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चंद्रयान-2 भेजने वाले इसरो के वैज्ञानिकों की काटी जा रही है तनख्वाह, सरकार को लिखी चिट्ठी
Tue, 30 Jul 2019 10:17 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 30 Jul 2019 10:17 PM IST
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ISRO Chief K Sivan
- फोटो : PTI
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भारत के अंतरिक्ष अभियान में लंबी छलांग लगाने वाले चंद्रयान-2 मिशन के वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती का मामला सुर्खियों में आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य मोतीलाल वोरा ने मंगलवार को राज्यसभा में इसरो के वैज्ञानिकों के वेतन काटने का मामला उठाया।
वोरा ने कहा कि जब पूरा देश चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को सफलता पर बधाई दे रहा है, ऐसे में भारत सरकार उनके वेतन में कटौती कर रही है।
बता दें कि वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि की इजाजत राष्ट्रपति ने दी थी। सरकार की सैद्धांतिक तौर पर कोशिश रहती है कि वैज्ञानिकों को बेहतर वेतनमान दिया जा सके ताकि युवा टैलेंट्स को विज्ञान शोध के क्षेत्र में आने के लिए प्रोतसाहन मिले।
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मोतीलाल वोरा ने राज्यसभा में कहा कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने लागू किया था। आदेश के मुताबिक इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट तौर पर 'तनख्वाह' माना जाना था।
उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 एम1 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था।
इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को जारी एक आदेश में कहा कि वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साल 1996 से मिल रही दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि को रोका जा रहा है। सरकार ने यह उस वक्त किया जब इसरो के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में भारत की लंबी छलांग लगाने के लिए दिन-रात एक कर रहे थे। आज पूरा देश जिनके दम पर फख्र से सर ऊंचा कर रहा है और प्रधानमंत्री देशवासियों को बधाई दे रहे हैं, उन्हीं वैज्ञानिकों को आर्थिक रूप से चपत लगाई गई।
वैज्ञानिकों के संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन (एसईए) ने इसरो के चेयरमैन डॉ. के सिवन को पत्र लिखकर वेतन कटौती को रोकने के लिए केंद्र सरकार के आदेश को रद्द करने में सहायता करें। एसईए के अध्यक्ष ए मणिरमन ने इसरो चेयरमैन को लिखे पत्र में कहा था कि सरकारी कर्मचारी के वेतन में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक बेहद गंभीर स्थिति न खड़ी हो जाए। वेतन में कटौती होने से वैज्ञानिकों के उत्साह में कमी आएगी। इसरो के वैज्ञानिक सरकार के इस कदम से बेहद हैरत में हैं और दुखी हैं।
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वोरा ने कहा कि जब पूरा देश चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को सफलता पर बधाई दे रहा है, ऐसे में भारत सरकार उनके वेतन में कटौती कर रही है।
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बता दें कि वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि की इजाजत राष्ट्रपति ने दी थी। सरकार की सैद्धांतिक तौर पर कोशिश रहती है कि वैज्ञानिकों को बेहतर वेतनमान दिया जा सके ताकि युवा टैलेंट्स को विज्ञान शोध के क्षेत्र में आने के लिए प्रोतसाहन मिले।
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मोतीलाल वोरा ने राज्यसभा में कहा कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने लागू किया था। आदेश के मुताबिक इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट तौर पर 'तनख्वाह' माना जाना था।
उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के सबसे ताकतवर बाहुबली रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 एम1 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था।
इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को जारी एक आदेश में कहा कि वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साल 1996 से मिल रही दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि को रोका जा रहा है। सरकार ने यह उस वक्त किया जब इसरो के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में भारत की लंबी छलांग लगाने के लिए दिन-रात एक कर रहे थे। आज पूरा देश जिनके दम पर फख्र से सर ऊंचा कर रहा है और प्रधानमंत्री देशवासियों को बधाई दे रहे हैं, उन्हीं वैज्ञानिकों को आर्थिक रूप से चपत लगाई गई।
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