो ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का यह 40वां (पीएसएलवी-सी38) सफर होगा।
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- उपग्रहों में भारत के अलावा ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चिली, चेक गणराज्य, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया, ब्रिटेन और अमेरिका समेत 14 देशों के 29 नैनो उपग्रह शामिल हैं।
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- लेटेस्ट रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट की लॉन्चिंग के बाद आतंकी कैंप और दुश्मन के बंकर्स को खोजने में और ज्यादा मदद भारत को मिलेगी।
- यह सेटेलाइट अपने बहुपक्षीय कैमरों का उपयोग करके नियमित रूप से दूरस्थ संवेदन सेवाएं प्रदान करेगा। इस सैटलाइट द्वारा भेजी गई तस्वीरों का इस्तेमाल कार्टोग्राफिक उपयोग के लिए, शहरी और ग्रामीण एप्लिकेशन, तटीय भूमि उपयोग और विनियमन, उपयोगिता प्रबंधन जैसे सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण, भू-उपयोग के नक्शे का निर्माण, भौगोलिक और मानव निर्मित सुविधाओं और विभिन्न अन्य भूमि सूचना प्रणाली (एलआईएस) लाने के लिए पता लगाने के साथ-साथ भौगोलिक सूचना प्रणाली के लिए भी किया जा सकेगा।
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- यह अंतरिक्ष में भी पाकिस्तानी आतंकियों पर नजर रखेगा। इसके अलावा इससे बहुत ही सूक्ष्म फोटोज को लेने मे सहायता मिलेगी।
- धरती के अवलोकन के लिए प्रक्षेपित किए जा रहे 712 किलोग्राम वजनी कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह पीएसएलवी-सी38 के साथ करीब 243 किलोग्राम वजनी 30 अन्य सह उपग्रहों को भी एक साथ प्रक्षेपित किया।
- इसमें एक नैनो सैटलाइट इंडिया की भी है, जिसे तमिलनाड़ु के कन्याकुमारी स्थित नूरुल इस्लाम यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने बनाया है।
- इस सेटेलाइट से अंतरिक्ष में भी भारत को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।
- यह उपग्रह 505 किलोमीटर ध्रुवीय सूर्य स्थैतिक कक्षा (एसएसओ) में पहुंचेगा है। पीएसएलवी-सी38 के साथ भेजे गए इन सभी उपग्रहों का कुल वजन करीब 955 किलोग्राम है। --
- इसके प्रक्षेपण के बाद यह माना जा रहा है कि इसरो इसके जरिये अंतरिक्ष पर अपनी संपत्ति की रक्षा सजग तरीके से कर सकेगा।
- पीएसएलवी-सी38 को अंतरिक्ष केंद्र के फर्स्ट लांच पैड से प्रक्षेपित किया गया है। एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (एंट्रिक्स), इसरो की व्यावसायिक शाखा और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के बीच व्यावसायिक व्यवस्थाओं के तहत 29 अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता नैनो उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया।
- यह इसरो ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) का यह 40वां (पीएसएलवी-सी38) सफर होगा।